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Hamirpur News: किसानों ने नहीं खींचने दी खड़ी फसल के ऊपर से एचटी लाइन
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sun, 25 Jan 2026 12:04 AM IST
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बिवांर। थानाक्षेत्र के निवादा गांव के किसानों ने शनिवार को सुमेरपुर-सरीला 132 केवी हाईटेंशन लाइन के तार खींचने से विद्युत कर्मचारियों को मना कर दिया। किसानों का कहना है कि मौजूदा में उनके खेतों पर फसलें खड़ी हैं। इससे उनका भारी नुकसान होगा। उन्होंने फसल कटने के बाद लाइन खींचे जाने की बात कही है।
बता दें कि 132 केवी की हाईटेंशन लाइन के पोल किसानों के खेतों में खड़े किए गए हैं। इनमें तार खींचे जाने हैं। किसानों के विरोध के बाद ट्रांसमिशन जेई मानसिंह ने बिवांर पुलिस को किसानों द्वारा अवरोध उत्पन्न करने की तहरीर दी है। जेई ने बताया कि किसानों को पोल खड़े करने से पहले फाउंडेशन वर्क के समय नुकसान का आंकलन कर मुआवजा की एक किश्त दी जा चुकी है। साथ ही तार खींचने से होने वाले नुकसान का भी मुआवजा दिया जाएगा।
किसानों का रकबा मापकर कृषि अधिकारी से भूमि उत्पादकता सूची ली जाएगी और मंडी समिति से संबंधित जींस का दाम पता कर नुकसान की भरपाई करायी जाएगी। पूरा काम होने पर अधिग्रहित भूमि का मुआवजा दिया जाएगा। कहा कि किसानों ने आपसी विचार-विमर्श के लिए तीन दिन का समय मांगा है।
वहीं, किसान अनुसुइया देवी, प्रदीप सिंह, देवीदीन विश्कर्मा, दिलीप पाठक, सुरेश सक्सेना, शैलेंद्र सिंह, रामगोपाल यादव, रामशरण सिंह परिहार, देवेंद्र सिंह और राजू पांडेय का कहना है कि मुआवजा खराब होने वाली फसल की वास्तविक कीमत से कम मिल रहा है।
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बता दें कि 132 केवी की हाईटेंशन लाइन के पोल किसानों के खेतों में खड़े किए गए हैं। इनमें तार खींचे जाने हैं। किसानों के विरोध के बाद ट्रांसमिशन जेई मानसिंह ने बिवांर पुलिस को किसानों द्वारा अवरोध उत्पन्न करने की तहरीर दी है। जेई ने बताया कि किसानों को पोल खड़े करने से पहले फाउंडेशन वर्क के समय नुकसान का आंकलन कर मुआवजा की एक किश्त दी जा चुकी है। साथ ही तार खींचने से होने वाले नुकसान का भी मुआवजा दिया जाएगा।
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किसानों का रकबा मापकर कृषि अधिकारी से भूमि उत्पादकता सूची ली जाएगी और मंडी समिति से संबंधित जींस का दाम पता कर नुकसान की भरपाई करायी जाएगी। पूरा काम होने पर अधिग्रहित भूमि का मुआवजा दिया जाएगा। कहा कि किसानों ने आपसी विचार-विमर्श के लिए तीन दिन का समय मांगा है।
वहीं, किसान अनुसुइया देवी, प्रदीप सिंह, देवीदीन विश्कर्मा, दिलीप पाठक, सुरेश सक्सेना, शैलेंद्र सिंह, रामगोपाल यादव, रामशरण सिंह परिहार, देवेंद्र सिंह और राजू पांडेय का कहना है कि मुआवजा खराब होने वाली फसल की वास्तविक कीमत से कम मिल रहा है।
