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Hamirpur News: निबंधन विभाग में निजीकरण के विरोध में वकीलों का प्रदर्शन
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फोटो 24 एमएएचपी 05 परिचय-तहसील में तहसीलदार दिवाकर मिश्रा को ज्ञापन सौंपते अधिवक्ता। संवाद
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महोबा। निबंधन विभाग में बढ़ते निजीकरण से भविष्य में रोजगार प्रभावित होने की आशंका को लेकर अधिवक्ता आंदोलित हो गए हैं। बुधवार को अधिवक्ताओं ने महोबा तहसील पहुंच प्रदर्शन कर विरोध जताया। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार दिवाकर मिश्रा को सौंपकर समस्याओं का निराकरण कराने की मांग की।
अधिवक्ता हरीशरण सक्सेना के नेतृत्व में भारत विशाल शुक्ल, चंद्रशेखर स्वर्णकार, सज्जन प्रसाद द्विवेदी, बलवीर सिंह, बृजेंद्र राठौर, नफीस, सोहराब, महबूब आदि ने तहसीलदार को साैंपे ज्ञापन में बताया कि निबंधन विभाग की ओर से ई-गवर्नेस मॉडल के तहत दस्तावेज पंजीकरण कार्यों में निजी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रशासनिक सुधार, डिजिटलीकरण, अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण, पारदर्शिता व नागरिकों को त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना, किसी भी आधुनिक शासन व्यवस्था के आवश्यक लक्ष्य हैं, लेकिन निबंधन व्यवस्था के महत्वपूर्ण कार्यों को निजी संस्थाओं से संचालित किया जाना एक सीमित समूह के प्रभाव स्थापित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे प्रत्यक्ष व परोक्ष जुड़े दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता, स्टांप विक्रेता, कंप्यूटर ऑपरेटर, मुंशी, अन्य लाखों श्रमिक और उनके परिवार आजीविका को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने प्रस्तावित ई-गवर्नेस मॉडल को लागू करने से पहले उसकी व्यापक समीक्षा कराने, क्रियान्वयन से पहले संवाद स्थापित करने के साथ ही आधुनिकीकरण होने पर परिवारों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देने की मांग की है।
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अधिवक्ता हरीशरण सक्सेना के नेतृत्व में भारत विशाल शुक्ल, चंद्रशेखर स्वर्णकार, सज्जन प्रसाद द्विवेदी, बलवीर सिंह, बृजेंद्र राठौर, नफीस, सोहराब, महबूब आदि ने तहसीलदार को साैंपे ज्ञापन में बताया कि निबंधन विभाग की ओर से ई-गवर्नेस मॉडल के तहत दस्तावेज पंजीकरण कार्यों में निजी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को कदम उठाए जा रहे हैं।
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प्रशासनिक सुधार, डिजिटलीकरण, अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण, पारदर्शिता व नागरिकों को त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना, किसी भी आधुनिक शासन व्यवस्था के आवश्यक लक्ष्य हैं, लेकिन निबंधन व्यवस्था के महत्वपूर्ण कार्यों को निजी संस्थाओं से संचालित किया जाना एक सीमित समूह के प्रभाव स्थापित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे प्रत्यक्ष व परोक्ष जुड़े दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता, स्टांप विक्रेता, कंप्यूटर ऑपरेटर, मुंशी, अन्य लाखों श्रमिक और उनके परिवार आजीविका को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने प्रस्तावित ई-गवर्नेस मॉडल को लागू करने से पहले उसकी व्यापक समीक्षा कराने, क्रियान्वयन से पहले संवाद स्थापित करने के साथ ही आधुनिकीकरण होने पर परिवारों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देने की मांग की है।