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Hamirpur News: नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या के मामले में दोषी को उम्रकैद
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हमीरपुर। करीब सात साल पुराने नाबालिग से दुष्कर्म और उसकी हत्या के चर्चित मामले में पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार खरवार ने सोमवार को फैसला सुनाया। आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा विभिन्न धाराओं में सजा के साथ कुल 49 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
कुरारा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी की करीब 10 वर्षीय पुत्री आठ जून 2019 की सुबह गांव के कब्रिस्तान के पास मृत अवस्था में मिली थी। वादी ने गांव के ही वीरू उर्फ बृजेंद्र व पप्पू उर्फ नफीस पर बच्ची के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया। पुलिस ने सूचना के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करके कार्रवाई शुरू की। वीडियोग्राफी के साथ शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर नौ जून 2019 को कोर्ट में पेश किया जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। कुरारा पुलिस ने विवेचना के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान सह अभियुक्त पप्पू उर्फ नफीस की मृत्यु हो गई। न्यायालय ने 25 सितंबर 2024 को उसके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी। इसके बाद दूसरे आरोपी वीरू उर्फ बृजेंद्र के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही।
साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376-डी, 302 तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं धारा 363 और 201 तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(va) के तहत पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और 49 हजार अर्थदंड की सजा भी सुनाई। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
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सहअभियुक्त ने जेल में की थी आत्महत्या
आरोपी पप्पू उर्फ नफीस हमीरपुर के जिला कारागार में बंद था। विचाराधीन कैदी ने घटना के पांच साल बाद 22 अगस्त 2024 को जिला कारागार के पाकशाला (स्टोर) में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में कोर्ट ने 25 सितंबर 2024 को उसके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी थी।
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कुरारा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी की करीब 10 वर्षीय पुत्री आठ जून 2019 की सुबह गांव के कब्रिस्तान के पास मृत अवस्था में मिली थी। वादी ने गांव के ही वीरू उर्फ बृजेंद्र व पप्पू उर्फ नफीस पर बच्ची के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने का आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया। पुलिस ने सूचना के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करके कार्रवाई शुरू की। वीडियोग्राफी के साथ शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर नौ जून 2019 को कोर्ट में पेश किया जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। कुरारा पुलिस ने विवेचना के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान सह अभियुक्त पप्पू उर्फ नफीस की मृत्यु हो गई। न्यायालय ने 25 सितंबर 2024 को उसके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी। इसके बाद दूसरे आरोपी वीरू उर्फ बृजेंद्र के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही।
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साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376-डी, 302 तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं धारा 363 और 201 तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(va) के तहत पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और 49 हजार अर्थदंड की सजा भी सुनाई। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
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सहअभियुक्त ने जेल में की थी आत्महत्या
आरोपी पप्पू उर्फ नफीस हमीरपुर के जिला कारागार में बंद था। विचाराधीन कैदी ने घटना के पांच साल बाद 22 अगस्त 2024 को जिला कारागार के पाकशाला (स्टोर) में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में कोर्ट ने 25 सितंबर 2024 को उसके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी थी।