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Hamirpur News: बेतवा पर बने चिकासी-मोहाना पुल की स्लैब चार माह में दूसरी बार उखड़ी
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फोटो 10 एचएएमपी 01- राठ-उरई मार्ग पर बेतवा पुल की उखड़ी स्लैब। संवाद
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गोहांड/राठ (हमीरपुर)। बेतवा नदी पर चिकासी-मोहाना पुल की 1.54 करोड़ रुपये की मरम्मत हुई थी। इसके चार माह में ही पुल की स्लैब दूसरी बार उखड़ गई है। पहले जून माह में स्लैब उखड़ी थी, तब पीडब्ल्यूडी ने उसकी मरम्मत कराई थी। अब दोबारा स्लैब उखड़ने से कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यह पुल हमीरपुर और जालौन जनपद की सीमा पर स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1983 में बेतवा नदी पर चिकासी व मोहाना के बीच हुआ था। यह दोनों जिलों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पुल से प्रतिदिन 20 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। रोजाना एक लाख से अधिक लोग आवागमन करते हैं। क्षेत्र की करीब पांच लाख की आबादी इस पुल पर निर्भर है। पुल के जर्जर होने पर अमर उजाला ने दो अक्तूबर 2025 को ‘बेतवा नदी पर बना पुल कर रहा घायल’ समाचार प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेकर विभाग ने पुल की मरम्मत की सुध ली थी।
पीडब्ल्यूडी ने टेंडर निकालकर 1.54 करोड़ रुपये की लागत से पुल की मरम्मत कराई थी। इस दौरान पांच फरवरी से 16 मार्च तक पुल से आवागमन ठप रहा था जो 40 दिन की अवधि थी। आवागमन ठप होने से करीब पचास गांव की डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित हुई थी। इस अवधि में पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गई थी। एक्सपेंशन जाॅइंट बदले गए और सतह को मजबूत करने का काम किया गया। 17 मार्च से पुल पर आवागमन बहाल हुआ था।
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तीन माह बाद ही पुल की स्लैब उखड़ने लगी थी। सरिया दिखने पर विभाग ने फिर मरम्मत कराकर स्लैब सही कराई थी। अब दोबारा स्लैब उखड़ने पर लोगों ने आरोप लगाए हैं। कहा कि घटिया निर्माण के कारण बार-बार स्लैब उखड़ रही है।
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यह पुल हमीरपुर और जालौन जनपद की सीमा पर स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1983 में बेतवा नदी पर चिकासी व मोहाना के बीच हुआ था। यह दोनों जिलों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पुल से प्रतिदिन 20 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। रोजाना एक लाख से अधिक लोग आवागमन करते हैं। क्षेत्र की करीब पांच लाख की आबादी इस पुल पर निर्भर है। पुल के जर्जर होने पर अमर उजाला ने दो अक्तूबर 2025 को ‘बेतवा नदी पर बना पुल कर रहा घायल’ समाचार प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेकर विभाग ने पुल की मरम्मत की सुध ली थी।
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पीडब्ल्यूडी ने टेंडर निकालकर 1.54 करोड़ रुपये की लागत से पुल की मरम्मत कराई थी। इस दौरान पांच फरवरी से 16 मार्च तक पुल से आवागमन ठप रहा था जो 40 दिन की अवधि थी। आवागमन ठप होने से करीब पचास गांव की डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित हुई थी। इस अवधि में पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गई थी। एक्सपेंशन जाॅइंट बदले गए और सतह को मजबूत करने का काम किया गया। 17 मार्च से पुल पर आवागमन बहाल हुआ था।
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तीन माह बाद ही पुल की स्लैब उखड़ने लगी थी। सरिया दिखने पर विभाग ने फिर मरम्मत कराकर स्लैब सही कराई थी। अब दोबारा स्लैब उखड़ने पर लोगों ने आरोप लगाए हैं। कहा कि घटिया निर्माण के कारण बार-बार स्लैब उखड़ रही है।