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Hamirpur News: अलम के जुलूस में या हुसैन की सदाओं से गूंजा शहर
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फोटो21एचएएमपी 32- शहर में निकलता अलम का जुलूस। संवाद
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हमीरपुर/मौदहा। मुहर्रम की पांचवीं तारीख पर रविवार को शहर से लेकर कस्बे तक में अकीदतमंदों ने पारंपरिक ढंग से अलम का जुलूस निकाला। पूरे मार्ग पर या हुसैन और या अब्बास की सदाएं गूंजती रहीं। जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर शहीद-ए-करबला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। करबला के वाकयों का मार्मिक बयान सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं।
शहर में अलम का जुलूस कांशीराम कॉलोनी के पास स्थित हैदरी इमाम चौक से उठाया गया। सूफी गंज चौराहा के इमाम चौक से होता हुआ भूरी इमाम बाड़ा से होकर गुजरा जहां जगह-जगह लोगों ने शर्बत और पानी का वितरण किया। जुलूस में अकीदतमंद कर्बला की याद करते हुए चल रहे थे। जुलूस कमेटी के अध्यक्ष बली अहमद साबरी, उपाध्यक्ष सलीम बारसी, सुभान कुरैसी, शकील अहमद, जावेद, फकरुद्दीन समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
मौदहा प्रतिनिधि के मुताबिक शनिवार रात उपरौस स्थित इमाम चौक पर आयोजित मजलिस में करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। मजलिस में मौलाना इरफान अमजदी और मौलाना शैफ रजा कानपुरी ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करबला का पैगाम इंसानियत, सब्र और सच्चाई के रास्ते पर डटे रहने की सीख देता है। मजलिस के दौरान शोक और अकीदत का माहौल बना रहा। कारी फारूक, आकिल बिजनौरी, रमजान साहिल, नसीम आलम, कारी जमील, शफी अहमद और इनायत मुईन चिश्ती ने नात और मनकबत पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।
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शहर में अलम का जुलूस कांशीराम कॉलोनी के पास स्थित हैदरी इमाम चौक से उठाया गया। सूफी गंज चौराहा के इमाम चौक से होता हुआ भूरी इमाम बाड़ा से होकर गुजरा जहां जगह-जगह लोगों ने शर्बत और पानी का वितरण किया। जुलूस में अकीदतमंद कर्बला की याद करते हुए चल रहे थे। जुलूस कमेटी के अध्यक्ष बली अहमद साबरी, उपाध्यक्ष सलीम बारसी, सुभान कुरैसी, शकील अहमद, जावेद, फकरुद्दीन समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
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मौदहा प्रतिनिधि के मुताबिक शनिवार रात उपरौस स्थित इमाम चौक पर आयोजित मजलिस में करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। मजलिस में मौलाना इरफान अमजदी और मौलाना शैफ रजा कानपुरी ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करबला का पैगाम इंसानियत, सब्र और सच्चाई के रास्ते पर डटे रहने की सीख देता है। मजलिस के दौरान शोक और अकीदत का माहौल बना रहा। कारी फारूक, आकिल बिजनौरी, रमजान साहिल, नसीम आलम, कारी जमील, शफी अहमद और इनायत मुईन चिश्ती ने नात और मनकबत पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।

फोटो21एचएएमपी 32- शहर में निकलता अलम का जुलूस। संवाद