{"_id":"6975170323427e9c99035459","slug":"voters-are-sweating-to-gather-evidence-hamirpur-news-c-12-1-knp1008-1405125-2026-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur News: साक्ष्य जुटाने में मतदाताओं के छूट रहे पसीने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur News: साक्ष्य जुटाने में मतदाताओं के छूट रहे पसीने
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sun, 25 Jan 2026 12:31 AM IST
विज्ञापन
फोटो24एचएएमपी 28- सुनवाई करते नायब तहसीलदार। संवाद
विज्ञापन
हमीरपुर/सरीला। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के नो-मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई शनिवार को मुस्करा व पतारा में हुई। यहां पर अधिकारियों ने नोटिस के संदर्भ में मतदाताओं की ओर से दिए गए साक्ष्यों को देखा। जो साक्ष्य सही पाए गए उन्हें ओके किया गया और जिनमें कमी थी उन्हें पूरा करने की सलाह दी गई।
एसआईआर फार्म भरते समय जो कमियां रह गई थी, उन्हें नो-मैपिंग की श्रेणी में रखा गया। ऐसे सभी मतदाताओं को निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिस भेजे गए। इसी क्रम में 24 जनवरी को नायब तहसीलदार महेंद्र गुप्ता ने बीआरसी मुस्करा में नोटिस की सुनवाई की। मतदाताओं ने अभिलेख प्रस्तुत कर त्रुटियों के सुधार के लिए आवेदन किया। उन्होंने बताया कि बीते तीन दिनों में 73 नोटिस की सुनवाई हुई। वहीं दूसरी तरफ पतारा में भी नोटिस की सुनवाई हुई। वहीं सरीला प्रतिनिधि के अनुसार तहसील सरीला में भेजे गए नोटिस पर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं तहसीलदार राम मोहन ने सुनवाई की। बंगरा, पचखुरा, ममना और बरखेड़ा गांवों के कुल 82 मतदाताओं सुनवाई में पहुंचे।
मतदाताओं के कागजात चेक किए गए। अधूरे साक्ष्यों वाले नोटिस धारकों को वापस भेजा गया। बताया कि नो मैपिंग में चिह्नित 10,878 मतदाताओं को 10 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के माध्यम से बीएलओ द्वारा नोटिस वितरित किए जा रहे हैं। बूथ संख्या 57 से 72 बूथों पर कुल 1,182 मतदाताओं के सापेक्ष 902 नोटिस बीएलओ द्वारा वितरित किए जा चुके हैं। सुनवाई के दौरान आरके निर्वाचन निर्वाचन कार्यालय के रघुकुल द्विवेदी मौजूद रहे। इसके अलावा 25 जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
वर्ष 2003 की सूची में माता-पिता का नाम नहीं
हमीरपुर। शहर के महिला थाना के पीछे रहने वाली गोमती देवी की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। वह दो दिन से नोटिस सुनवाई के लिए परेशान है। जरूरी साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि उनका मायका भरुआ सुमेरपुर में है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में माता-पिता का नाम दर्ज नहीं है। इस वजह से उनकी सुनवाई नहीं हो रही। माता-पिता के नाम की सूची को अनिवार्य बताया गया है। गोमती के पुत्र विशाल का कहना है कि और कागजात है लेकिन वह मान्य नहीं किए जा रहे।
दो दिन से चक्कर काट रही महिला, नहीं मिले अधिकारी
शहर के मुहल्ला कजियाना निवासी अनुसुइया अपने पति रामबाबू के साथ नोटिस सुनवाई के लिए दो दिन से चक्कर काट रही हैं लेकिन कोई अधिकारी नहीं मिला। शनिवार को भी अधिकारी मौजूद नहीं थे, लिहाजा वापस लौटना पड़ा। हालांकि आज अगर अधिकारी होते भी तो उनकी सुनवाई नहीं हो पाती। क्योंकि उनके पास माता-पिता का दूसरा साक्ष्य नहीं था। वह आधार कार्ड लाना ही भूल गई।
Trending Videos
एसआईआर फार्म भरते समय जो कमियां रह गई थी, उन्हें नो-मैपिंग की श्रेणी में रखा गया। ऐसे सभी मतदाताओं को निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिस भेजे गए। इसी क्रम में 24 जनवरी को नायब तहसीलदार महेंद्र गुप्ता ने बीआरसी मुस्करा में नोटिस की सुनवाई की। मतदाताओं ने अभिलेख प्रस्तुत कर त्रुटियों के सुधार के लिए आवेदन किया। उन्होंने बताया कि बीते तीन दिनों में 73 नोटिस की सुनवाई हुई। वहीं दूसरी तरफ पतारा में भी नोटिस की सुनवाई हुई। वहीं सरीला प्रतिनिधि के अनुसार तहसील सरीला में भेजे गए नोटिस पर सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं तहसीलदार राम मोहन ने सुनवाई की। बंगरा, पचखुरा, ममना और बरखेड़ा गांवों के कुल 82 मतदाताओं सुनवाई में पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मतदाताओं के कागजात चेक किए गए। अधूरे साक्ष्यों वाले नोटिस धारकों को वापस भेजा गया। बताया कि नो मैपिंग में चिह्नित 10,878 मतदाताओं को 10 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के माध्यम से बीएलओ द्वारा नोटिस वितरित किए जा रहे हैं। बूथ संख्या 57 से 72 बूथों पर कुल 1,182 मतदाताओं के सापेक्ष 902 नोटिस बीएलओ द्वारा वितरित किए जा चुके हैं। सुनवाई के दौरान आरके निर्वाचन निर्वाचन कार्यालय के रघुकुल द्विवेदी मौजूद रहे। इसके अलावा 25 जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए।
वर्ष 2003 की सूची में माता-पिता का नाम नहीं
हमीरपुर। शहर के महिला थाना के पीछे रहने वाली गोमती देवी की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। वह दो दिन से नोटिस सुनवाई के लिए परेशान है। जरूरी साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि उनका मायका भरुआ सुमेरपुर में है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में माता-पिता का नाम दर्ज नहीं है। इस वजह से उनकी सुनवाई नहीं हो रही। माता-पिता के नाम की सूची को अनिवार्य बताया गया है। गोमती के पुत्र विशाल का कहना है कि और कागजात है लेकिन वह मान्य नहीं किए जा रहे।
दो दिन से चक्कर काट रही महिला, नहीं मिले अधिकारी
शहर के मुहल्ला कजियाना निवासी अनुसुइया अपने पति रामबाबू के साथ नोटिस सुनवाई के लिए दो दिन से चक्कर काट रही हैं लेकिन कोई अधिकारी नहीं मिला। शनिवार को भी अधिकारी मौजूद नहीं थे, लिहाजा वापस लौटना पड़ा। हालांकि आज अगर अधिकारी होते भी तो उनकी सुनवाई नहीं हो पाती। क्योंकि उनके पास माता-पिता का दूसरा साक्ष्य नहीं था। वह आधार कार्ड लाना ही भूल गई।

फोटो24एचएएमपी 28- सुनवाई करते नायब तहसीलदार। संवाद
