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Hamirpur News: खेतों में पानी, आंखों में आंसू... टूट रहीं अन्नदाता की उम्मीदें
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:06 AM IST
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फोटो 08 एचएएमपी 10- खेतों में वन विभाग द्वारा खोदे गए गड्ढे। संवाद
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हमीरपुर। बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार रात रुक-रुक कर हुई बारिश और तेज हवाओं ने गेहूं की फसल गिरा दी है। जिले भर में आठ मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। खेतों में पानी भरा है। कटे पड़े गेहूं के गट्ठर और बालियों का दाना भी काला पड़ गया है। किसानों का कहना है कि पांच दशक बाद अप्रैल माह में ऐसी बारिश देखने को मिल रही है। इससे किसानों की गेहूं फसलों को 30-35 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है। उत्पादन गिरने की आशंका से किसानों की उम्मीदें टूट रही हैं।
राठ के चिल्ली निवासी रघुवीर सिंह ने बताया कि पहले मटर, सरसों की फसल जब तैयार थी, तब बारिश हो गई और उसने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया, करीब 10 फीसदी पैदावार कम हो गई। अब गेहूं की फसल के साथ भी यही स्थिति बन गई है। बारिश ने इस बार किसानों की कमर तोड़ दी है। वहीं कारीमाटी निवासी किसान कृष्ण कुमार सिंह भी फसल देख चिंता में घिरे हैं। इनकी फसल का दाना काला पड़ गया है। अगर इसी तरह आगे भी बारिश होती रही तो गेहूं की दाना खेतों में ही अंकुरित होने लगेगा। अभी उपज में 30-35 फीसदी तक के नुकसान की संभावना है।
केवीके वैज्ञानिक डॉ. एनके यादव ने बताया कि अभी दो दिन मौसम खराब रहने की संभावना है। आठ से 10 एमएम बारिश हो सकती है। क्षेत्र में किसानों की करीब 15 फीसदी गेहूं व चना की फसलें खेतों में अभी पड़ी हैं।
सबसे ज्यादा गेहूं की फसल प्रभावित
बारिश से गेहूं की फसलों में भारी नुकसान की आशंका है। बारिश के साथ चलीं तेज हवाओं से खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल बिछ गई है। इससे गेहूं का दाना पतला हो जाएगा। किसानों का कहना है कि भींगी फसल को सुखाने में समय लगने के साथ ही उसकी पैदावार में भी कमी होगी। इसके अलावा अभी अरहर, चना और सरसों की करीब 20 फीसदी फसलें अभी खेतों में पड़ी हुई हैं।
नुकसान के लिए जांच के आदेश
जिले में 2.97 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि है। इनमें 1.58 लाख हेक्टेयर में गेहूं, 1.10 लाख हेक्टेयर में दलहनी और 29122 हेक्टेयर में राई, सरसों की फसलें किसानों ने बोई थीं। सदर एसडीएम केडी शर्मा ने कहा है कि बारिश में फसल के नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। गांव-गांव टीमें भेजी जा रही हैं। जहां से भी किसान सूचना दे रहे हैं, वहां टीमें भेजी जा रही हैं। 33 फीसदी से कम नुकसान पर कोई क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का प्रावधान नहीं है।
फसलों को सूखने तक का नहीं मिल रहा मौका
बीती पूरी रात हुई बारिश ने नींद उड़ाकर रख दी है। खेत में कटी गेहूं की फसल गीली हो गई है। लगातार हो रही बारिश से फसलों को सूखने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है।- रामबाबू, ललपुरा।
नमी के चलते बालियों में दीमक लगने का डर
फसल का बीमा भी नहीं कराया है। 11 बीघे खेत में गेहूं की फसल बोई थी। मजदूरों से कटवाकर गट्ठा बंधे खेतों में पड़े हैं। पूरी रात बारिश से पूरी फसल भींग गई है। नमी के चलते बालियों में दीमक लगने का भी डर है।- गयादीन, पौथिया।
पूरी मेहनत में फिरा पानी
पांच बीघा खेत बटाई में लेकर चना बोया था। फसल कट गई है, लेकिन बारिश के कारण पूरी मेहनत में पानी फिर गया है।- सीताराम निषाद, पौथिया।
इसी तरह होती रही बारिश तो अंकुरित होने लगेगा दाना
अरहर की फसल खेत में कटी पड़ी है। इसी तरह बारिश होती रही तो दाना अंकुरित होने लगेगा।- छुटकन, कलौलीजार।
बारिश व ओलावृष्टि ने तोड़ी किसानों की कमर
बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। मौजूदा में 35 फीसदी से अधिक नुकसान गेहूं फसलों में हुआ है। आलाधिकारी खानापूर्ति कर रहे हैं। - लल्लू, भैंस्ता मौदहा।
बर्बाद हो रहीं फसलें नहीं हुआ सर्वे
गांव व आसपास क्षेत्र में ओलावृष्टि के साथ एक सप्ताह से लगातार बारिश हो रही है। इससे गेहूं, चना आदि फसलों का नुकसान हुआ है। अब तक जिला प्रशासन ने सर्वे तक नहीं कराया है। - रामहेत वर्मा, बिवांर।
फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। आपदा राहत के तहत जहां फसलों का नुकसान 33 फीसदी से अधिक है। वहीं क्षतिपूर्ति दी जाएगी। इससे कम नुकसान पर कोई क्षतिपूर्ति नहीं है। हालांकि 10 से 15 फीसदी तक नुकसान की संभावना जताई जा रही है। एक-दो दिनों में सर्वे रिपोर्ट आ जाएगी। तभी स्थिति साफ हो सकेगी।
राकेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
बारिश से खेतों में कटी पड़ी फसलों में नुकसान
भरुआसुमेरपुर। किसान शुभकरण सिंह परिहार, मानसिंह भदौरिया, उदयभान यादव, अनूप श्रीवास, धीरेंद्र यादव आदि ने बताया कि बारिश के कारण खेतों में कटी पड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, कस्बे के सहकारी समिति गेहूं बेचने आए किसानों का गेहूं बारिश के चलते भींग गया। इससे किसान परेशान नजर आए। (संवाद)
10 बीघा की फसल भीगी
कुरारा। क्षेत्र में मंगलवार शाम करीब पांच बजे तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। इससे खेतों में कटी पड़ी गेहूं और चना की फसल भींग गईं। जखेला गांव के किसान शिवम सिंह ने बताया कि 10 बीघे में चना की फसल कटी पड़ी थी। इसकी थ्रेसरिंग हो रही थी कि तभी तेज आंधी व बारिश होने के चलते काम ठप हो गया। भैंसापाली गांव के किसान रामरतन कुशवाहा का कहना है कि तीन बीघे में गेहूं की फसल की थ्रेसरिंग करवा रहे थे। तभी तेज आंधी व बारिश होने से काम बंद करना पड़ा।
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राठ के चिल्ली निवासी रघुवीर सिंह ने बताया कि पहले मटर, सरसों की फसल जब तैयार थी, तब बारिश हो गई और उसने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया, करीब 10 फीसदी पैदावार कम हो गई। अब गेहूं की फसल के साथ भी यही स्थिति बन गई है। बारिश ने इस बार किसानों की कमर तोड़ दी है। वहीं कारीमाटी निवासी किसान कृष्ण कुमार सिंह भी फसल देख चिंता में घिरे हैं। इनकी फसल का दाना काला पड़ गया है। अगर इसी तरह आगे भी बारिश होती रही तो गेहूं की दाना खेतों में ही अंकुरित होने लगेगा। अभी उपज में 30-35 फीसदी तक के नुकसान की संभावना है।
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केवीके वैज्ञानिक डॉ. एनके यादव ने बताया कि अभी दो दिन मौसम खराब रहने की संभावना है। आठ से 10 एमएम बारिश हो सकती है। क्षेत्र में किसानों की करीब 15 फीसदी गेहूं व चना की फसलें खेतों में अभी पड़ी हैं।
सबसे ज्यादा गेहूं की फसल प्रभावित
बारिश से गेहूं की फसलों में भारी नुकसान की आशंका है। बारिश के साथ चलीं तेज हवाओं से खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल बिछ गई है। इससे गेहूं का दाना पतला हो जाएगा। किसानों का कहना है कि भींगी फसल को सुखाने में समय लगने के साथ ही उसकी पैदावार में भी कमी होगी। इसके अलावा अभी अरहर, चना और सरसों की करीब 20 फीसदी फसलें अभी खेतों में पड़ी हुई हैं।
नुकसान के लिए जांच के आदेश
जिले में 2.97 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि है। इनमें 1.58 लाख हेक्टेयर में गेहूं, 1.10 लाख हेक्टेयर में दलहनी और 29122 हेक्टेयर में राई, सरसों की फसलें किसानों ने बोई थीं। सदर एसडीएम केडी शर्मा ने कहा है कि बारिश में फसल के नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। गांव-गांव टीमें भेजी जा रही हैं। जहां से भी किसान सूचना दे रहे हैं, वहां टीमें भेजी जा रही हैं। 33 फीसदी से कम नुकसान पर कोई क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का प्रावधान नहीं है।
फसलों को सूखने तक का नहीं मिल रहा मौका
बीती पूरी रात हुई बारिश ने नींद उड़ाकर रख दी है। खेत में कटी गेहूं की फसल गीली हो गई है। लगातार हो रही बारिश से फसलों को सूखने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है।- रामबाबू, ललपुरा।
नमी के चलते बालियों में दीमक लगने का डर
फसल का बीमा भी नहीं कराया है। 11 बीघे खेत में गेहूं की फसल बोई थी। मजदूरों से कटवाकर गट्ठा बंधे खेतों में पड़े हैं। पूरी रात बारिश से पूरी फसल भींग गई है। नमी के चलते बालियों में दीमक लगने का भी डर है।- गयादीन, पौथिया।
पूरी मेहनत में फिरा पानी
पांच बीघा खेत बटाई में लेकर चना बोया था। फसल कट गई है, लेकिन बारिश के कारण पूरी मेहनत में पानी फिर गया है।- सीताराम निषाद, पौथिया।
इसी तरह होती रही बारिश तो अंकुरित होने लगेगा दाना
अरहर की फसल खेत में कटी पड़ी है। इसी तरह बारिश होती रही तो दाना अंकुरित होने लगेगा।- छुटकन, कलौलीजार।
बारिश व ओलावृष्टि ने तोड़ी किसानों की कमर
बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। मौजूदा में 35 फीसदी से अधिक नुकसान गेहूं फसलों में हुआ है। आलाधिकारी खानापूर्ति कर रहे हैं। - लल्लू, भैंस्ता मौदहा।
बर्बाद हो रहीं फसलें नहीं हुआ सर्वे
गांव व आसपास क्षेत्र में ओलावृष्टि के साथ एक सप्ताह से लगातार बारिश हो रही है। इससे गेहूं, चना आदि फसलों का नुकसान हुआ है। अब तक जिला प्रशासन ने सर्वे तक नहीं कराया है। - रामहेत वर्मा, बिवांर।
फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। आपदा राहत के तहत जहां फसलों का नुकसान 33 फीसदी से अधिक है। वहीं क्षतिपूर्ति दी जाएगी। इससे कम नुकसान पर कोई क्षतिपूर्ति नहीं है। हालांकि 10 से 15 फीसदी तक नुकसान की संभावना जताई जा रही है। एक-दो दिनों में सर्वे रिपोर्ट आ जाएगी। तभी स्थिति साफ हो सकेगी।
राकेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
बारिश से खेतों में कटी पड़ी फसलों में नुकसान
भरुआसुमेरपुर। किसान शुभकरण सिंह परिहार, मानसिंह भदौरिया, उदयभान यादव, अनूप श्रीवास, धीरेंद्र यादव आदि ने बताया कि बारिश के कारण खेतों में कटी पड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, कस्बे के सहकारी समिति गेहूं बेचने आए किसानों का गेहूं बारिश के चलते भींग गया। इससे किसान परेशान नजर आए। (संवाद)
10 बीघा की फसल भीगी
कुरारा। क्षेत्र में मंगलवार शाम करीब पांच बजे तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। इससे खेतों में कटी पड़ी गेहूं और चना की फसल भींग गईं। जखेला गांव के किसान शिवम सिंह ने बताया कि 10 बीघे में चना की फसल कटी पड़ी थी। इसकी थ्रेसरिंग हो रही थी कि तभी तेज आंधी व बारिश होने के चलते काम ठप हो गया। भैंसापाली गांव के किसान रामरतन कुशवाहा का कहना है कि तीन बीघे में गेहूं की फसल की थ्रेसरिंग करवा रहे थे। तभी तेज आंधी व बारिश होने से काम बंद करना पड़ा।

फोटो 08 एचएएमपी 10- खेतों में वन विभाग द्वारा खोदे गए गड्ढे। संवाद

फोटो 08 एचएएमपी 10- खेतों में वन विभाग द्वारा खोदे गए गड्ढे। संवाद