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Hamirpur News: समृद्धि की राह पर बढ़ रहीं महिलाएं, बन रहीं आत्मनिर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:48 PM IST
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हमीरपुर। जिले में स्वयं सहायता समूह से महिलाएं समृद्धि का दरवाजा खोल रही हैं। कारोबार के जरिये जहां नारी सशक्तीकरण का संदेश दे रही हैं वहीं, घर-परिवार को भी संभाल रही हैं।
समूह महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का जरिया भी बन गया है। इससे जुड़ी करीब 83 हजार से अधिक महिलाओं के लिए ये समूह उनकी आर्थिक उन्नति का आधार बन गए हैं। महिलाएं न सिर्फ खुद का व्यवसाय कर रही हैं, बल्कि समूह सखी, स्वास्थ्य, आजीविका, विद्युत, बैंक, वीसी, सूक्ष्म सखी के रूप में लोगों को अपनी सेवाएं भी प्रदान कर रही हैं। दो समूहों की ओर से सूना बोर्ड तैयार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जिले में अब तक 7,415 स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा चुका है। इनसे जुड़ी महिलाएं किसी न किसी कारोबार, लघु उद्योग आदि से जुड़ी हुई हैं।
यहां करीब 18,665 महिलाएं लखपति दीदी के रूप में चिन्हित की गई हैं। इनमें 14,220 ऐसी महिलाएं हैं जो बलिनी दूध डेयरी संचालित कर रही हैं। वहीं, 401 समूह की महिलाएं ड्राई राशन वितरण में लगी हैं। 3500 के करीब ऐसी महिलाएं कृषि अजीविका सखी के रूप में एफपीओ की सदस्य हैं। 14 महिलाएं सरकारी राशन की दुकान चला रही हैं। पांच समूह की महिलाएं मशरूम उत्पादन में लगी हैं। वित्तीय साक्षरता में 44 व आईसीआरपी में 250 महिलाएं कार्य कर अपने आपको सशक्त बना रही हैं। शेष महिलाएं जनरल स्टोर, व्यूटी पार्लर, कॉस्मेटिक शॉप, जूता चप्पल, रेडीमेट कपड़े, सर्फ सहित अन्य व्यवसाय में लगी हैं।
महिलाएं जिले में दो टेक होम राशन प्लांट भी संचालित कर रही हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जाने वाले पोषाहार तैयार होते हैं। इस टीएचआर प्लांट से करीब 6,000 महिलाएं जुड़ी हैं।
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समूह महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का जरिया भी बन गया है। इससे जुड़ी करीब 83 हजार से अधिक महिलाओं के लिए ये समूह उनकी आर्थिक उन्नति का आधार बन गए हैं। महिलाएं न सिर्फ खुद का व्यवसाय कर रही हैं, बल्कि समूह सखी, स्वास्थ्य, आजीविका, विद्युत, बैंक, वीसी, सूक्ष्म सखी के रूप में लोगों को अपनी सेवाएं भी प्रदान कर रही हैं। दो समूहों की ओर से सूना बोर्ड तैयार किया जा रहा है।
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राष्ट्रीय आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जिले में अब तक 7,415 स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा चुका है। इनसे जुड़ी महिलाएं किसी न किसी कारोबार, लघु उद्योग आदि से जुड़ी हुई हैं।
यहां करीब 18,665 महिलाएं लखपति दीदी के रूप में चिन्हित की गई हैं। इनमें 14,220 ऐसी महिलाएं हैं जो बलिनी दूध डेयरी संचालित कर रही हैं। वहीं, 401 समूह की महिलाएं ड्राई राशन वितरण में लगी हैं। 3500 के करीब ऐसी महिलाएं कृषि अजीविका सखी के रूप में एफपीओ की सदस्य हैं। 14 महिलाएं सरकारी राशन की दुकान चला रही हैं। पांच समूह की महिलाएं मशरूम उत्पादन में लगी हैं। वित्तीय साक्षरता में 44 व आईसीआरपी में 250 महिलाएं कार्य कर अपने आपको सशक्त बना रही हैं। शेष महिलाएं जनरल स्टोर, व्यूटी पार्लर, कॉस्मेटिक शॉप, जूता चप्पल, रेडीमेट कपड़े, सर्फ सहित अन्य व्यवसाय में लगी हैं।
महिलाएं जिले में दो टेक होम राशन प्लांट भी संचालित कर रही हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित किए जाने वाले पोषाहार तैयार होते हैं। इस टीएचआर प्लांट से करीब 6,000 महिलाएं जुड़ी हैं।