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Hapur News: मेरठ एमडी कार्यालय से सीए हापुड़ आकर करेंगे बिलों की जांच, 10 से 20 पेज के पैकेट तैयार
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नगरपालिका स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय। संवाद
- फोटो : Archive
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हापुड़। 220 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले में अब मेरठ एमडी (पीवीवीएनएल) कार्यालय से सीए हापुड़ आकर बिलों की जांच करेंगे। दस से 20 पेज के सैंपल बिल तैयार किए गए हैं। तमाम लेजर, चालान और रसीद बुक की प्रतियों से किसानों द्वारा उपलब्ध कराए रिकॉर्ड का मिलान कर 50 बिल तैयार कर लिए गए हैं। सीए की जांच में सब कुछ ठीक मिलने पर इस रिकॉर्ड को बिल संशोधन का आधार बनाया जाएगा।
वर्ष 2004 में नलकूप बिल घोटाला सामने आया था, उस समय यह रकम 220 करोड़ रुपये आंकी गई थी। तमाम जांचों के बाद निष्कर्ष नहीं निकल सका था। क्योंकि ऊर्जा निगम के पास घोटाले को उजागर करने वाला पर्याप्त रिकॉर्ड ही नहीं था। इस घोटाले के कारण हापुड़ के दस हजार से ज्यादा किसानों के बिल गड़बड़ा गए।
किसानों के बिलों में अब 1200 करोड़ से ज्यादा की बकायेदारी दर्शायी जा रही है। जबकि किसान अपना पूरा पैसा जमा कर चुके हैं। पिछले दिनों अधिकारिक तौर पर पहली बार निगम द्वारा एक पोर्टल लॉन्च किया गया। जिसे करीब एक महीने तक खोला गया।
तीनों डिवीजन से करीब 750 किसानों ने इस पोर्टल पर आवेदन किया। पोर्टल पर आवेदन के समय किसानों से शपथ पत्र, जमा बिल की रसीदें/किताब मांगी गई थी। किसानों ने यह रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिया है। संबंधित पटल के अधिकारियों ने किसानों द्वारा उपलब्ध कराए साक्ष्यों का सत्यापन कर बिलों का चिट्ठा बनाना शुरू कर दिया है।
इन बिलों की सत्यता परखने के लिए मेरठ एमडी कार्यालय से सीए को हापुड़ भेजा गया है, जो इन बिलों की सत्यता को पुष्ट करेंगे। इसके बाद ही बिलों का बंच एमडी कार्यालय भेजा जाएगा। जहां से स्वीकृति मिलने पर बिलों को संशोधित किया जाएगा।
यह था मामला
वर्ष 2004 में नलकूप बिल घोटाला सामने आया था। इसमें किसानों से नलकूप बिल का पैसा जमा करा लिया गया। लेकिन राजस्व कोष में यह पैसा जमा नहीं किया गया। लेजर व अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी गायब कर दिया गया। रिकॉर्ड को नाले में बहा दिए जाने के भी प्रमाण मिले थे। उस समय घोटाले की राशि करीब 220 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस बीच करीब दो दशक तक विभिन्न संस्थाओं ने जांच की, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम अदिति सिंह ने शासन में पत्र भेजा, जिसके बाद फिर से जांच शुरू हो सकी।
आगामी दो महीने के लिए पोर्टल खोलने की तैयारी
नलकूप बिल घोटाले में किसानों से बिल जमा का रिकॉर्ड निगम जुटा रहा है। इसके लिए पोर्टल को आगामी दो महीने तक खोलने की तैयारी है। शासन में यह प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि अब जल्द ही दस हजार किसानों के खातों से गलत तरीके से जोड़ी गई राशि हट जाए।
बिलों का किया जा रहा सत्यापन
अधिशासी अभियंता सचिव द्विवेदी ने बताया कि नलकूप बिलों को संशोधित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मेरठ एमडी कार्यालय से सीए हापुड़ आकर बिलों की जांच कर रहे हैं। पोर्टल दोबारा खुलवाने का भी प्रयास जारी है।--
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वर्ष 2004 में नलकूप बिल घोटाला सामने आया था, उस समय यह रकम 220 करोड़ रुपये आंकी गई थी। तमाम जांचों के बाद निष्कर्ष नहीं निकल सका था। क्योंकि ऊर्जा निगम के पास घोटाले को उजागर करने वाला पर्याप्त रिकॉर्ड ही नहीं था। इस घोटाले के कारण हापुड़ के दस हजार से ज्यादा किसानों के बिल गड़बड़ा गए।
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किसानों के बिलों में अब 1200 करोड़ से ज्यादा की बकायेदारी दर्शायी जा रही है। जबकि किसान अपना पूरा पैसा जमा कर चुके हैं। पिछले दिनों अधिकारिक तौर पर पहली बार निगम द्वारा एक पोर्टल लॉन्च किया गया। जिसे करीब एक महीने तक खोला गया।
तीनों डिवीजन से करीब 750 किसानों ने इस पोर्टल पर आवेदन किया। पोर्टल पर आवेदन के समय किसानों से शपथ पत्र, जमा बिल की रसीदें/किताब मांगी गई थी। किसानों ने यह रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिया है। संबंधित पटल के अधिकारियों ने किसानों द्वारा उपलब्ध कराए साक्ष्यों का सत्यापन कर बिलों का चिट्ठा बनाना शुरू कर दिया है।
इन बिलों की सत्यता परखने के लिए मेरठ एमडी कार्यालय से सीए को हापुड़ भेजा गया है, जो इन बिलों की सत्यता को पुष्ट करेंगे। इसके बाद ही बिलों का बंच एमडी कार्यालय भेजा जाएगा। जहां से स्वीकृति मिलने पर बिलों को संशोधित किया जाएगा।
यह था मामला
वर्ष 2004 में नलकूप बिल घोटाला सामने आया था। इसमें किसानों से नलकूप बिल का पैसा जमा करा लिया गया। लेकिन राजस्व कोष में यह पैसा जमा नहीं किया गया। लेजर व अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी गायब कर दिया गया। रिकॉर्ड को नाले में बहा दिए जाने के भी प्रमाण मिले थे। उस समय घोटाले की राशि करीब 220 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस बीच करीब दो दशक तक विभिन्न संस्थाओं ने जांच की, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। वर्ष 2019 में तत्कालीन डीएम अदिति सिंह ने शासन में पत्र भेजा, जिसके बाद फिर से जांच शुरू हो सकी।
आगामी दो महीने के लिए पोर्टल खोलने की तैयारी
नलकूप बिल घोटाले में किसानों से बिल जमा का रिकॉर्ड निगम जुटा रहा है। इसके लिए पोर्टल को आगामी दो महीने तक खोलने की तैयारी है। शासन में यह प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि अब जल्द ही दस हजार किसानों के खातों से गलत तरीके से जोड़ी गई राशि हट जाए।
बिलों का किया जा रहा सत्यापन
अधिशासी अभियंता सचिव द्विवेदी ने बताया कि नलकूप बिलों को संशोधित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मेरठ एमडी कार्यालय से सीए हापुड़ आकर बिलों की जांच कर रहे हैं। पोर्टल दोबारा खुलवाने का भी प्रयास जारी है।