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Hapur News: मिशन चला, पैसा बहा... कूड़ा केंद्र बंद, सिस्टम अनजान बना हुआ
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गांव खुडलिया में बंद पड़ा कूड़ा अपशिष्ट केंद्र। संवाद
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सिंभावली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बनाए गए कूड़ा अपशिष्ट केंद्र ब्लॉक क्षेत्र में अपनी उपयोगिता खोते नजर आ रहे हैं। गांव खुडलिया और मुरादपुर में लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए कूड़ा निस्तारण केंद्र महीनों से बंद पड़े हैं। इससे न केवल योजना की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था भी बदहाल होती जा रही है।
सरकार की योजना के अनुसार गांवों में घर-घर से कूड़ा एकत्र कर इन केंद्रों तक लाया जाना था, जहां उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर जैविक कचरे से खाद तैयार की जानी थी। इससे गांवों में स्वच्छता बनी रहती और किसानों को जैविक खाद भी उपलब्ध होती। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। केंद्रों के भवन तो तैयार हैं, लेकिन उनमें न तो कोई कर्मचारी तैनात है और न ही कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में कुछ दिनों तक कूड़ा एकत्र करने का प्रयास हुआ, लेकिन बाद में पूरी व्यवस्था ठप हो गई। अब गांव की गलियों, खाली प्लॉटों और नालों के किनारे कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इससे बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। सफाई के नाम पर जिम्मेदार विभाग केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं। सिंभावली ब्लॉक के कई अन्य गांवों में भी यही हालात देखने को मिल रहे हैं, जहां कूड़ा अपशिष्ट केंद्र केवल दिखावे के लिए खड़े हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो नियमित मॉनिटरिंग हो रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इन केंद्रों को जल्द चालू कराया जाए और नियमित रूप से कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गांवों में स्वच्छता बनी रहे और सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।
खुडलिया गांव की हालत गंभीर
खुडलिया गांव में बना कूड़ा अपशिष्ट केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है। यहां न तो कूड़ा एकत्र किया जा रहा है और न ही कोई कर्मचारी मौजूद है। इससे गांव में गंदगी बढ़ रही है। सरकारी पैसे का दुरुपयोग होता नजर आ रहा है।
गांव मुरादपुर में अधिक गंदगी
मुरादपुर में भी कूड़ा केंद्र केवल शोपीस बनकर रह गया है। लाखों खर्च के बाद भी निस्तारण शुरू नहीं हुआ। इससे कूड़ा इधर-उधर फेंका जा रहा है और सफाई व्यवस्था बिगड़ती जा रही है।
बीडीओ संजय सिंह ने बताया कि कुछ स्थानों पर मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। ग्राम सचिव और ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर जल्द चालू कराए जाएंगे।
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सरकार की योजना के अनुसार गांवों में घर-घर से कूड़ा एकत्र कर इन केंद्रों तक लाया जाना था, जहां उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर जैविक कचरे से खाद तैयार की जानी थी। इससे गांवों में स्वच्छता बनी रहती और किसानों को जैविक खाद भी उपलब्ध होती। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। केंद्रों के भवन तो तैयार हैं, लेकिन उनमें न तो कोई कर्मचारी तैनात है और न ही कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में कुछ दिनों तक कूड़ा एकत्र करने का प्रयास हुआ, लेकिन बाद में पूरी व्यवस्था ठप हो गई। अब गांव की गलियों, खाली प्लॉटों और नालों के किनारे कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इससे बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। सफाई के नाम पर जिम्मेदार विभाग केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं। सिंभावली ब्लॉक के कई अन्य गांवों में भी यही हालात देखने को मिल रहे हैं, जहां कूड़ा अपशिष्ट केंद्र केवल दिखावे के लिए खड़े हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो नियमित मॉनिटरिंग हो रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इन केंद्रों को जल्द चालू कराया जाए और नियमित रूप से कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गांवों में स्वच्छता बनी रहे और सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।
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खुडलिया गांव की हालत गंभीर
खुडलिया गांव में बना कूड़ा अपशिष्ट केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है। यहां न तो कूड़ा एकत्र किया जा रहा है और न ही कोई कर्मचारी मौजूद है। इससे गांव में गंदगी बढ़ रही है। सरकारी पैसे का दुरुपयोग होता नजर आ रहा है।
गांव मुरादपुर में अधिक गंदगी
मुरादपुर में भी कूड़ा केंद्र केवल शोपीस बनकर रह गया है। लाखों खर्च के बाद भी निस्तारण शुरू नहीं हुआ। इससे कूड़ा इधर-उधर फेंका जा रहा है और सफाई व्यवस्था बिगड़ती जा रही है।
बीडीओ संजय सिंह ने बताया कि कुछ स्थानों पर मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। ग्राम सचिव और ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर जल्द चालू कराए जाएंगे।

गांव खुडलिया में बंद पड़ा कूड़ा अपशिष्ट केंद्र। संवाद