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Hapur News: शिव, सिद्ध व रवि योग में 15 अगस्त को मनेगा हरियाली तीज पर्व
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हापुड़। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हरियाली तीज पर्व 15 अगस्त को शिव, सिद्ध व रवि योग में मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख के लिए व्रत रखेंगी और अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी के लिए व्रत व पूजा करेंगी।
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि हरियाली तीज पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त को शाम 6:46 बजे से प्रारंभ होगी और 15 अगस्त को शाम 5:28 बजे तक रहेगी। हरियाली तीज पर्व पर शिव, सिद्ध व रवि योग का संयोग बन रहा है, जो अत्यंत शुभ हैं। सुबह छह बजे से दोपहर 12:15 बजे तक पूजन के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा।
हरियाली तीज व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन महादेव की साधना करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और कुंवारी कन्याओं के विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार 15 अगस्त के प्रातः स्नान कर स्वच्छ हरे रंग के वस्त्र पहनें। भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान पर शिव-पार्वती की प्रतिमा, चित्र स्थापित करें। भगवान शिव को जल, दूध अक्षत, बेलपत्र, पुष्प, मिष्ठान, ऋतुफल आदि अर्पित करें।
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माता पार्वती को सुहाग की सामग्री
माता पार्वती को कुमकुम, सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, चुनरी आदि अर्पित करें। शिव-पार्वती की पूजा के बाद हरियाली तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें। सुहागिन महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार शृंगार करके झूला झूलने और तीज के पारंपरिक गीत गाने की परंपरा निभाती हैं। इस दिन जरूरतमंद महिला को वस्त्र, शृंगार सामग्री, फल या अन्न का दान करना शुभ माना जाता है। हरियाली तीज पर दांपत्य सुख के लिए शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर माता पार्वती को लाल, हरी चुनरी, कुमकुम और पुष्प अर्पित कर सकते हैं।
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ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि हरियाली तीज पर्व श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त को शाम 6:46 बजे से प्रारंभ होगी और 15 अगस्त को शाम 5:28 बजे तक रहेगी। हरियाली तीज पर्व पर शिव, सिद्ध व रवि योग का संयोग बन रहा है, जो अत्यंत शुभ हैं। सुबह छह बजे से दोपहर 12:15 बजे तक पूजन के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा।
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हरियाली तीज व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन महादेव की साधना करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और कुंवारी कन्याओं के विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार 15 अगस्त के प्रातः स्नान कर स्वच्छ हरे रंग के वस्त्र पहनें। भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान पर शिव-पार्वती की प्रतिमा, चित्र स्थापित करें। भगवान शिव को जल, दूध अक्षत, बेलपत्र, पुष्प, मिष्ठान, ऋतुफल आदि अर्पित करें।
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माता पार्वती को सुहाग की सामग्री
माता पार्वती को कुमकुम, सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, चुनरी आदि अर्पित करें। शिव-पार्वती की पूजा के बाद हरियाली तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें। सुहागिन महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार शृंगार करके झूला झूलने और तीज के पारंपरिक गीत गाने की परंपरा निभाती हैं। इस दिन जरूरतमंद महिला को वस्त्र, शृंगार सामग्री, फल या अन्न का दान करना शुभ माना जाता है। हरियाली तीज पर दांपत्य सुख के लिए शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर माता पार्वती को लाल, हरी चुनरी, कुमकुम और पुष्प अर्पित कर सकते हैं।