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Hapur News: नहीं लगा जंगली जानवर का सुराग, ग्रामीणों में दहशत
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गढ़मुक्तेश्वर। सर्किल क्षेत्र में घूम रहे जंगली जानवर और तेंदुए को पकड़ने में वन विभाग पूरी तरह नाकाम रहा है। तेंदुआ बार-बार लोगों के सामने आ रहा है, पर वन विभाग के अधिकारी उसे देख नहीं पाए हैं। गढ़ क्षेत्र के गांव भगवंतपुर के जंगल में मंगलवार को खेत पर काम करते किसान पर जंगली जानवर ने हमला किया। विभाग उसका सुराग भी नहीं लगा सका है।
गंगा खादर सेंचुरी क्षेत्र का हिस्सा है, जहां जंगली जानवर विचरण करते हैं। सिंभावली के कई गांवों और हाईवे की सर्विस रोड पर करीब दो माह से दहशत है। खादर क्षेत्र में भी पिछले पांच दिनों से तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर घूम रहे हैं। मंगलवार को नेपाल सिंह पर जंगली जानवर ने हमला कर घायल किया। घायल और ग्रामीणों ने उसे तेंदुआ बताया। सूचना पर वन प्रभागीय अधिकारी गौतम सिंह गांव पहुंचे। उन्होंने घायल के शरीर पर तेंदुए के पंजों के निशान होने से इन्कार किया।
स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुआ एक दशक से अधिक समय से क्षेत्र में मौजूद है। विभागीय टीम ने कुछ तेंदुओं को पकड़ा भी है। गढ़-सिंभावली में सड़क हादसों में भी तेंदुओं की मौत हुई है। बावजूद, वन विभाग के अधिकारी अक्सर इसे फिशिंग कैट बताकर टाल देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र का जंगल और गन्ने के खेत तेंदुओं के रहने के लिए मुफीद हैं। शिकार के लिए निराश्रित पशु और नीलगाय भी बहुतायत में हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुओं को पकड़ने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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भगवंतपुर में किसान पर तेंदुए का हमला नहीं हुआ। इसके अलावा कोई जंगली जानवर हो सकता है। इसके बारे में जानकारी करने के लिए कांबिंग कराई जा रही है। तेंदुओं को पकड़ने के लिए सिंभावली क्षेत्र में दो पिंजरे लगाए हुए हैं। संभवत: जल्द ही तेंदुए पकड़ लिए जाएंगे। - गौतम सिंह, डीएफओ
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गंगा खादर सेंचुरी क्षेत्र का हिस्सा है, जहां जंगली जानवर विचरण करते हैं। सिंभावली के कई गांवों और हाईवे की सर्विस रोड पर करीब दो माह से दहशत है। खादर क्षेत्र में भी पिछले पांच दिनों से तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर घूम रहे हैं। मंगलवार को नेपाल सिंह पर जंगली जानवर ने हमला कर घायल किया। घायल और ग्रामीणों ने उसे तेंदुआ बताया। सूचना पर वन प्रभागीय अधिकारी गौतम सिंह गांव पहुंचे। उन्होंने घायल के शरीर पर तेंदुए के पंजों के निशान होने से इन्कार किया।
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स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुआ एक दशक से अधिक समय से क्षेत्र में मौजूद है। विभागीय टीम ने कुछ तेंदुओं को पकड़ा भी है। गढ़-सिंभावली में सड़क हादसों में भी तेंदुओं की मौत हुई है। बावजूद, वन विभाग के अधिकारी अक्सर इसे फिशिंग कैट बताकर टाल देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र का जंगल और गन्ने के खेत तेंदुओं के रहने के लिए मुफीद हैं। शिकार के लिए निराश्रित पशु और नीलगाय भी बहुतायत में हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुओं को पकड़ने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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भगवंतपुर में किसान पर तेंदुए का हमला नहीं हुआ। इसके अलावा कोई जंगली जानवर हो सकता है। इसके बारे में जानकारी करने के लिए कांबिंग कराई जा रही है। तेंदुओं को पकड़ने के लिए सिंभावली क्षेत्र में दो पिंजरे लगाए हुए हैं। संभवत: जल्द ही तेंदुए पकड़ लिए जाएंगे। - गौतम सिंह, डीएफओ