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Hapur News: गंगा तट पर 11 करोड़ की लागत से बनेगा 3.7 किमी लंबा चैनल
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गंगा खादर क्षेत्र में नदी पर चैनल निर्माण कार्य का शुभारंभ करते विधायक हरेंद्र तेवतिया। संवाद
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गढ़मुक्तेश्वर। खादर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों को अब स्थायी समाधान मिलने जा रहा है। करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से 3.7 किलोमीटर लंबा और लगभग तीन मीटर गहरा चैनल बनाया जाएगा। इससे बाढ़ और भूकटान की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी।
बुधवार को विधायक हरेंद्र सिंह तेवतिया ने गंगा के कच्चे घाट पर पहुंचकर कार्य का शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में यह योजना स्वीकृत हुई है। इसके लिए करीब 11 करोड़ रुपये का टेंडर भी जारी कर दिया गया है। विधायक ने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद खादर क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
खादर क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों को मिलेगी राहत
उन्होंने कहा कि खादर क्षेत्र के गांव चकलठीरा, गड़ावली, काकाठेर, फरीदपुर और तिगरी सहित आसपास के आधा दर्जन गांव हर वर्ष बरसात के मौसम में बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।
जुलाई माह में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। इसका असर मैदानी इलाकों में देखने को मिलता है। नदी उफान पर आने से इन गांवों में पानी भर जाता है। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।
बाढ़ के साथ-साथ भूकटान की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती है। खेतों की उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे नदी में समा जाती है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार तो पूरी की पूरी फसल बह जाती है। लेकिन इस बार सिंचाई विभाग की ओर से तैयार होने वाले करोड़ों रुपये के चैनल से राहत मिलने जा रही है।
क्या होता है चैनल और कैसे देगा राहत
चैनल एक प्रकार का कृत्रिम जलमार्ग (ड्रेनेज या निकासी मार्ग) होता है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि अतिरिक्त पानी को नियंत्रित दिशा में बहाया जा सके। जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो यह चैनल उस अतिरिक्त पानी को गांवों और खेतों से दूर ले जाने का कार्य करता है।
इसके अलावा चैनल पानी के बहाव को नियंत्रित कर भूकटान को भी कम करता है। तेज धार के कारण जो मिट्टी कटकर बह जाती है, चैनल बनने से उस पर नियंत्रण होता है। इससे किसानों की जमीन सुरक्षित रहती है और फसल को नुकसान नहीं पहुंचता।
3.7 किलोमीटर लंबा होगा चैनल
सिंचाई विभाग के एक्सईएन प्रनव सिंह और एसडीओ शैलेंद्र वर्मा ने बताया कि प्रस्तावित चैनल की लंबाई करीब 3.7 किलोमीटर होगी। जबकि इसकी गहराई लगभग तीन मीटर रखी जाएगी। इसे इस तरह तैयार किया जाएगा कि बाढ़ का पानी सीधे इस चैनल में प्रवाहित हो सके और गांवों की ओर न बढ़े।
एक्सईएन ने बताया कि कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ताकि आगामी बरसात से पहले ही इसका लाभ ग्रामीणों को मिल सके।
ग्रामीणों में खुशी की लहर
इस परियोजना की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। वर्षों से बाढ़ और कटान की मार झेल रहे लोगों को अब उम्मीद जगी है कि उनका जीवन सामान्य हो सकेगा। किसानों को भी राहत मिलेगी। क्योंकि उनकी फसल और जमीन सुरक्षित रहेगी। कुल मिलाकर, यह चैनल परियोजना खादर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। जो न केवल बाढ़ से बचाव करेगी बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में मददगार बनेगी।
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बुधवार को विधायक हरेंद्र सिंह तेवतिया ने गंगा के कच्चे घाट पर पहुंचकर कार्य का शिलान्यास किया। उन्होंने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है।
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उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में यह योजना स्वीकृत हुई है। इसके लिए करीब 11 करोड़ रुपये का टेंडर भी जारी कर दिया गया है। विधायक ने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद खादर क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
खादर क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों को मिलेगी राहत
उन्होंने कहा कि खादर क्षेत्र के गांव चकलठीरा, गड़ावली, काकाठेर, फरीदपुर और तिगरी सहित आसपास के आधा दर्जन गांव हर वर्ष बरसात के मौसम में बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं।
जुलाई माह में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। इसका असर मैदानी इलाकों में देखने को मिलता है। नदी उफान पर आने से इन गांवों में पानी भर जाता है। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।
बाढ़ के साथ-साथ भूकटान की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती है। खेतों की उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे नदी में समा जाती है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार तो पूरी की पूरी फसल बह जाती है। लेकिन इस बार सिंचाई विभाग की ओर से तैयार होने वाले करोड़ों रुपये के चैनल से राहत मिलने जा रही है।
क्या होता है चैनल और कैसे देगा राहत
चैनल एक प्रकार का कृत्रिम जलमार्ग (ड्रेनेज या निकासी मार्ग) होता है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि अतिरिक्त पानी को नियंत्रित दिशा में बहाया जा सके। जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो यह चैनल उस अतिरिक्त पानी को गांवों और खेतों से दूर ले जाने का कार्य करता है।
इसके अलावा चैनल पानी के बहाव को नियंत्रित कर भूकटान को भी कम करता है। तेज धार के कारण जो मिट्टी कटकर बह जाती है, चैनल बनने से उस पर नियंत्रण होता है। इससे किसानों की जमीन सुरक्षित रहती है और फसल को नुकसान नहीं पहुंचता।
3.7 किलोमीटर लंबा होगा चैनल
सिंचाई विभाग के एक्सईएन प्रनव सिंह और एसडीओ शैलेंद्र वर्मा ने बताया कि प्रस्तावित चैनल की लंबाई करीब 3.7 किलोमीटर होगी। जबकि इसकी गहराई लगभग तीन मीटर रखी जाएगी। इसे इस तरह तैयार किया जाएगा कि बाढ़ का पानी सीधे इस चैनल में प्रवाहित हो सके और गांवों की ओर न बढ़े।
एक्सईएन ने बताया कि कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ताकि आगामी बरसात से पहले ही इसका लाभ ग्रामीणों को मिल सके।
ग्रामीणों में खुशी की लहर
इस परियोजना की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। वर्षों से बाढ़ और कटान की मार झेल रहे लोगों को अब उम्मीद जगी है कि उनका जीवन सामान्य हो सकेगा। किसानों को भी राहत मिलेगी। क्योंकि उनकी फसल और जमीन सुरक्षित रहेगी। कुल मिलाकर, यह चैनल परियोजना खादर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। जो न केवल बाढ़ से बचाव करेगी बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में मददगार बनेगी।