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Hapur News: स्वास्थ्य कुंडली डिजिटल करने के संशाधन नहीं

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2026 12:17 AM IST
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Lack of resources to digitize health records.
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हापुड़। जिले में चार साल के अंदर 7.50 लाख से ज्यादा लोगों की आभा आईडी तैयार की गई हैं, लेकिन इसका लाभ किसी को नहीं मिल रहा।
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सरकारी अस्पतालों में न तो नेटवर्किंग और न ही ओपीडी में कंप्यूटर आदि की व्यवस्था है। इस कारण हेल्थ हिस्ट्री डिजिटल नहीं हो पा रही है। मरीज अभी भी लंबी कतारों में फंस रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी मैनुअल पर्चों पर ही उपचार दिया जा रहा है। मरीजों की सेहत कुंडली को डिजिटल बनाने के लिए वर्ष 2022 में आभा आईडी बनाने का कार्य शुरू किया गया था। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक जिले की कुल आबादी के 57 फीसदी लोगों की आईडी बनकर तैयार हो गई हैं। यह बात अलग है कि जिन लोगों की आईडी बनी हैं, उन्हें शायद ही इसके लाभों की जानकारी दी गई हो।
चार साल से आभा आईडी पर कार्य हो रहा है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग के ही अस्पतालों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है। इससे की मरीजों के रोग, उपचार, दवाओं आदि की हिस्ट्री को डिजिटल किया जा सके।
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मैनुअल रजिस्टर में मरीजों की एंट्री होती है और एक रुपये के पर्चे के ऊपर ही उपचार के लिए दवाएं लिखी जाती हैं। फार्मेसी में भी पर्चे को देखकर ही दवाएं दी जाती हैं, उनका सर्वर भी चिकित्सकों की ओपीडी से नहीं जुड़ा है।
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