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शिव महापुराण कथा...भक्ति की ज्योति भी बदल सकती है भाग्य : रोहित कृष्णम
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गांव शरीफपुर में शिवमहापुराण कथा के दौरान व्यास पूजन करते श्रद्धालु। संवाद
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सिंभावली। गांव शरीफपुर में चल रही शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को ऐसी प्रेरणादायक कथा सुनने को मिली, जिसने सभी को भाव-विभोर कर दिया। कथा व्यास रोहित कृष्णम ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर सच्ची भावना देखते हैं, भले ही भक्ति अनजाने में ही क्यों न की जाए, वह जीवन की दिशा बदल सकती है।
उन्होंने शिव पुराण का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कुबेर, जिन्हें आज धन के देवता के रूप में पूजा जाता है, पूर्व जन्म में गुणनिधि नामक एक गरीब ब्राह्मण युवक थे। विद्वान परिवार में जन्म लेने के बावजूद वे बुरी संगति में पड़कर जुआ और चोरी जैसे कृत्यों में लिप्त हो गए। उनके आचरण से दुखी होकर परिवार ने उन्हें त्याग दिया। कथा व्यास ने बताया कि एक दिन गुणनिधि चोरी के इरादे से शिव मंदिर पहुंचे। मंदिर में अंधेरा होने के कारण उन्होंने अपने अंगोछे से दीपक को बार-बार जलाने का प्रयास किया। यह कार्य अनजाने में दीपदान बन गया। उसी दौरान उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन उनकी इस अनजानी भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें अगले जन्म में कुबेर बनने का वरदान दिया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि सच्ची श्रद्धा और सेवा भावना व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है। प्रवचन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
इस अवसर पर राम अवतार शर्मा, सीमा, अंकुर, ओंकार, बाला, मोनू, ममता, धर्मपाल, कृष्ण चंद, गीता और सीता आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने शिव पुराण का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कुबेर, जिन्हें आज धन के देवता के रूप में पूजा जाता है, पूर्व जन्म में गुणनिधि नामक एक गरीब ब्राह्मण युवक थे। विद्वान परिवार में जन्म लेने के बावजूद वे बुरी संगति में पड़कर जुआ और चोरी जैसे कृत्यों में लिप्त हो गए। उनके आचरण से दुखी होकर परिवार ने उन्हें त्याग दिया। कथा व्यास ने बताया कि एक दिन गुणनिधि चोरी के इरादे से शिव मंदिर पहुंचे। मंदिर में अंधेरा होने के कारण उन्होंने अपने अंगोछे से दीपक को बार-बार जलाने का प्रयास किया। यह कार्य अनजाने में दीपदान बन गया। उसी दौरान उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन उनकी इस अनजानी भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें अगले जन्म में कुबेर बनने का वरदान दिया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि सच्ची श्रद्धा और सेवा भावना व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है। प्रवचन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
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इस अवसर पर राम अवतार शर्मा, सीमा, अंकुर, ओंकार, बाला, मोनू, ममता, धर्मपाल, कृष्ण चंद, गीता और सीता आदि मौजूद रहे।