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Hapur News: एक्सप्रेसवे किनारे औद्योगिक नगरी बसाने की रफ्तार धीमी
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक नगरी बसाने की रफ्तारी धीमी हो गई है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया यदि पूरी हो गई होती तो औद्योगिक इकाईयों का भी आवंटन शुरू हो गया होता। लेकिन किसानों ने मुआवजा दर कम होने का हवाला देकर जमीन का बैनामा करना लगभग बंद कर दिया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अथक प्रयास के बावजूद इक्का-दुक्का किसान ही जमीन का बैनामा करने पहुंच रहे है।
मेरठ के बिजौली से शुरू होकर प्रयागराज तक जाने वाले गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे-किनारे सरकार की ओर से औद्योगिक नगरी बसाने की योजना है। वर्ष 2024 में वहापुर ठेरा, चुचावली, भैना और सदरपुर गांवों से किसानों की 126 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित की थी, लेकिन अभी तक मात्र 40 प्रतिशत भूमि ही प्रशासन ले सका है।
साल 2024 में प्रशासनिक अमले की कड़ी मशक्कत के बाद इक्का-दुक्का किसान ही बैनामा कर रहे हैं। इससे औद्योगिक नगरी की परियोजना बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। वहीं, वर्ष 2025 में जखैड़ा रहमतपुर गांव के लिए नई अधिसूचना जारी की गई थी।
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प्रशासनिक अधिकारियों के अथक प्रयास के बावजूद इक्का-दुक्का किसान ही जमीन का बैनामा करने पहुंच रहे है।
मेरठ के बिजौली से शुरू होकर प्रयागराज तक जाने वाले गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे-किनारे सरकार की ओर से औद्योगिक नगरी बसाने की योजना है। वर्ष 2024 में वहापुर ठेरा, चुचावली, भैना और सदरपुर गांवों से किसानों की 126 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित की थी, लेकिन अभी तक मात्र 40 प्रतिशत भूमि ही प्रशासन ले सका है।
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साल 2024 में प्रशासनिक अमले की कड़ी मशक्कत के बाद इक्का-दुक्का किसान ही बैनामा कर रहे हैं। इससे औद्योगिक नगरी की परियोजना बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। वहीं, वर्ष 2025 में जखैड़ा रहमतपुर गांव के लिए नई अधिसूचना जारी की गई थी।