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Hardoi News: मनरेगा के 30 प्रतिशत से कम खर्च वाले 10 हजार कार्यों का पंचनामा
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हरदोई। मनरेगा में साल 2006 से अब तक 30 प्रतिशत से कम खर्च वाले करीब 10 हजार कामों का पंचनामा होगा। इन कामों को अब डेड घोषित किया जाएगा। कामों को डेड घोषित किए जाने के लिए केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन व्यवस्था दी गई है।
देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) साल 2006 से पूरे देश में लागू किया गया। इसी वित्तीय वर्ष में मनरेगा के स्थान पर वीबीजी रामजी का संचालन शुरू कराया गया है। वीबीजी रामजी में मनरेगा में चल रहे कामों को शामिल किए जाने की व्यवस्था दी गई है।
वहीं मनरेगा में 30 प्रतिशत से कम खर्च वाले करीब 10 हजार कार्यों को डेड घोषित किए जाने की तैयारी की गई है। 30 प्रतिशत से कम खर्च के चलते ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों के माध्यम से इन कार्यों की जियो टैगिंग पोर्टल पर नहीं हो पाई है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय से दी गई व्यवस्था के हवाले से ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने हरदोई सहित प्रदेश के सभी जनपदों में ऐसे कामों को डेड घोषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी कराए जाने की व्यवस्था दी है।
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जरूरी होंगे पांच गवाह
मनरेगा में 30 या इससे कम खर्च वाले कामों को डेड घोषित किए जाने के लिए प्रत्येक काम के लिए पांच गवाहों की आवश्यकता होगी। 30 प्रतिशत से कम खर्च वाले कामों को चिह्नित किए जाने के साथ ही इनका पंचनामा कार्यक्रम अधिकारियों के माध्यम से भरवाया जाएगा। इसमें गवाहों को काम और भुगतान के संबंध में पूरी जानकारी देनी होगी। काम बंद होने के कारणों का उल्लेख भी करना होगा।
ऐसे कामों की फोटो भी होगी अपलोड
मनरेगा में अब तक शुरू कराए गए कामों में 30 प्रतिशत तक हुए कामों को चिह्नित किए जाने के साथ ही उनकी वर्तमान फोटो भी ली जाएगी। ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम से ली गई फोटो भी कार्यक्रम अधिकारी अपने लॉग इन से दिए गए पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसमें कराए गए काम को भी दिखाया जाएगा।
मनरेगा के स्थान पर शुरू कराई गई वीबीजी रामजी में रोजगार के दिनों की संख्या 100 से 125 किए जाने के साथ ही इसमें बदलाव भी किया गया है। वीबीजी रामजी में स्थायी परिसंपत्ति को बनवाए जाने पर ध्यान दिया गया है। मनरेगा मद से कराए जाने वाले कामों में 30 से कम खर्च वाले पौधरोपण सहित अन्य कामों को चिह्नित कराते हुए डेड घोषित किए जाने की जिले में प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। सभी ब्लॉकों से चिह्नित कामों का विवरण आने पर ऑनलाइन शासन को भेज दिया जाएगा। -अनुनय झा, जिला कार्यक्रम समन्वयक
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देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) साल 2006 से पूरे देश में लागू किया गया। इसी वित्तीय वर्ष में मनरेगा के स्थान पर वीबीजी रामजी का संचालन शुरू कराया गया है। वीबीजी रामजी में मनरेगा में चल रहे कामों को शामिल किए जाने की व्यवस्था दी गई है।
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वहीं मनरेगा में 30 प्रतिशत से कम खर्च वाले करीब 10 हजार कार्यों को डेड घोषित किए जाने की तैयारी की गई है। 30 प्रतिशत से कम खर्च के चलते ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों के माध्यम से इन कार्यों की जियो टैगिंग पोर्टल पर नहीं हो पाई है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय से दी गई व्यवस्था के हवाले से ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने हरदोई सहित प्रदेश के सभी जनपदों में ऐसे कामों को डेड घोषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी कराए जाने की व्यवस्था दी है।
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जरूरी होंगे पांच गवाह
मनरेगा में 30 या इससे कम खर्च वाले कामों को डेड घोषित किए जाने के लिए प्रत्येक काम के लिए पांच गवाहों की आवश्यकता होगी। 30 प्रतिशत से कम खर्च वाले कामों को चिह्नित किए जाने के साथ ही इनका पंचनामा कार्यक्रम अधिकारियों के माध्यम से भरवाया जाएगा। इसमें गवाहों को काम और भुगतान के संबंध में पूरी जानकारी देनी होगी। काम बंद होने के कारणों का उल्लेख भी करना होगा।
ऐसे कामों की फोटो भी होगी अपलोड
मनरेगा में अब तक शुरू कराए गए कामों में 30 प्रतिशत तक हुए कामों को चिह्नित किए जाने के साथ ही उनकी वर्तमान फोटो भी ली जाएगी। ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम से ली गई फोटो भी कार्यक्रम अधिकारी अपने लॉग इन से दिए गए पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसमें कराए गए काम को भी दिखाया जाएगा।
मनरेगा के स्थान पर शुरू कराई गई वीबीजी रामजी में रोजगार के दिनों की संख्या 100 से 125 किए जाने के साथ ही इसमें बदलाव भी किया गया है। वीबीजी रामजी में स्थायी परिसंपत्ति को बनवाए जाने पर ध्यान दिया गया है। मनरेगा मद से कराए जाने वाले कामों में 30 से कम खर्च वाले पौधरोपण सहित अन्य कामों को चिह्नित कराते हुए डेड घोषित किए जाने की जिले में प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। सभी ब्लॉकों से चिह्नित कामों का विवरण आने पर ऑनलाइन शासन को भेज दिया जाएगा। -अनुनय झा, जिला कार्यक्रम समन्वयक