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Hardoi News: 147 कर्मियों के कंधों पर एफएमडी की जिम्मेदारी, समय पूरा होने में संशय
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हरदोई। मवेशियों को मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान की जिम्मेदारी पशु चिकित्साधिकारियों से 147 कर्मियों पर है। इससे टीकाकरण अभियान समय से पूरा होने में संशय लग रहा है। सभी पैरावेट की तरफ से काम न किए जाने के कारण टीकाकरण गति नहीं पकड़ पा रहा है।
पशुपालकों के पालतू मवेशियों सहित पशु आश्रयस्थलों में संरक्षित मवेशियों को राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाव के लिए टीका लगवाए जा रहे हैं। टीकाकरण अभियान के लिए पशु चिकित्साधिकारियों के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया है। पैरावेट संघ ने मांगों के समर्थन में टीकाकरण न किए जाने का निर्णय लिया है। इससे काम में कुछ दिक्कतें आई हैं। इससे प्रगति भी प्रभावित होने की आशंका है।
राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में जिले में मवेशियों को मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण 22 जुलाई से शुरू कराया गया है। 45 दिवसीय अभियान में करीब 8.38 लाख मवेशियों का टीकाकरण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। 19 विकास खंडों की 1,293 ग्राम पंचायतों में टीकाकरण किया जाना है। जिले में 42 पशु चिकित्साधिकारियों के पद के सापेक्ष 22 चिकित्सक तैनात हैं। ऐसे में एक-एक पशु चिकित्साधिकारी पर दो से तीन-तीन पशु चिकित्सालयों का प्रभार है। ऐसे में पशुधन प्रसार अधिकारी, ड्रेसर, वैक्सीनेटर और अन्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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जिले में बेनीगंज के चिकित्साधिकारी के पास कोथावां, बेनीगंज व रैसौं, मल्लावां के पशु चिकित्साधिकारी के पास संडीला और गौसगंज, परसोला और छिबरामऊ में एक चिकित्सक, बिलग्राम के चिकित्साधिकारी के पास भी दो अतिरिक्त पशु चिकित्सालय का प्रभार है।
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रियल टाइम फीडिंग से समय तो लगता है, पर कागजों पर वैक्सीनेशन संभव नहीं
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि एफएमडी में रियल टाइम फीडिंग की अनिवार्यता दी गई है। शनिवार तक जिले में 1,36,632 मवेशियों को टीका लगाया जा चुका है। रियल टाइम फीडिंग से कागजों पर टीकाकरण की आशंका नहीं रह जाती है। टीम के माध्यम से किए जाने वाले एफएमडी टीकाकरण में पशु की ईयर टैग नंबर, पशुपालक का मोबाइल नंबर और मवेशी की ईयर टैग लगी फोटो भी अपलोड होती है। पशुपालक के मोबाइल पर आने वाले वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के माध्यम से पोर्टल पर पूरा डेटा अपलोड होता है। इससे कागजों पर वैक्सीनेशन का सवाल ही नहीं उठता है। ओटीपी दर्ज किए जाने के बाद ही पोर्टल पर मवेशी के वैक्सीनेशन का डेटा अपलोड होता है। विभाग को पैरावेट की तरफ से वैक्सीनेशन में सहयोग न दिए जाने की जानकारी है और इसी के चलते पहले से ही रणनीति बनाकर 147 कर्मियों को टीकाकरण में लगाया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के पशुपालकों के मवेशियों के साथ ही संरक्षित मवेशियों का टीकाकरण प्राथमिकता पर कराया जा रहा है।
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मोबाइल वेटनरी यूनिट को भी वैक्सीनेशन में लगाया गया
एमएमडी के राष्ट्रीय अभियान को समय से पूरा किए जाने के लिए जिले में उपलब्ध 12 मोबाइल वेटनरी यूनिट को भी लगाया गया है। यह मोबाइल वेटनरी यूनिट आकस्मिक स्थिति में गांव में जाकर मवेशियों का उपचार करने के साथ ही गांव के सभी मवेशियों की ईयर टैगिंग किए जाने के साथ ही मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाव का टीकाकरण भी कर रही है। इसमें 12 मोबाइल पशु चिकित्साधिकारी, 12 मल्टीपरपज टेक्निशियन और पायलेट की ड्यूटी लगाई गई है।
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पशुपालकों के पालतू मवेशियों सहित पशु आश्रयस्थलों में संरक्षित मवेशियों को राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाव के लिए टीका लगवाए जा रहे हैं। टीकाकरण अभियान के लिए पशु चिकित्साधिकारियों के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया है। पैरावेट संघ ने मांगों के समर्थन में टीकाकरण न किए जाने का निर्णय लिया है। इससे काम में कुछ दिक्कतें आई हैं। इससे प्रगति भी प्रभावित होने की आशंका है।
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राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में जिले में मवेशियों को मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण 22 जुलाई से शुरू कराया गया है। 45 दिवसीय अभियान में करीब 8.38 लाख मवेशियों का टीकाकरण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। 19 विकास खंडों की 1,293 ग्राम पंचायतों में टीकाकरण किया जाना है। जिले में 42 पशु चिकित्साधिकारियों के पद के सापेक्ष 22 चिकित्सक तैनात हैं। ऐसे में एक-एक पशु चिकित्साधिकारी पर दो से तीन-तीन पशु चिकित्सालयों का प्रभार है। ऐसे में पशुधन प्रसार अधिकारी, ड्रेसर, वैक्सीनेटर और अन्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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जिले में बेनीगंज के चिकित्साधिकारी के पास कोथावां, बेनीगंज व रैसौं, मल्लावां के पशु चिकित्साधिकारी के पास संडीला और गौसगंज, परसोला और छिबरामऊ में एक चिकित्सक, बिलग्राम के चिकित्साधिकारी के पास भी दो अतिरिक्त पशु चिकित्सालय का प्रभार है।
रियल टाइम फीडिंग से समय तो लगता है, पर कागजों पर वैक्सीनेशन संभव नहीं
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि एफएमडी में रियल टाइम फीडिंग की अनिवार्यता दी गई है। शनिवार तक जिले में 1,36,632 मवेशियों को टीका लगाया जा चुका है। रियल टाइम फीडिंग से कागजों पर टीकाकरण की आशंका नहीं रह जाती है। टीम के माध्यम से किए जाने वाले एफएमडी टीकाकरण में पशु की ईयर टैग नंबर, पशुपालक का मोबाइल नंबर और मवेशी की ईयर टैग लगी फोटो भी अपलोड होती है। पशुपालक के मोबाइल पर आने वाले वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के माध्यम से पोर्टल पर पूरा डेटा अपलोड होता है। इससे कागजों पर वैक्सीनेशन का सवाल ही नहीं उठता है। ओटीपी दर्ज किए जाने के बाद ही पोर्टल पर मवेशी के वैक्सीनेशन का डेटा अपलोड होता है। विभाग को पैरावेट की तरफ से वैक्सीनेशन में सहयोग न दिए जाने की जानकारी है और इसी के चलते पहले से ही रणनीति बनाकर 147 कर्मियों को टीकाकरण में लगाया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के पशुपालकों के मवेशियों के साथ ही संरक्षित मवेशियों का टीकाकरण प्राथमिकता पर कराया जा रहा है।
मोबाइल वेटनरी यूनिट को भी वैक्सीनेशन में लगाया गया
एमएमडी के राष्ट्रीय अभियान को समय से पूरा किए जाने के लिए जिले में उपलब्ध 12 मोबाइल वेटनरी यूनिट को भी लगाया गया है। यह मोबाइल वेटनरी यूनिट आकस्मिक स्थिति में गांव में जाकर मवेशियों का उपचार करने के साथ ही गांव के सभी मवेशियों की ईयर टैगिंग किए जाने के साथ ही मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाव का टीकाकरण भी कर रही है। इसमें 12 मोबाइल पशु चिकित्साधिकारी, 12 मल्टीपरपज टेक्निशियन और पायलेट की ड्यूटी लगाई गई है।