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Hardoi News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा
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हरदोई। नाबालिग के साथ दुष्कर्म के नौ साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह ने एक शख्स को दोषी करार दिया। उसको 10 साल की सजा सुनाई। साथ ही पांच हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
माधौगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 14 जनवरी 2017 की रात समय करीब एक बजे वह अपने घर में चारपाई पर सो रही थीं। इसी दौरान गांव निवासी राजेश सक्सेना दीवार फांदकर घर में घुस आया। छेड़छाड़ की और दुष्कर्म का भी प्रयास किया था। शोर मचाने पर उसके माता-पिता मौके पर आ गए थे। इसके बाद आरोपी मौके से भाग गया था। पुलिस ने घर में घुसकर छेड़छाड़ और पॉक्सो की धारा में रिपोर्ट दर्ज की थी।
विवेचना के दौरान मजिस्ट्रेट को दिए गए बयानों में दुष्कर्म की भी बात कही गई थी। इसके बाद दुष्कर्म की धारा बढ़ाई गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाह और नौ अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई।
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नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य
विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य होती है। मामले की सुनवाई के दौरान प्रकाश में आया कि दोनों के मध्य प्रेम प्रसंग था, पीड़िता ने बयान दिया कि घरवालों के कहने पर अभियुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। घटना के कुछ दिनों बाद दोनों ने शादी कर ली थी और दो बच्चे भी हैं। इसी आधार पर आरोपी के पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने निर्दोष बताते हुए रिहा किए जाने का तर्क दिया। अपर जिला जज ने कहा कि साक्ष्य से यह सिद्ध है कि घटना के समय पीड़िता की आयु 13 साल चार माह थी। कानून की नजर में नाबालिग की सहमति महत्वहीन है, कहते हुए सजा सुनाई।
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माधौगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 14 जनवरी 2017 की रात समय करीब एक बजे वह अपने घर में चारपाई पर सो रही थीं। इसी दौरान गांव निवासी राजेश सक्सेना दीवार फांदकर घर में घुस आया। छेड़छाड़ की और दुष्कर्म का भी प्रयास किया था। शोर मचाने पर उसके माता-पिता मौके पर आ गए थे। इसके बाद आरोपी मौके से भाग गया था। पुलिस ने घर में घुसकर छेड़छाड़ और पॉक्सो की धारा में रिपोर्ट दर्ज की थी।
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विवेचना के दौरान मजिस्ट्रेट को दिए गए बयानों में दुष्कर्म की भी बात कही गई थी। इसके बाद दुष्कर्म की धारा बढ़ाई गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाह और नौ अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई।
नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य
विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य होती है। मामले की सुनवाई के दौरान प्रकाश में आया कि दोनों के मध्य प्रेम प्रसंग था, पीड़िता ने बयान दिया कि घरवालों के कहने पर अभियुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। घटना के कुछ दिनों बाद दोनों ने शादी कर ली थी और दो बच्चे भी हैं। इसी आधार पर आरोपी के पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने निर्दोष बताते हुए रिहा किए जाने का तर्क दिया। अपर जिला जज ने कहा कि साक्ष्य से यह सिद्ध है कि घटना के समय पीड़िता की आयु 13 साल चार माह थी। कानून की नजर में नाबालिग की सहमति महत्वहीन है, कहते हुए सजा सुनाई।