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Hardoi News: अवकाश में भगवान भरोसे मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं
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फोटो- 23- मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी वार्ड। संवाद
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हरदोई। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी इकाई मेडिकल कॉलेज में अवकाश के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हो जाती हैं। अवकाश के दिन इमरजेंसी सेवाएं खुद वेंटिलेटर पर पहुंच जाती हैं। हालत यह है कि गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को सही उपचार तक नहीं मिल पाता। जूनियर डाॅक्टरों के भरोसे मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर रेफर कर दिया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न मिलने से मरीज और उनके तीमारदारों को काफी परेशान होना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो रहा है। सामान्य दिनों में तो ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सक मिलते हैं लेकिन अवकाश के दिन या फिर साप्ताहिक छुट्टी में अस्पताल की कमान पूरी तरह से जूनियर रेजिडेंट और इंटर्न डॉक्टरों के हाथों में होती है। अनुभव की कमी और काम के भारी दबाव के बीच यह डॉक्टर सही ढंग से व्यवस्था तक संभाल नहीं पाते हैं। कई मामलों में तो स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है, जूनियर डॉक्टर समय पर सटीक निर्णय नहीं ले पाते जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। ऐसे में जूनियर डॉक्टर मरीजों को हॉयर सेंटर रेफर कर देते हैं। ऐसी स्थिति हर रोज दोपहर को दो बजे के बाद बनती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के जाते ही इमरजेंसी सिर्फ रेफरल सेंटर बन कर रह जाती है।
ऑन कॉल चिकित्सीय सलाह का दावा
रोजाना दो बजे के बाद और अवकाश के दिनों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के ऑन कॉल होने का हवाला देकर जिम्मेदारियों से बचाव कर लिया जाता है। बता दें कि ऑन कॉल सीनियर डॉक्टर्स फोन पर ही निर्देश देकर औपचारिकता पूरी करते हैं। ऐसे में वरिष्ठ डॉक्टरों की अनुपस्थिति में जोखिम से बचने के लिए जूनियर डॉक्टर अक्सर गंभीर मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर कर देते हैं।
भटकने को मजबूर होते तीमारदार
छुट्टी के दिन अपने मरीज को लेकर आने वाले तीमारदारों को विशेषज्ञों की तलाश में एक कक्ष से दूसरे कक्ष भटकना पड़ता है। रविवार को भी इमरजेंसी की जिम्मेदारी जूनियर डाॅक्टर वैभव सिंह पर रही। रविवार की आधी रात से दोपहर तक 15 मरीजों को भर्ती किया गया। इनमें से तीन मरीजों को पीकू वार्ड भेज दिया गया जबकि चिकित्सकों के अभाव में दो मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि जूनियर डॉक्टर किसी भी बात पर उचित जवाब नहीं देते हैं।
केस-1- कछौना के ग्रामा प्रतापपुर निवासी राजकुमार के पैर में गोली लगी थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज रात में लाया गया था। विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
केस-2- टड़ियावां थाना के दिबिया फत्तेपुर निवासी अनमोल का 10 मार्च की रात एक्सीडेंट हो गया था। परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर आए थे। यहां से चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
छुट्टी के दिन भी रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। चिकित्सक ऑन कॉल भी मौजूद रहते हैं अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसको रेफर कर दिया जाता है। कोशिश रहती है कि इलाज यहीं दिया जाए। -डॉ. प्रो. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो रहा है। सामान्य दिनों में तो ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सक मिलते हैं लेकिन अवकाश के दिन या फिर साप्ताहिक छुट्टी में अस्पताल की कमान पूरी तरह से जूनियर रेजिडेंट और इंटर्न डॉक्टरों के हाथों में होती है। अनुभव की कमी और काम के भारी दबाव के बीच यह डॉक्टर सही ढंग से व्यवस्था तक संभाल नहीं पाते हैं। कई मामलों में तो स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है, जूनियर डॉक्टर समय पर सटीक निर्णय नहीं ले पाते जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। ऐसे में जूनियर डॉक्टर मरीजों को हॉयर सेंटर रेफर कर देते हैं। ऐसी स्थिति हर रोज दोपहर को दो बजे के बाद बनती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के जाते ही इमरजेंसी सिर्फ रेफरल सेंटर बन कर रह जाती है।
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ऑन कॉल चिकित्सीय सलाह का दावा
रोजाना दो बजे के बाद और अवकाश के दिनों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के ऑन कॉल होने का हवाला देकर जिम्मेदारियों से बचाव कर लिया जाता है। बता दें कि ऑन कॉल सीनियर डॉक्टर्स फोन पर ही निर्देश देकर औपचारिकता पूरी करते हैं। ऐसे में वरिष्ठ डॉक्टरों की अनुपस्थिति में जोखिम से बचने के लिए जूनियर डॉक्टर अक्सर गंभीर मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर कर देते हैं।
भटकने को मजबूर होते तीमारदार
छुट्टी के दिन अपने मरीज को लेकर आने वाले तीमारदारों को विशेषज्ञों की तलाश में एक कक्ष से दूसरे कक्ष भटकना पड़ता है। रविवार को भी इमरजेंसी की जिम्मेदारी जूनियर डाॅक्टर वैभव सिंह पर रही। रविवार की आधी रात से दोपहर तक 15 मरीजों को भर्ती किया गया। इनमें से तीन मरीजों को पीकू वार्ड भेज दिया गया जबकि चिकित्सकों के अभाव में दो मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि जूनियर डॉक्टर किसी भी बात पर उचित जवाब नहीं देते हैं।
केस-1- कछौना के ग्रामा प्रतापपुर निवासी राजकुमार के पैर में गोली लगी थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज रात में लाया गया था। विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
केस-2- टड़ियावां थाना के दिबिया फत्तेपुर निवासी अनमोल का 10 मार्च की रात एक्सीडेंट हो गया था। परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर आए थे। यहां से चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
छुट्टी के दिन भी रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। चिकित्सक ऑन कॉल भी मौजूद रहते हैं अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो उसको रेफर कर दिया जाता है। कोशिश रहती है कि इलाज यहीं दिया जाए। -डॉ. प्रो. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज