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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज में अब होगी हेपेटाइटिस बी व सी की मॉलिक्यूलर जांच

Wed, 29 Jul 2026 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:03 PM IST
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Molecular testing for Hepatitis B and C will now be conducted at the medical college.
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हेपेटाइटिस बी और सी वायरस की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक से जांच शुरू हो गई है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर मंगलवार को आधुनिक मॉलिक्यूलर (आणविक) जांच तकनीक का शुभारंभ किया गया। इस तकनीक से शुरू होने के बाद मरीजों में संक्रमण की सटीकता और समयबद्ध जांच हो सकेगी। इससे उपचार को बेहतर और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
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गौरा डांडा स्थित मेडिकल कॉलेज में प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. जेबी गोगोई ने कहा कि आधुनिक जांच तकनीकों को अपनाने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। विभागाध्यक्ष डॉ. अदिति गर्ग ने बताया कि विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर हेपेटाइटिस बी और सी की मॉलिक्यूलर जांच शुरू होना विभाग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी देने लखनऊ से आए वैज्ञानिक शिव कुमार ने हेपेटाइटिस बी और सी की आणविक जांच का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने विशेषज्ञों, लैब टेक्नीशियन और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण में आधुनिक मॉलिक्यूलर टेस्टिंग की उपयोगिता और कार्यप्रणाली की जानकारी दी और परीक्षण भी कराया।
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इस दौरान लैब टेक्नीशियन अवनीश, अविनाश, कमलेश, सर्वेश, ज्ञानेंद्र, सूरज और प्रतिमा के साथ पैरामेडिकल डीएमएलटी के विद्यार्थी मौजूद रहे। विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. सुशील मिश्रा, डॉ. एकता सिंह और डॉ. भावना सिंह ने हेपेटाइटिस से बचाव, इसके लक्षण, समय पर जांच और उपचार पर प्रकाश डाला। उन्होंने लोगों से संक्रमण की रोकथाम के लिए जागरूक रहने और समय पर जांच कराने की अपील की।
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क्या है मॉलिक्यूलर जांच
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स विधियों का एक संग्रह है जो जीनोम और प्रोटीओम में जैविक मार्करों का विश्लेषण करता है। यानी व्यक्ति के आनुवंशिक कोड और उनके कोशिकाओं से जीन को प्रोटीन के रूप में व्यक्त करने के तरीके को मॉलिक्यूलर जांच कहते हैं। मॉलिक्यूलर जांच का उपयोग रोग निदान, संक्रामक रोगजनकों का पता लगाना, मार्कोजेनेटिक्स यानी किसी व्यक्ति के लिए सबसे उपयुक्त दवाओं का आनुवंशिक पूर्वानुमान और व्यक्तिगत चिकित्सा में भी होता है।
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