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Hardoi News: दूल्हे का संवरना भी महंगा, नोटों की माला ने उड़ाए खरीदारों के होश
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फोटो- 26- दुकान पर सजे नोटो की माला व दूल्हे की पगड़ी। संवाद
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हरदोई। शादियों का सीजन शुरू होते ही बाजार में रौनक बढ़ी है लेकिन आसमान छूती महंगाई ने आम आदमी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बार शादियों के बजट में केवल खान-पान और सजावट ही नहीं बल्कि दूल्हे की शान कही जाने वाली नोटों की माला भी आम आदमी की पहुंच से दूर होती नजर आ रही है। बाजार में नए नोटों की गड्डियों की भारी किल्लत और कमीशनबाजी के कारण मालाओं की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है।
बैंक से नए नोटों की गड्डियों की किल्लत और बाजार में ऊंची कीमतों पर मिल रही गड्डियों के कारण मालाओं के दाम आसमान छू रहे हैं। बाजार में गड्डियां न मिलने से इन मालाओं को बनाने वाले कारीगरों को अधिक पैसे देकर गड्डियां खरीदनी पड़ रही हैं। इस कारण एक माला को बनाने में लगे हुए नोटों के अतिरिक्त खरीदार को 300 से 500 रुपये अधिक देने पड़ रहे हैं।
दुकानदार हर्षित गुप्ता का कहना है कि किसी माला में अगर 1000 रुपये लगे हैं तो वह 1200 से 1250 रुपये में बिक रहा है। इसी प्रकार 2000 के नोट लगे माले 2200 में और 5000 रुपये के नोट लगे माले 5500 रुपये में बिक रहे हैं। गड्डी न मिलने का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। यही वजह है कि इन मालाओं की बिक्री में कमी आई है।
कारोबार पर पड़ रहा बुरा असर
सदर बाजार स्थित एक माला विक्रेता शिवम जायसवाल ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार ऑर्डर में 30 से 40 फीसदी की गिरावट आई है। लोग अब शगुन के तौर पर छोटी मालाएं ही बनवा रहे हैं। वहीं, कुछ लोग पुरानी गड्डियों से ही काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दूल्हे की शान के लिए नए नोटों की चमक न होने से वह बात नहीं बन पा रही है।
पगड़ी का कारोबार भी महंगा
दूल्हे के सिर की शान पगड़ी पर भी महंगाई और प्रतिस्पर्धा का साया है। रॉ-मटेरियल की कीमतों में वृद्धि और बाजार में बढ़ती होड़ के कारण पगड़ी के रेट पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कारीगरों का कहना है कि डिजाइन और वर्क के हिसाब से पगड़ियों की डिमांड तो है लेकिन मुनाफा काफी कम रह गया है।
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दुकानदार हर्षित गुप्ता का कहना है कि किसी माला में अगर 1000 रुपये लगे हैं तो वह 1200 से 1250 रुपये में बिक रहा है। इसी प्रकार 2000 के नोट लगे माले 2200 में और 5000 रुपये के नोट लगे माले 5500 रुपये में बिक रहे हैं। गड्डी न मिलने का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। यही वजह है कि इन मालाओं की बिक्री में कमी आई है।
कारोबार पर पड़ रहा बुरा असर
सदर बाजार स्थित एक माला विक्रेता शिवम जायसवाल ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार ऑर्डर में 30 से 40 फीसदी की गिरावट आई है। लोग अब शगुन के तौर पर छोटी मालाएं ही बनवा रहे हैं। वहीं, कुछ लोग पुरानी गड्डियों से ही काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दूल्हे की शान के लिए नए नोटों की चमक न होने से वह बात नहीं बन पा रही है।
पगड़ी का कारोबार भी महंगा
दूल्हे के सिर की शान पगड़ी पर भी महंगाई और प्रतिस्पर्धा का साया है। रॉ-मटेरियल की कीमतों में वृद्धि और बाजार में बढ़ती होड़ के कारण पगड़ी के रेट पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कारीगरों का कहना है कि डिजाइन और वर्क के हिसाब से पगड़ियों की डिमांड तो है लेकिन मुनाफा काफी कम रह गया है।