{"_id":"6a6b885353c0ac8b1306a00e","slug":"there-are-no-doctors-pharmacists-and-staff-are-managing-the-hospital-hardoi-news-c-213-1-hra1001-154050-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: चिकित्सक हैं नहीं, फार्मासिस्ट और कर्मी संभाल रहे अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: चिकित्सक हैं नहीं, फार्मासिस्ट और कर्मी संभाल रहे अस्पताल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेनीगंज/मल्लावां/भरावन। संरक्षित मवेशियों के साथ पालतू पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सक नहीं हैं। ऐसे में पशु चिकित्सालयों को फार्मासिस्ट और कर्मी संभाल रहे हैं। एक-एक चिकित्सक के पास कई-कई पशु चिकित्सालयों और आश्रयस्थलों की जिम्मेदारी है। इससे पशुपालकों को मवेशियों की बीमारियों के समय सरकारी चिकित्सालयों पर चिकित्सक ही नहीं मिल पाते हैं। इससे पशुपालकों को दवाओं और उपचार के लिए निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है।
-- -
26,500 मवेशियों पर सिर्फ चार दिन ही मिलेंगे डाॅक्टर
बेनीगंज। विकास खंड कोथावां स्थित दो पशु-चिकित्सालयो में उधार के डाॅक्टर से काम चलाया जा रहा है। यहां औसतन लगभग प्रतिदिन 22 पशु किसान लेकर आते हैं। जब डाॅक्टर नहीं मिलते तो मजबूरन किसान अपने मवेशियों को निजी डाॅक्टर को दिखाकर दवा लेने को विवश हैं। ब्लाॅक में 15 पशु आश्रयस्थल हैं और इनमें करीब 1,881 मवेशी संरक्षित हैं। चिकित्सालय का चार्ज संभाल रहे डॉक्टर अश्वनी के मुताबिक, ब्लॉक क्षेत्र में कुल 26,500 मवेशी हैं। बताया कि वैसे तो हमारी तैनाती गौसगंज चिकित्सालय पर है लेकिन कोथावां, बेनीगंज व रैसो का अतिरिक्त प्रभार भी है। बताया कि कोथावां में तीन दिन, बेनीगंज, गौसगंज और रैसो में एक-एक दिन समय देते हैं। बेनीगंज पशु चिकित्सालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात है। वहां पर औसतन आठ मवेशी प्रतिदिन किसान लेकर आते हैं।
-- -
दो पशु चिकित्सालयों में वर्षों से रिक्त हैं चिकित्सक का पद
भरावन। क्षेत्र की पशु चिकित्सा व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। दो पशु चिकित्सालयों पर करीब ढाई वर्ष से अधिक की अवधि से चिकित्सक तैनात नहीं हैं। 65 ग्राम पंचायतों और 348 मजरों के पशुपालक समय पर उपचार और टीकाकरण से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के बीमार होने पर उन्हें झोलाछाप चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। पशु चिकित्सालय छतिहा रामपुर में करीब ढाई वर्ष से कोई चिकित्सक नहीं है। इससे अस्पताल लगभग बंद है। पशु चिकित्सालय महीठा भी पिछले दो वर्षों से चिकित्सकविहीन है। पशु चिकित्सालय भरावन में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शंभूशरण चौधरी तैनात हैं। वहीं दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वीरेंद्र मिश्र और अवधेश भी तैनात हैं। पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में 14 पशु आश्रयस्थलों में 1,200 मवेशियों का टीकाकरण कराया जा चुका है। पशु मित्रों की हड़ताल के चलते गांवों में टीकाकरण अभियान शुरू नहीं हो पाया है। हड़हा के प्रशासक अवध नरेश, महीठा निवासी दिनेश वर्मा ने बताया कि चिकित्सकों की तैनाती न होने से लाखों रुपये की लागत के पशु चिकित्सालय दो से ढाई वर्षों से खाली पड़े हैं।
विज्ञापन
-- -
कहीं चिकित्सालय में ताला तो कहीं खाली मिली कुर्सी
मल्लावां। पशुपालन विभाग की उदासीनता के चलते पशुपालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसी अस्पताल में ताला लटक रहा है तो कहीं पर चिकित्सक नहीं हैं। बृहस्पतिवार सुबह करीब 11:24 बजे राजकीय पशु चिकित्सालय राघौपुर में ताला लगा मिला। अस्पताल में डाॅ. अनिल सिंह की तैनाती है। पशुपालक प्रवीण, विजय ने बताया कि अस्पताल कभी-कभार ही खुलता है। दोपहर 12:05 बजे राजकीय पशु चिकित्सालय मल्लावां में डाॅ. संजय सिंह, चतुर्थ श्रेणी कर्मी सीमा देवी, वाहन चालक हृदयेश की तैनाती है। चिकित्सक मौजूद नहीं थे। कुर्सी खाली पड़ी थी। सोनी देवी और ह्रदयेश ने बताया कि चिकित्सक सप्ताह में तीन दिन आते हैं। दिन निश्चित होने के बारे में वह लोग कोई जानकारी नहीं दे सके। बताया कि अस्पताल में पांच पैरावेट, मैत्री हैं। उन लोगों के माध्यम से टीकाकरण किया जा रहा है।
-- -
आधे से कम तैनात हैं चिकित्सक
पशुपालन विभाग के माध्यम से मवेशियों की बीमारी के समय जांच और उपचार के लिए पशु चिकित्साधिकारियों के 42 पद हैं इनमें 20 पर ही तैनाती है। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के सात पद हैं, छह पर तैनाती है। वहीं पशुधन प्रसार अधिकारी के 60 पदों के सापेक्ष 20 ही तैनात हैं जबकि फार्मासिस्ट के 47 पद हैं और 12 फार्मासिस्ट ही तैनात हैं। पशु चिकित्साधिकारियों की तैनाती शासन स्तर से ही पशु चिकित्सालयों पर होती है। वहीं रिक्त पदों पर संबद्धीकरण किया गया है। उसी से काम चलाया जा रहा है। -डॉ. सचिन कुमार, प्रभारी सीवीओ
विज्ञापन
26,500 मवेशियों पर सिर्फ चार दिन ही मिलेंगे डाॅक्टर
बेनीगंज। विकास खंड कोथावां स्थित दो पशु-चिकित्सालयो में उधार के डाॅक्टर से काम चलाया जा रहा है। यहां औसतन लगभग प्रतिदिन 22 पशु किसान लेकर आते हैं। जब डाॅक्टर नहीं मिलते तो मजबूरन किसान अपने मवेशियों को निजी डाॅक्टर को दिखाकर दवा लेने को विवश हैं। ब्लाॅक में 15 पशु आश्रयस्थल हैं और इनमें करीब 1,881 मवेशी संरक्षित हैं। चिकित्सालय का चार्ज संभाल रहे डॉक्टर अश्वनी के मुताबिक, ब्लॉक क्षेत्र में कुल 26,500 मवेशी हैं। बताया कि वैसे तो हमारी तैनाती गौसगंज चिकित्सालय पर है लेकिन कोथावां, बेनीगंज व रैसो का अतिरिक्त प्रभार भी है। बताया कि कोथावां में तीन दिन, बेनीगंज, गौसगंज और रैसो में एक-एक दिन समय देते हैं। बेनीगंज पशु चिकित्सालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात है। वहां पर औसतन आठ मवेशी प्रतिदिन किसान लेकर आते हैं।
विज्ञापन
दो पशु चिकित्सालयों में वर्षों से रिक्त हैं चिकित्सक का पद
भरावन। क्षेत्र की पशु चिकित्सा व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। दो पशु चिकित्सालयों पर करीब ढाई वर्ष से अधिक की अवधि से चिकित्सक तैनात नहीं हैं। 65 ग्राम पंचायतों और 348 मजरों के पशुपालक समय पर उपचार और टीकाकरण से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के बीमार होने पर उन्हें झोलाछाप चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। पशु चिकित्सालय छतिहा रामपुर में करीब ढाई वर्ष से कोई चिकित्सक नहीं है। इससे अस्पताल लगभग बंद है। पशु चिकित्सालय महीठा भी पिछले दो वर्षों से चिकित्सकविहीन है। पशु चिकित्सालय भरावन में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शंभूशरण चौधरी तैनात हैं। वहीं दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वीरेंद्र मिश्र और अवधेश भी तैनात हैं। पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में 14 पशु आश्रयस्थलों में 1,200 मवेशियों का टीकाकरण कराया जा चुका है। पशु मित्रों की हड़ताल के चलते गांवों में टीकाकरण अभियान शुरू नहीं हो पाया है। हड़हा के प्रशासक अवध नरेश, महीठा निवासी दिनेश वर्मा ने बताया कि चिकित्सकों की तैनाती न होने से लाखों रुपये की लागत के पशु चिकित्सालय दो से ढाई वर्षों से खाली पड़े हैं।
विज्ञापन
कहीं चिकित्सालय में ताला तो कहीं खाली मिली कुर्सी
मल्लावां। पशुपालन विभाग की उदासीनता के चलते पशुपालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसी अस्पताल में ताला लटक रहा है तो कहीं पर चिकित्सक नहीं हैं। बृहस्पतिवार सुबह करीब 11:24 बजे राजकीय पशु चिकित्सालय राघौपुर में ताला लगा मिला। अस्पताल में डाॅ. अनिल सिंह की तैनाती है। पशुपालक प्रवीण, विजय ने बताया कि अस्पताल कभी-कभार ही खुलता है। दोपहर 12:05 बजे राजकीय पशु चिकित्सालय मल्लावां में डाॅ. संजय सिंह, चतुर्थ श्रेणी कर्मी सीमा देवी, वाहन चालक हृदयेश की तैनाती है। चिकित्सक मौजूद नहीं थे। कुर्सी खाली पड़ी थी। सोनी देवी और ह्रदयेश ने बताया कि चिकित्सक सप्ताह में तीन दिन आते हैं। दिन निश्चित होने के बारे में वह लोग कोई जानकारी नहीं दे सके। बताया कि अस्पताल में पांच पैरावेट, मैत्री हैं। उन लोगों के माध्यम से टीकाकरण किया जा रहा है।
आधे से कम तैनात हैं चिकित्सक
पशुपालन विभाग के माध्यम से मवेशियों की बीमारी के समय जांच और उपचार के लिए पशु चिकित्साधिकारियों के 42 पद हैं इनमें 20 पर ही तैनाती है। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के सात पद हैं, छह पर तैनाती है। वहीं पशुधन प्रसार अधिकारी के 60 पदों के सापेक्ष 20 ही तैनात हैं जबकि फार्मासिस्ट के 47 पद हैं और 12 फार्मासिस्ट ही तैनात हैं। पशु चिकित्साधिकारियों की तैनाती शासन स्तर से ही पशु चिकित्सालयों पर होती है। वहीं रिक्त पदों पर संबद्धीकरण किया गया है। उसी से काम चलाया जा रहा है। -डॉ. सचिन कुमार, प्रभारी सीवीओ