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Hardoi News: हर मंजिल पर वाटर कूलर... कोई खराब तो किसी से गुनगुना पानी
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फोटो-25- मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बंद पड़ा वाटर कूलर। संवाद
फोटो-26- मेडिकल कॉलेज का आईपीडी भवन। संवाद
आईपीडी के नवीन भवन में नहीं लगा वाटर कूलर
-भर्ती मरीजों के तीमारदार दूसरी मंजिल से उतरकर ला रहे पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज की नई ओपीडी से लेकर आईपीडी भवन में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच अस्पताल परिसर में पेयजल का संकट बना हुआ है। ओपीडी की सभी मंजिलों पर वाटर कूलर लगे हैं लेकिन किसी में पानी नहीं है तो कहीं गर्म पानी आ रहा है। मरीजों को पीने का पानी अपने साथ लेकर आना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज के नए ओपीडी भवन के भूतल पर पंजीकरण और दवा काउंटर का संचालन होता है। वहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। मगर यहां प्यास बुझाने का कोई पुख्ता साधन नहीं है। भूतल से लेकर तीसरी मंजिल तक जगह-जगह वाटर कूलर तो लगाए गए हैं लेकिन वे महज शोपीस बनकर रह गए हैं। कई कूलरों में पानी की आपूर्ति ठप है तो कहीं तकनीकी खराबी के कारण गुनगुना या साधारण पानी आ रहा है। इस वजह से वाटर कूलरों का पानी कोई मरीज व तीमारदार प्रयोग करता ही नहीं दिखता है। बाहर की तेज गर्मी से परेशान होकर आने वाले व्यक्ति को महंगी बोतलें खरीदने या घर से ही पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
रोजाना दो हजार से अधिक पहुंच रहे मरीज
भीषण गर्मी पड़ने लगी है, गर्मी में लोगों को बीमारियां घेर रही हैं। मेडिकल कॉलेज में इन दिनों प्रतिदिन 1900 से 2100 के बीच मरीज पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को 2150 नए मरीजों ने दिखाने के लिए पर्चे बनवाए। इनमें उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी, जुकाम, पेट के रोगी अधिक रहे। फिजिशियन कक्ष व बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में भीड़ रही। डॉक्टर मरीजों को अधिक से अधिक पानी पीने, धूप में कम निकले व शरीर में पानी की कमी न हो इसकी सलाह देते रहे। मगर मेडिकल कॉलेज में लोग पीने के पानी के लिए परेशान नजर आए। पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था न होने से मरीज परेशान हो रहे हैं।
केस-1- जनिगवां निवासी अब्दुल हमीद ने बताया कि अस्पताल में पीने के पानी की अंदर कोई व्यवस्था नहीं है। एक गार्ड ने बाहर वाटर कूलर लगे होने की जानकारी दी। बताया कि जब बाहर के वाटर कूलर के पास पहुंचे तो पानी गर्म था। बाहर से एक 20 रुपये की बोतल खरीदनी पड़ी।
केस-2- हरियावां के पंकज ने बताया कि वाटर कूलर से पानी पीने गए थे। मगर हल्का गुनगुना पानी होने से प्यास नहीं बुझ रही थी। उन्हें बाहर से पानी की बोतल खरीदनी पड़ी।
हड्डी वार्ड के मरीजों की बढ़ी मुसीबत
सबसे बदतर स्थिति नवीन आईपीडी भवन की है जहां वाटर कूलर की सुविधा ही नहीं है। हड्डी रोग विभाग में भर्ती मरीज, जिनके लिए चलना-फिरना भी दूभर है उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदारों ने बताया कि पानी के लिए उन्हें दूसरी मंजिल से नीचे उतरकर करीब 200 मीटर का फासला तय करना पड़ता है। पैर में चोट या ऑपरेशन के बाद मरीजों के परिजनों के लिए यह भागदौड़ दोहरी मुसीबत बन गई है।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज के सभी वाटर कूलरों की सफाई करके उन्हें चलाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसी तरह नवीन आईपीडी भवन में भी नया वाटर कूलर लगाने के लिए कहा गया है। अभी तक काम पूरा क्यों नहीं हुआ है। इसकी जानकारी कर जल्द व्यवस्था कराई जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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फोटो-26- मेडिकल कॉलेज का आईपीडी भवन। संवाद
आईपीडी के नवीन भवन में नहीं लगा वाटर कूलर
-भर्ती मरीजों के तीमारदार दूसरी मंजिल से उतरकर ला रहे पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज की नई ओपीडी से लेकर आईपीडी भवन में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच अस्पताल परिसर में पेयजल का संकट बना हुआ है। ओपीडी की सभी मंजिलों पर वाटर कूलर लगे हैं लेकिन किसी में पानी नहीं है तो कहीं गर्म पानी आ रहा है। मरीजों को पीने का पानी अपने साथ लेकर आना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज के नए ओपीडी भवन के भूतल पर पंजीकरण और दवा काउंटर का संचालन होता है। वहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। मगर यहां प्यास बुझाने का कोई पुख्ता साधन नहीं है। भूतल से लेकर तीसरी मंजिल तक जगह-जगह वाटर कूलर तो लगाए गए हैं लेकिन वे महज शोपीस बनकर रह गए हैं। कई कूलरों में पानी की आपूर्ति ठप है तो कहीं तकनीकी खराबी के कारण गुनगुना या साधारण पानी आ रहा है। इस वजह से वाटर कूलरों का पानी कोई मरीज व तीमारदार प्रयोग करता ही नहीं दिखता है। बाहर की तेज गर्मी से परेशान होकर आने वाले व्यक्ति को महंगी बोतलें खरीदने या घर से ही पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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रोजाना दो हजार से अधिक पहुंच रहे मरीज
भीषण गर्मी पड़ने लगी है, गर्मी में लोगों को बीमारियां घेर रही हैं। मेडिकल कॉलेज में इन दिनों प्रतिदिन 1900 से 2100 के बीच मरीज पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को 2150 नए मरीजों ने दिखाने के लिए पर्चे बनवाए। इनमें उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी, जुकाम, पेट के रोगी अधिक रहे। फिजिशियन कक्ष व बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में भीड़ रही। डॉक्टर मरीजों को अधिक से अधिक पानी पीने, धूप में कम निकले व शरीर में पानी की कमी न हो इसकी सलाह देते रहे। मगर मेडिकल कॉलेज में लोग पीने के पानी के लिए परेशान नजर आए। पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था न होने से मरीज परेशान हो रहे हैं।
केस-1- जनिगवां निवासी अब्दुल हमीद ने बताया कि अस्पताल में पीने के पानी की अंदर कोई व्यवस्था नहीं है। एक गार्ड ने बाहर वाटर कूलर लगे होने की जानकारी दी। बताया कि जब बाहर के वाटर कूलर के पास पहुंचे तो पानी गर्म था। बाहर से एक 20 रुपये की बोतल खरीदनी पड़ी।
केस-2- हरियावां के पंकज ने बताया कि वाटर कूलर से पानी पीने गए थे। मगर हल्का गुनगुना पानी होने से प्यास नहीं बुझ रही थी। उन्हें बाहर से पानी की बोतल खरीदनी पड़ी।
हड्डी वार्ड के मरीजों की बढ़ी मुसीबत
सबसे बदतर स्थिति नवीन आईपीडी भवन की है जहां वाटर कूलर की सुविधा ही नहीं है। हड्डी रोग विभाग में भर्ती मरीज, जिनके लिए चलना-फिरना भी दूभर है उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदारों ने बताया कि पानी के लिए उन्हें दूसरी मंजिल से नीचे उतरकर करीब 200 मीटर का फासला तय करना पड़ता है। पैर में चोट या ऑपरेशन के बाद मरीजों के परिजनों के लिए यह भागदौड़ दोहरी मुसीबत बन गई है।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज के सभी वाटर कूलरों की सफाई करके उन्हें चलाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसी तरह नवीन आईपीडी भवन में भी नया वाटर कूलर लगाने के लिए कहा गया है। अभी तक काम पूरा क्यों नहीं हुआ है। इसकी जानकारी कर जल्द व्यवस्था कराई जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज