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Hathras News: 36 घंटे में 20 लोगों को सांपों ने डसा, पहुंचे अस्पताल
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बागला जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती सर्पदंश से पीड़ित मरीज। संवाद
- फोटो : Samvad
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बारिश के कारण ग्रामीण और शहरी इलाकों में जलभराव है। जमीन के नीचे बने बिलों और दरारों में पानी भरने के कारण जहरीले सांप सूखे और सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले इलाकों और घरों में घुस रहे हैं। हाथरस जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में 36 घंटों के भीतर सर्पदंश से पीड़ित 20 से अधिक मरीज पहुंचे हैं। इनमें से 10 अभी तक भर्ती हैं, 10 को घर भेजा गया है। तीन दिनों में एंटी स्नेक वेनम की खपत तेजी से बढ़ी है, जिसे देखते हुए स्वास्थ्य प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
पॉलीवेलेंट एएसवी की खपत बढ़ी
हादसे के समय प्रभावित व्यक्ति या उसके परिजन अक्सर सांप की सही प्रजाति नहीं पहचान पाते। इसलिए सरकारी अस्पतालों में पॉलीवेलेंट एंटी स्नेक वेनम का प्रयोग किया जाता है। यह एएसवी भारत के चारों प्रमुख जहरीले सांपों (कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर) के जहर को एक साथ बेअसर करने की क्षमता रखता है। पिछले 24 घंटे में जिला अस्पताल में एएसवी की 55 वाइल प्रयोग हुई हैं।
इमरजेंसी में यह एएसवी की खुराक सलाइन के साथ दी जा रही है। मरीज की हालत के अनुसार 8 से 10 शीशियां नॉर्मल सलाइन (एनएस) में मिलाकर धीरे-धीरे एक घंटे के भीतर मरीज के शरीर में चढ़ाई जाती हैं। सीएमएस डॉ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि एक मरीज की हालत अधिक खराब थी। 15 वाइल के बाद भी उसकी हालत में सुधार न होने पर उसे रेफर
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किया गया।
इनको सांपों ने डसा
नगला सिकुर्रा सादाबाद के रविंद्र (34) को घर में ही सांप ने पैर पर डस लिया। हालत बिगड़ने पर बुधवार देर रात जिला अस्पताल लाया गया। इसी तरह बिसाना के अमित (27) को इमरजेंसी लाया गया। देर रात करीब एक बजे हाजीपुर, हाथरस जंक्शन की जमुना देवी (32) को सोते समय सांप ने डस लिया। हालत में सुधार न होने पर उन्हें रेफर किया गया। बृहस्पतिवार की सुबह चंद्रगढ़ी की विमेश देवी, रुद्रपुर के महेश, नया बांस की पिंकी देवी, सुरंगपुरा के देवकीनंदन व बरौली के ओमप्रकाश भी सर्प दंश का शिकार हुए। इनका उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है।
यहां पाए जाने वाले जहरीले सांप
पश्चिमी उत्तर प्रदेश यानी हाथरस, अलीगढ़, मथुरा, आगरा आदि मैदानी व कृषि क्षेत्रों में मुख्य रूप से चार प्रकार के अत्यधिक जहरीले सांप पाए जाते हैं, जिन्हें चिकित्सा विज्ञान में बिग फोर कहा जाता है।
स्पेक्टेकल्ड कोबरा : इसमें न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है, जो तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। यह सांप खतरा महसूस होने पर फन उठा लेता है। फन के पीछे चश्मे जैसा निशान होता है।
कॉमन करैत : इसमें भी न्यूरोटॉक्सिक जहर पाया जाता है। यह मुख्य रूप से रात में सक्रिय होता है। इसके डसने पर दर्द या सूजन बहुत कम होती है, जिससे व्यक्ति को नींद में पता नहीं चलता।
रसेल वाइपर: इसमें हीमोटॉक्सिक जहर होता है, जो रक्त और ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। यह बेहद आक्रामक होता है और खतरा महसूस होने पर कुकर की सीटी जैसी तेज फुफकार छोड़ता है।
सॉ-स्केल्ड वाइपर/ फुरसा: इसमें भी हीमोटॉक्सिक जहर होता है। इसका आकार एक से दो फीट ही होता है, लेकिन इसके शरीर के शल्क आपस में रगड़कर आरी जैसी आवाज पैदा करते हैं।
ऐसे पहचाने जहरीले और विषहीन सांप
सिर का आकार : रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर का सिर त्रिकोणीय होता है। कोबरा का सिर फन फैलाने पर चौड़ा दिखता है। बिना जहर वाले ज्यादातर सांपों का सिर गोल या अंडाकार होता है, जो गर्दन से अलग से उभरा हुआ नहीं दिखता।
आंखों की पुतली : जहरीले वाइपर प्रजातियों की पुतली बिल्ली की तरह पतली/खड़ी होती हैं। बिना जहर के अधिकांश सांपों की पुतली गोल होती है।
शरीर के निशान : जहरीले करैत के गहरे काले/नीले शरीर पर सफेद रंग की पतली दोहरी धारियां तथा रसेल वाइपर की पीठ पर भूरे रंग के गोल/चेन जैसे छल्ले होते हैं। विषहीन सांप जैसे रेट स्नेक हल्के भूरे या पीले रंग का लंबा सांप होता है, जो बहुत तेज भागता है। ढोरिया सांप पानी के आसपास पाया जाने वाला चेकदार पैटर्न का होता है।
डसने का निशान : जहरीले सांप के काटने की जगह पर दो मुख्य और गहरे दांतों के निशान मिलते हैं। बिना जहर के सांप में कई छोटे-छोटे दांतों के गोलाई में खरोंच जैसे निशान मिलते हैं।
बाक्स-- -
जिला अस्पताल में जनवरी से
अब तक आए सर्पदंश के मामले
जुलाई - 42 (9 तारीख तक)
जून - 67
मई - 60
अप्रैल - 32
मार्च - 28
फरवरी - 7
जनवरी - 3
सर्पदंश के बढ़ते मामलों को लेकर सभी सीएचसी व पीएचसी पर स्टाफ को अलर्ट किया गया है। पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हैं, जिनको सभी केंद्रों पर पहुंचा दिया गया है। एंबुलेंस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। बारिश में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
डॉ. वेदप्रकाश अग्रवाल, सीएमओ।
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पॉलीवेलेंट एएसवी की खपत बढ़ी
हादसे के समय प्रभावित व्यक्ति या उसके परिजन अक्सर सांप की सही प्रजाति नहीं पहचान पाते। इसलिए सरकारी अस्पतालों में पॉलीवेलेंट एंटी स्नेक वेनम का प्रयोग किया जाता है। यह एएसवी भारत के चारों प्रमुख जहरीले सांपों (कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर) के जहर को एक साथ बेअसर करने की क्षमता रखता है। पिछले 24 घंटे में जिला अस्पताल में एएसवी की 55 वाइल प्रयोग हुई हैं।
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इमरजेंसी में यह एएसवी की खुराक सलाइन के साथ दी जा रही है। मरीज की हालत के अनुसार 8 से 10 शीशियां नॉर्मल सलाइन (एनएस) में मिलाकर धीरे-धीरे एक घंटे के भीतर मरीज के शरीर में चढ़ाई जाती हैं। सीएमएस डॉ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि एक मरीज की हालत अधिक खराब थी। 15 वाइल के बाद भी उसकी हालत में सुधार न होने पर उसे रेफर
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किया गया।
इनको सांपों ने डसा
नगला सिकुर्रा सादाबाद के रविंद्र (34) को घर में ही सांप ने पैर पर डस लिया। हालत बिगड़ने पर बुधवार देर रात जिला अस्पताल लाया गया। इसी तरह बिसाना के अमित (27) को इमरजेंसी लाया गया। देर रात करीब एक बजे हाजीपुर, हाथरस जंक्शन की जमुना देवी (32) को सोते समय सांप ने डस लिया। हालत में सुधार न होने पर उन्हें रेफर किया गया। बृहस्पतिवार की सुबह चंद्रगढ़ी की विमेश देवी, रुद्रपुर के महेश, नया बांस की पिंकी देवी, सुरंगपुरा के देवकीनंदन व बरौली के ओमप्रकाश भी सर्प दंश का शिकार हुए। इनका उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है।
यहां पाए जाने वाले जहरीले सांप
पश्चिमी उत्तर प्रदेश यानी हाथरस, अलीगढ़, मथुरा, आगरा आदि मैदानी व कृषि क्षेत्रों में मुख्य रूप से चार प्रकार के अत्यधिक जहरीले सांप पाए जाते हैं, जिन्हें चिकित्सा विज्ञान में बिग फोर कहा जाता है।
स्पेक्टेकल्ड कोबरा : इसमें न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है, जो तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। यह सांप खतरा महसूस होने पर फन उठा लेता है। फन के पीछे चश्मे जैसा निशान होता है।
कॉमन करैत : इसमें भी न्यूरोटॉक्सिक जहर पाया जाता है। यह मुख्य रूप से रात में सक्रिय होता है। इसके डसने पर दर्द या सूजन बहुत कम होती है, जिससे व्यक्ति को नींद में पता नहीं चलता।
रसेल वाइपर: इसमें हीमोटॉक्सिक जहर होता है, जो रक्त और ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। यह बेहद आक्रामक होता है और खतरा महसूस होने पर कुकर की सीटी जैसी तेज फुफकार छोड़ता है।
सॉ-स्केल्ड वाइपर/ फुरसा: इसमें भी हीमोटॉक्सिक जहर होता है। इसका आकार एक से दो फीट ही होता है, लेकिन इसके शरीर के शल्क आपस में रगड़कर आरी जैसी आवाज पैदा करते हैं।
ऐसे पहचाने जहरीले और विषहीन सांप
सिर का आकार : रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर का सिर त्रिकोणीय होता है। कोबरा का सिर फन फैलाने पर चौड़ा दिखता है। बिना जहर वाले ज्यादातर सांपों का सिर गोल या अंडाकार होता है, जो गर्दन से अलग से उभरा हुआ नहीं दिखता।
आंखों की पुतली : जहरीले वाइपर प्रजातियों की पुतली बिल्ली की तरह पतली/खड़ी होती हैं। बिना जहर के अधिकांश सांपों की पुतली गोल होती है।
शरीर के निशान : जहरीले करैत के गहरे काले/नीले शरीर पर सफेद रंग की पतली दोहरी धारियां तथा रसेल वाइपर की पीठ पर भूरे रंग के गोल/चेन जैसे छल्ले होते हैं। विषहीन सांप जैसे रेट स्नेक हल्के भूरे या पीले रंग का लंबा सांप होता है, जो बहुत तेज भागता है। ढोरिया सांप पानी के आसपास पाया जाने वाला चेकदार पैटर्न का होता है।
डसने का निशान : जहरीले सांप के काटने की जगह पर दो मुख्य और गहरे दांतों के निशान मिलते हैं। बिना जहर के सांप में कई छोटे-छोटे दांतों के गोलाई में खरोंच जैसे निशान मिलते हैं।
बाक्स
जिला अस्पताल में जनवरी से
अब तक आए सर्पदंश के मामले
जुलाई - 42 (9 तारीख तक)
जून - 67
मई - 60
अप्रैल - 32
मार्च - 28
फरवरी - 7
जनवरी - 3
सर्पदंश के बढ़ते मामलों को लेकर सभी सीएचसी व पीएचसी पर स्टाफ को अलर्ट किया गया है। पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हैं, जिनको सभी केंद्रों पर पहुंचा दिया गया है। एंबुलेंस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। बारिश में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
डॉ. वेदप्रकाश अग्रवाल, सीएमओ।