नदी-खेत हुए एक: 24 घंटे में 127 एमएम बरसा पानी, उफनाई ईशन नदी से एक हजार बीघा फसल जलमग्न, जनजीवन अस्त-व्यस्त
हाथरस जिले में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने प्रशासनिक दावों और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। शहर से लेकर देहात तक चारों ओर जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
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विस्तार
हाथरस जिले में पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड 126.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 1879 फीसदी अधिक है। हाथरस प्रदेश में बारिश के मामले में बिजनौर के बाद दूसरे स्थान पर रहा। इस भारी बारिश के कारण ईशन नदी में उफान आ गया, जिससे हसायन और पुरदिलनगर के कई गांवों में करीब एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई।
एक जून से नौ जुलाई तक जिले में कुल बारिश 219.4 मिलीमीटर तक पहुंच गई है, जो सामान्य से 125 फीसदी अधिक है। लगातार बारिश से शहर के कई मोहल्लों में जलभराव हो गया, जिससे राहगीरों को परेशानी हुई। जिला प्रशासन ने कक्षा आठ तक के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया, पर बड़े विद्यालय खुले रहे। हाथरस में इस मानसूनी बारिश की बदौलत एक जून से नौ जुलाई तक के पूरे सीजन की कुल बारिश अब 219.4 मिमी तक पहुंच गई है, जो सामान्य (97.7 मिमी) से 125% अधिक है। हाथरस जिला इस समय सरप्लस बारिश वाले टॉप जिलों में शामिल हो गया है।
समय पर ध्यान न देने के कारण ईशन नदी ने हसायन और पुरदिलनगर के गांवों में तबाही मचाई। खेतों में दो-दो फीट तक पानी भर गया, जिससे धान, मक्का, लौकी, तोरई और मूंग की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। लगभग 200 से 250 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। सिंचावली कदीम के किसान सत्येंद्र सिंह की 300 बीघा धान की फसल पानी में डूब गई। किसान गजेंद्र की 65 बीघा धान और 20 बीघा लौकी की फसल भी जलमग्न हो गई। गिरीश कुमार की 60 बीघा और हरी सिंह की 20 बीघा धान की फसल भी बर्बाद हुई है। एटा बॉर्डर पर बांध लगाकर पानी रोकने से सिंचावली और आसपास के गांवों में पानी भर जाता है।
सितंबर 2024 में भी ईशन नदी के पानी से 28 गांवों की 30 हजार आबादी प्रभावित हुई थी और पांच हजार बीघा फसल नष्ट हुई थी। अमर उजाला ने तीन जुलाई को नदियों की सफाई न होने पर बाढ़ की आशंका जताई थी।
सासनी में चार घंटे गुल रही बिजली
बारिश के कारण सासनी कस्बे और ग्रामीण क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति चरमरा गई। बृहस्पतिवार सुबह छह बजे से 10 बजे तक करीब चार घंटे तक बिजली ठप रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सैकड़ों लोग पानी के लिए तरस गए। बिजली घर पर मशीनों में फाल्ट होने से यह समस्या उत्पन्न हुई। विद्युत व्यवस्था ठप होने की सूचना पर अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने मशीनों को दुरुस्त कराकर विद्युत व्यवस्था सुचारु कराई। इसके बाद ग्रामीणों और कस्बा के लोगों ने चैन की सांस ली। एसडीओ आशीष रत्न ने बताया कि बिजली घर की मशीनों में फाल्ट होने के कारण करीब चार घंटे तक विद्युत व्यवस्था बाधित रही। शीघ्र ही मशीनों को दुरुस्त कराकर विद्युत व्यवस्था सुचारु कर दी गई।
कहीं उफान पर पोखर.. कहीं फूटे नाले
हाथरस जिले में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने प्रशासनिक दावों और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। शहर से लेकर देहात तक चारों ओर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। पोखरों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों तक आ गया है और घरों में घुस गया। कई जगह नाले टूटने से भारी नुकसान की आशंका गहरा गई है।
दयानतपुर में बृहस्पतिवार की दोपहर ग्रामीण श्याम सुंदर के घर से युवक बाल्टी से पानी निकालते नजर आया। यही स्थिति पास में ही रूप किशोर के घर की थी। यहां भी परिजन डिब्बे से पानी बाहर निकाल रहे थे। गांव के पोखर से गलियों में पहुंचे पानी को घर में आने से रोकने के लिए मुख्य दरवाजे पर कट्टे में मिट्टी भरकर मेड़ बना रखी थी। इसके बाद भी पानी घरों में पहुंच रहा है। ग्रामीण राकेश के अनुसार आधा गांव का पानी इसी पोखर में आता है। ज्ञासीराम ने बताया कि खेतों से आते हैं तो इसी गंदे पानी से निकलना पड़ता है। रात के समय हादसे का डर बना रहता है। इसी तरह नगला तुंदला और ढकपुरा की पत्थरवाली रोड स्थित पोखर ओवरफ्लो होने से गांव में घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे कई घरों में पानी घुस चुका है।
कैनाल कॉलोनी में दीवार गिरी
अलीगढ़ रोड स्थित लेबर कॉलोनी के सामने कैनाल कॉलोनी की दीवार बुधवार को बारिश के चलते ढह गई। पास का नाला भी क्षतिग्रस्त हो गया। नाले का गंदा और फैक्टथ्रयों का केमिकल युक्त पानी वहां बने पांच फीट गहरे गड्ढे में लगातार समा रहा है। बारिश से यह गड्ढा लगातार चौड़ा होता जा रहा है। पास स्थित कॉम्प्लेक्स संचालक वेदांग बंसल और स्थानीय निवासियों ने बताया कि गंदा पानी इमारतों की नींव में जा रहा है, जिससे मकान और कॉम्प्लेक्स धंसने की आशंका से लोग दहशत में हैं।
सादाबाद के मीरपुर में भी बिगड़े हालात
सादाबाद तहसील क्षेत्र के मीरपुर गांव में भी जलप्रलय जैसा नजारा है। बारिश के कारण गांव के पोखर का पानी ओवरफ्लो होकर मुख्य मार्ग से लगभग 100 मीटर अंदर तक भर गया है। निचले इलाकों में स्थित पुराने मकानों में पानी घुसने से ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या ठप हो गई है। बीडीओ सुरेश कुमार ने ग्रामीणों को पंप सेट लगवाकर जल्द से जल्द पानी निकलवाने का आश्वासन दिया है, लेकिन धरातल पर लोग अब भी राहत का इंतजार कर रहे हैं।
इनका कहना है
पानी निकालने के लिए पंप सेट लगवाए हुए हैं। जहां-जहां जलभराव हुआ है, वहां से पानी निकलवाया जा रहा है। कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं।-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस
उफनाई ईशन नदी, एक हजार बीघा फसल की ली बलि
समय रहते आगाह करने के बावजूद सिस्टम ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा, बारिश होते ही ईशन नदी ने हसायन व पुरदिलनगर के कई गांवों में तबाही मचा दी। खेतों में दो-दो फीट तक पानी भर जाने से करीब एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई है। खून-पसीने से सींची गई फसल को आंखों के सामने डूबता देख किसान अब बेबसी के आंसू बहाने पर मजबूर हैं।
ईशन नदी में आए उफान और जल निकासी का उचित प्रबंध न होने से क्षेत्र के लगभग 200 से 250 किसान सीधी तौर पर प्रभावित हुए हैं। खेतों में पानी भर जाने से धान, मक्का, लौकी, तोरई और मूंग की फसलें पूरी तरह बर्बाद होने के कगार पर हैं। कई किसानों द्वारा तैयार की गई धान की पौध और हाल ही में लगाई गईं फसलें दो-दो फीट पानी में समा गई हैं।
प्रभावित होने वाले प्रमुख गांव
नदी के पानी ने हाथरस रोड से पुरदिलनगर रोड की तरफ के नगला ब्राह्मण, नवापुर, सिंचावली कदीम, मोहनपुरा, नगला बरी, पट्टी देवरी, नगला बिहारी, बरसामई, नगला मंधाती, सिहुरी, नगला उदइया, गोपालपुर, गूजरपुर, तालिमपुर, सुल्तानपुर और महाराजपुर सहित गांवों को चपेट में ले लिया है।
नुकसान की कहानी, किसानों की जुबानी
सिंचावली कदीम के किसान सत्येंद्र सिंह ने बताया कि खेतों के पास से ईशन नदी गुजरती है। उनकी करीब 300 बीघा धान की फसल में अब दो-दो फीट तक पानी भरा है। किसान गजेंद्र ने बताया कि इस बार 15 दिन पहले ही 65 बीघा में धान की रोपाई की गई थी। अब पूरी फसल डूब गई है। इसके अलावा 20 बीघा की लौकी की फसल भी जलमग्न हो गई है। गिरीश कुमार की 60 बीघा और हरी सिंह की 20 बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है।
एटा बॉर्डर का डैम बना मुश्किल
दो साल पहले भी बाढ़ से तबाही हुई थी, लेकिन प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। न तो नदी की सफाई कराई गई और न ही एटा बॉर्डर पर बनाए गए डैम का कोई स्थायी समाधान निकाला गया। एटा बॉर्डर पर बांध लगाकर पानी रोक दिया जाता है, जिससे सिंचावली और आसपास के गांवों में पानी बैक मारता है।
मेहनत और पूंजी दोनों पर फिरा पानी
जिन फसलों को किसान रात-दिन एक करके सींच रहे थे, आज वही फसलें पानी के नीचे सड़ने की कगार पर हैं। कर्ज लेकर बीज और खाद जुटाने वाले किसानों के सामने अब परिवार के पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
दो साल पहले पांच हजार बीघा फसल हुई थी नष्ट
सितंबर 2024 में ईशन नदी के पानी मची तबाही के मंजर को ग्रामीण भूल नहीं पाए हैं। पहले इसी तरह खेतों में पानी भरा और फिर गांव की आबादी तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था। पांच-पांच फीट तक घरों में पानी आ गया था। उस बाढ़ में 28 गांव में 30 हजार की आबादी प्रभावित हुई थी। लोग पलायन को मजबूर हो गए थे।