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Hathras News: नाम का हेल्थ सेंटर, इलाज के लिए दौड़ते हैं हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:38 AM IST
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मेंडू के आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर लगा ताला। संवाद
- फोटो : Samvad
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करीब 20 हजार की आबादी और पांच गांवों के केंद्र बिंदु मेंडू में बना हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थानीय लोगों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। आलम यह है कि सर्दी, जुकाम और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी स्थानीय निवासियों को पांच से आठ किलोमीटर दूर हाथरस जिला अस्पताल या निजी क्लीनिकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्र पर अक्सर ताला लटका रहता है। यहां किसी चिकित्सक की स्थायी तैनाती नहीं है। यहां नियुक्त दो एएनएम, वंदना और मीनाक्षी क्षेत्र बड़ा होने के कारण अधिकतर समय क्षेत्र में टीकाकरण कार्यों में ही व्यस्त रहती हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर आशा कार्यकर्ता भी मौजूद नहीं रहतीं। ऐसे में केंद्र पर दवा लेने पहुंचने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
आपातकालीन स्थिति में मेंडू के लोगों के सामने मुश्किल खड़ी हो जाती है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कोई गंभीर स्थिति आने पर उन्हें मजबूरन पांच किलोमीटर दूर हाथरस के बागला अस्पताल या चार किलोमीटर दूर हाथरस जंक्शन स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। जिन लोगों के पास साधन नहीं हैं, वे निजी मेडिकल स्टोर और झोलाछाप डॉक्टरों से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर हैं।
कस्बे में कहने को तो स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन वहां कभी कोई डॉक्टर नहीं मिलता। सामान्य जांच या दवा के लिए भी हमें हाथरस के निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। गरीब आदमी पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ता है।
-पिंकी निवासी जाटवान खुर्द
मेंडू से पांच गांव जुड़े हुए हैं, लेकिन अस्पताल जैसी कोई सुविधा नहीं है। स्टाफ के नाम पर सिर्फ दो महिलाएं हैं, जो हमेशा टीकाकरण में ही व्यस्त रहती हैं। अगर अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो पांच किलोमीटर दूर बागला अस्पताल भागना पड़ता है।
-राजकुमारी निवासी मोहल्ला जाटवान कलां
सभी स्वास्थ्य केंद्र खुल रहे हैं। अगर किसी केंद्र पर ताला लटका है तो इसकी जांच कराके कार्यवाही की जाएगी।
डाॅ. राजीव राय, सीएमओ
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्र पर अक्सर ताला लटका रहता है। यहां किसी चिकित्सक की स्थायी तैनाती नहीं है। यहां नियुक्त दो एएनएम, वंदना और मीनाक्षी क्षेत्र बड़ा होने के कारण अधिकतर समय क्षेत्र में टीकाकरण कार्यों में ही व्यस्त रहती हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर आशा कार्यकर्ता भी मौजूद नहीं रहतीं। ऐसे में केंद्र पर दवा लेने पहुंचने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
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आपातकालीन स्थिति में मेंडू के लोगों के सामने मुश्किल खड़ी हो जाती है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कोई गंभीर स्थिति आने पर उन्हें मजबूरन पांच किलोमीटर दूर हाथरस के बागला अस्पताल या चार किलोमीटर दूर हाथरस जंक्शन स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। जिन लोगों के पास साधन नहीं हैं, वे निजी मेडिकल स्टोर और झोलाछाप डॉक्टरों से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर हैं।
कस्बे में कहने को तो स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन वहां कभी कोई डॉक्टर नहीं मिलता। सामान्य जांच या दवा के लिए भी हमें हाथरस के निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। गरीब आदमी पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ता है।
-पिंकी निवासी जाटवान खुर्द
मेंडू से पांच गांव जुड़े हुए हैं, लेकिन अस्पताल जैसी कोई सुविधा नहीं है। स्टाफ के नाम पर सिर्फ दो महिलाएं हैं, जो हमेशा टीकाकरण में ही व्यस्त रहती हैं। अगर अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो पांच किलोमीटर दूर बागला अस्पताल भागना पड़ता है।
-राजकुमारी निवासी मोहल्ला जाटवान कलां
सभी स्वास्थ्य केंद्र खुल रहे हैं। अगर किसी केंद्र पर ताला लटका है तो इसकी जांच कराके कार्यवाही की जाएगी।
डाॅ. राजीव राय, सीएमओ