57 क्विंटल के 106 बोरे सिक्का: नहीं हो पा रही एफआईआर, सीसीटीएनएस में नहीं मिलीं सिक्का अधिनियम की धाराएं
हाथरस कचरी, पोला और नमकीन के निर्माण का बड़ा केंद्र है। यहां से तैयार माल उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों में भी सप्लाई होता है। चूंकि इन उत्पादों की रिटेल बिक्री पांच और 10 रुपये के सिक्कों में ज्यादा होती है इसलिए बाहर के व्यापारी हाथरस के उद्यमियों को भुगतान में सिक्कों की बड़ी खेप थमा देते हैं।
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क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) में सिक्का अधिनियम-2011 (काॅइनेज एक्ट) की धाराएं न होने के कारण बड़ी संख्या में मिले सिक्कों के मामले में रविवार को भी प्राथमिकी दर्ज न हो सकी। देर रात तक कोतवाली सदर में कंप्यूटर ऑपरेटर तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज करने का प्रयास करते रहे। नायब तहसीलदार की ओर से दी गई तहरीर में अधिनियम की धारा 12 व 13 के तहत प्राथमिकी दर्ज होनी है।
एसडीएम सदर राजबहादुर ने गोपनीय सूचना के आधार पर शनिवार शाम हनुमान गली निवासी नवीन समादिया की नयागंज स्थित दुकान नवीन शंकर पुस्तक भंडार से सिक्कों से भरे 422.8 किलो वजन वाले 16 और घर से 5143.5 किलो वजन वाले 90 कट्टे बरामद किए थे। मुरसान के नायब तहसीलदार शिव कुमार की तहरीर के अनुसार कट्टों में एक, दो और पांच के सिक्के थे जिनका कुल वजन 57 क्विंटल है। अधिकारियों का दावा था कि आरोपी नवीन घटनास्थल से भाग गया था।
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पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों में खींचतान बड़ी मात्रा में भारतीय मुद्रा की कालाबाजारी के भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों में प्राथमिकी के नाम पर खींचतान शुरू हो गई थी। प्रशासन ने पुलिस पर प्राथमिकी दर्ज कराने का दबाव बनाया जबकि पुलिस अधिकारियों ने इसे प्रशासनिक कार्रवाई बताते हुए पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने से इन्कार कर दिया। देर रात तक चली खींचतान के बाद नायब तहसीलदार ने तहरीर दी गई।
तकनीकी वजह से एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। कॉइनेज एक्ट के संबंध में ई-मेल के जरिए मुख्यालय को सूचना दी गई है। सोमवार तक रिपोर्ट दर्ज होने की संभावना है।-हिमांशु माथुर, सीओ सिटी
हर माह करेंसी मैनेजमेंट की बैठक होती है और करेंसी चेस्ट को सीधे तौर पर आरबीआई मॉनीटर करता है। इसलिए वहां से किसी प्रकार की गड़बड़ी संभव नहीं है। सिक्कों व करेंसी की आपूर्ति के लिए डिमांड भेजी जाती है और कभी आरबीआई अपनी मर्जी से भी भेजता है। सिक्कों की नई पैकिंग मिलने से नकली सिक्कों के बनाने की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता है। इस बिंदु पर भी गहन जांच की आवश्यकता है।-राजीव कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक, हाथरस।
कार्रवाई से संचालकों में खलबली, बंद हो गईं गलाई फैक्टरियां
हनुमान गली में कार्रवाई का असर रविवार को जिले के मेटल और पीतल उद्योग पर देखने को मिला। प्रशासन की ओर से सिक्कों को गलाए जाने की आशंका जताए जाने के बाद से ही मेटल कारोबारियों और गलाई भट्ठियों के संचालकों में खलबली है। पुलिस-प्रशासन की संभावित कार्रवाई के खौफ से मेटल मार्केट और ढलाई-गलाई से जुड़े कारखानों में सन्नाटा पसरा रहा।
शहर के अलावा आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर पीतल, एल्युमीनियम समेत अन्य धातुओं की ढलाई व गलाई का काम होता है। आशंका जताई जा रही है कि इसी आड़ में सिक्कों को गलाने का अवैध खेल चल रहा है। एलडीएम और पुलिस प्रशासन दोनों इस दिशा में तकनीकी जांच करा रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सिक्कों की कालाबाजारी का नेटवर्क सामने आने के बाद प्रशासनिक टीमों ने यह जांच शुरू कर दी है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में सिक्कों को कहां खपाया जाना था। आशंका जताई जा रही है कि पांच और 10 रुपये के सिक्कों को गलवाकर उसमें प्रयुक्त धातु जैसे कॉपर, निकल या ब्रास को महंगे दामों में बेचने का खेल चल रहा था। इसी आशंका के चलते शहर के बाहरी इलाकों ढकपुरा रोड, सासनी, जलेसर रोड और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध या वैध रूप से चल रही गलाई इकाइयों पर प्रशासन की खुफिया नजरें टिक गई हैं। कार्रवाई की आंच उन तक न पहुंच जाए इस खौफ से कई संचालकों ने काम रोक दिया है। कई भट्ठी संचालक कानूनी शिकंजे में फंसने के डर से अपनी इकाइयां बंद कर भूमिगत हो गए हैं।
बैंकों पर सवाल, नकली सिक्कों का भी खतरा
इस मामले में अब बैंकिंग प्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। छापे के दौरान गोदाम से बरामद बोरियों में 100-100 सिक्कों के चमचमाते पॉली पैक मिले हैं जो सीधे बैंक या करेंसी चेस्ट से जारी होने की ओर साफ इशारा कर रहे हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि बैंक कर्मचारियों या बिचौलियों की मिलीभगत से ये सिक्के सीधे कालाबाजारी करने वालों के गोदाम तक पहुंचाए जा रहे थे। प्रशासन इस गंभीर पहलू पर भी जांच कर रहा है कि कहीं ये सिक्के नकली तो नहीं और किसी अवैध टकसाल में तो नहीं ढाले जा रहे थे। इन्हें दिल्ली और अन्य बाजारों में खपाने की तैयारी थी तो नहीं थी। देश में सिक्कों की कालाबाजारी, अवैध तस्करी और उनके धातु मूल्य के अवैध व्यापार पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (सीईआईबी) और राज्य की खुफिया शाखाएं कड़ी नजर रखती हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर एक दशक तक इस तरह का अवैध कारोबार चलना सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की बड़ी चूक को उजागर करता है।
कचरी-नमकीन कारोबारियों से मिलते हैं सिक्के
हाथरस कचरी, पोला और नमकीन के निर्माण का बड़ा केंद्र है। यहां से तैयार माल उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों में भी सप्लाई होता है। चूंकि इन उत्पादों की रिटेल बिक्री पांच और 10 रुपये के सिक्कों में ज्यादा होती है इसलिए बाहर के व्यापारी हाथरस के उद्यमियों को भुगतान में सिक्कों की बड़ी खेप थमा देते हैं। इन सिक्कों को बैंकों में जमा न करा पाने की मजबूरी का फायदा उठाने के लिए कालाबाजारी करने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं और तौल के हिसाब से या कमीशन काटकर सिक्कों को इकट्ठा कर लेते हैं।