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Hathras News: सांस की समस्या ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
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सर्दी के कारण सांस के रोगियों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। बागला जिला अस्पताल में इन दिनों सांस और दमा के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। मंगलवार को यहां 1586 मरीज परामर्श के लिए पहुंचे, इनमें से 252 मरीज सांस संबंधी रहे।
सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि अत्यधिक ठंड के कारण फेफड़ों की सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे फेफड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति को ''ब्रोंकोस्पैजम'' कहा जाता है। इसी कारण से मरीजों को सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और लगातार खांसी रहती है।
इमरजेंसी में आठ मरीज हुए भर्ती
बागला जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार की रात को मरीजों का आना जाना लगा रहा। इमरजेंसी स्टॉफ के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही। रात भर में सांस फूलने की गंभीर शिकायत के साथ आठ नए मरीज भर्ती किए गए। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक के अनुसार सभी 50 वर्ष से अधिक आयु के मरीज थे। प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन सपोर्ट देने के बावजूद दो मरीजों की हालत नाजुक बनी रही, उन्हें रेफर किया गया।
लापरवाही हो सकती है खतरनाक : डॉ. वरुण
बागला जिला अस्पताल के फिजिशियन डाॅ. वरुण चौधरी ने बताया कि भले ही तापमान कुछ बढ़ गया हो, लेकिन लापरवाही खतरनाक हो सकती है। सीओपीडी से ग्रसित मरीजों के लिए खतरा अधिक है। 45-50 वर्ष से ऊपर के लोगों को ठंड से बचना चाहिए। गुनगुना पानी पीएं, जिससे गले और श्वसन तंत्र को नमी मिलेगी। दमा के रोगी अपना इन्हेलर और दवाइयां हमेशा साथ रखें। डॉक्टर के संपर्क में रहें। सर्दी में सुबह की सैर से बचें।
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सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि अत्यधिक ठंड के कारण फेफड़ों की सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे फेफड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति को ''ब्रोंकोस्पैजम'' कहा जाता है। इसी कारण से मरीजों को सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और लगातार खांसी रहती है।
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इमरजेंसी में आठ मरीज हुए भर्ती
बागला जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार की रात को मरीजों का आना जाना लगा रहा। इमरजेंसी स्टॉफ के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही। रात भर में सांस फूलने की गंभीर शिकायत के साथ आठ नए मरीज भर्ती किए गए। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक के अनुसार सभी 50 वर्ष से अधिक आयु के मरीज थे। प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन सपोर्ट देने के बावजूद दो मरीजों की हालत नाजुक बनी रही, उन्हें रेफर किया गया।
लापरवाही हो सकती है खतरनाक : डॉ. वरुण
बागला जिला अस्पताल के फिजिशियन डाॅ. वरुण चौधरी ने बताया कि भले ही तापमान कुछ बढ़ गया हो, लेकिन लापरवाही खतरनाक हो सकती है। सीओपीडी से ग्रसित मरीजों के लिए खतरा अधिक है। 45-50 वर्ष से ऊपर के लोगों को ठंड से बचना चाहिए। गुनगुना पानी पीएं, जिससे गले और श्वसन तंत्र को नमी मिलेगी। दमा के रोगी अपना इन्हेलर और दवाइयां हमेशा साथ रखें। डॉक्टर के संपर्क में रहें। सर्दी में सुबह की सैर से बचें।
