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Hathras News: एमए, बीएड और टैट पास महिलाएं परिचालक बनने की कतार में लगीं
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एमए, बीएड और टैट पास महिलाएं रोडवेज बसों में परिचालक बनने की कतार में लगीं हैं। मंगलवार को हाथरस डिपो की ओर से बस स्टैंड पर महिलाओं के लिए संविदा परिचालक के पदों पर आवेदन लिए गए तो उच्च शिक्षित महिलाओं की कतार लग गई।
इस विशेष शिविर में करीब 25 महिलाएं आवेदन करने के लिए पहुंचीं, जिनमें से 17 महिलाएं पात्र पाईं गईं। उन्होंने औपचारिक रूप से अपने आवेदन जमा किए। शेष महिलाओं के आवेदन शैक्षिक अथवा अन्य आवश्यक मानकों के अनुरूप न होने के कारण स्वीकार नहीं किए जा सके।
डिपो प्रभारी मंगेश कुमार ने बताया कि सभी पात्र आवेदनों को संबंधित उच्चाधिकारियों के पास अग्रसारित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आवेदन करने के लिए पहुंची महिलाओं की शैक्षिक योग्यता काफी विविध रही। इनमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट पास के साथ-साथ स्नातक, एमए, बीएड और टैट उत्तीर्ण महिलाएं भी शामिल रहीं।
आवेदन करने आई महिलाओं का कहना था कि संविदा परिचालक का पद न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिलेगा। उन्होंने हर प्रकार की चुनौती को स्वीकार करने की बात भी कही।
यह हैं संविदा परिचालक का मानदेय
-संविदा परिचालक को 2.2 रुपये प्रति किमी का भत्ता मिलता है।
-पांच हजार किमी व 22 दिन की उपस्थिति पर 3000 रुपये अतिरिक्त।
-दो साल तक मानक पूरे करने पर तीन की जगह सात हजार अतिरिक्त।
वर्तमान में हैं 10 महिला परिचालक
हाथरस डिपो में पहले से ही 10 महिला परिचालक तैनात हैं। इसमें तीन महिला परिचालक नियमित हैं, जो कि मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त की गई हैं। वहीं सात महिला परिचालक पूर्व में चयनित होकर आईं हैं, जो नियमित ड्यूटी कर रहीं हैं।
मैंने एमए, बीएड, ट्रिपल सी के साथ टैट भी पास किया है, फिलहाल शिक्षा विभाग से कोई नौकरी नहीं निकली है। निजी स्कूलों में वेतन बहुत कम है। इसीलिए परिचालक का आवेदन कर रही हूं। काम करने में कोई दिक्कत नहीं है।
-सुशीला, निवासी हतीसा, हाथरस।
मैंने बीए के साथ ट्रिपल-सी किया है। अब माहौल काफी बदल गया है, असुरक्षा जैसी स्थिति बहुत कम है। हम सभी को अपनी सोच को सकारात्मक रखना होगा। अब महिलाएं हर जगह काम कर सकतीं हैं।
-बबली, निवासी नगला टोंटा हाथरस।
मैं बीए कर रही हूं और मेरे पास कंप्यूटर में एक साल का डिप्लोमा है। आज के समय में कोई भी काम मिलना आसान नहीं है, इसलिए ज्यादा सोचना बेकार है। काम को काम की तरह करें तो सफलता अवश्य मिलेगी।
-अंजलि निवासी भगवंतपुर, हाथरस।
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इस विशेष शिविर में करीब 25 महिलाएं आवेदन करने के लिए पहुंचीं, जिनमें से 17 महिलाएं पात्र पाईं गईं। उन्होंने औपचारिक रूप से अपने आवेदन जमा किए। शेष महिलाओं के आवेदन शैक्षिक अथवा अन्य आवश्यक मानकों के अनुरूप न होने के कारण स्वीकार नहीं किए जा सके।
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डिपो प्रभारी मंगेश कुमार ने बताया कि सभी पात्र आवेदनों को संबंधित उच्चाधिकारियों के पास अग्रसारित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आवेदन करने के लिए पहुंची महिलाओं की शैक्षिक योग्यता काफी विविध रही। इनमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट पास के साथ-साथ स्नातक, एमए, बीएड और टैट उत्तीर्ण महिलाएं भी शामिल रहीं।
आवेदन करने आई महिलाओं का कहना था कि संविदा परिचालक का पद न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिलेगा। उन्होंने हर प्रकार की चुनौती को स्वीकार करने की बात भी कही।
यह हैं संविदा परिचालक का मानदेय
-संविदा परिचालक को 2.2 रुपये प्रति किमी का भत्ता मिलता है।
-पांच हजार किमी व 22 दिन की उपस्थिति पर 3000 रुपये अतिरिक्त।
-दो साल तक मानक पूरे करने पर तीन की जगह सात हजार अतिरिक्त।
वर्तमान में हैं 10 महिला परिचालक
हाथरस डिपो में पहले से ही 10 महिला परिचालक तैनात हैं। इसमें तीन महिला परिचालक नियमित हैं, जो कि मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त की गई हैं। वहीं सात महिला परिचालक पूर्व में चयनित होकर आईं हैं, जो नियमित ड्यूटी कर रहीं हैं।
मैंने एमए, बीएड, ट्रिपल सी के साथ टैट भी पास किया है, फिलहाल शिक्षा विभाग से कोई नौकरी नहीं निकली है। निजी स्कूलों में वेतन बहुत कम है। इसीलिए परिचालक का आवेदन कर रही हूं। काम करने में कोई दिक्कत नहीं है।
-सुशीला, निवासी हतीसा, हाथरस।
मैंने बीए के साथ ट्रिपल-सी किया है। अब माहौल काफी बदल गया है, असुरक्षा जैसी स्थिति बहुत कम है। हम सभी को अपनी सोच को सकारात्मक रखना होगा। अब महिलाएं हर जगह काम कर सकतीं हैं।
-बबली, निवासी नगला टोंटा हाथरस।
मैं बीए कर रही हूं और मेरे पास कंप्यूटर में एक साल का डिप्लोमा है। आज के समय में कोई भी काम मिलना आसान नहीं है, इसलिए ज्यादा सोचना बेकार है। काम को काम की तरह करें तो सफलता अवश्य मिलेगी।
-अंजलि निवासी भगवंतपुर, हाथरस।
