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TB Hospital: चार साल में एक भी गंभीर मरीज नहीं हुआ भर्ती, बनकर रह गया परामर्श केंद्र, केवल एक डॉक्टर की तैनाती

अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 09 Feb 2026 03:25 PM IST
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सार

अस्पताल की ओपीडी का हाल बुरा है। रोजाना करीब 150 मरीज अपना उपचार कराने यहां पहुंचते हैं। उन्हें परामर्श देने के लिए सिर्फ एक चिकित्सक तैनात हैं। अस्पताल में सबसे महत्वपूर्ण चेस्ट फिजिशियन का पद पिछले सात वर्षों से खाली पड़ा है।

condition of Hathras TB hospital
हाथरस का टीबी अस्पताल - फोटो : संवाद
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विस्तार

हाथरस जिले में इन दिनों 6,124 टीबी मरीज हैं, जिनका उपचार हो रहा है। इन मरीजों को भर्ती कर उपचार देने के लिए बना टीबी अस्पताल स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। यहां बीते चार वर्ष से एक भी टीबी मरीज को भर्ती नहीं किया गया है।

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जब भी कोई मरीज गंभीर अवस्था में यहां पहुंचता है तो उसे बागला जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। केंद्र सरकार टीबी मुक्त भारत का संकल्प पूरा करने पर जोर लगा रही है, लेकिन टीबी अस्पताल महज एक परामर्श केंद्र बनाकर रह गया है। जो मरीज प्रारंभिक देखभाल के बाद ठीक हो सकते हैं, वे भर्ती न होने के कारण गंभीर अवस्था में पहुंच रहे हैं।

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टीबी अस्पताल में डे-केयर की सुविधा है। स्टॉफ के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इमरजेंसी में आने वाले टीबी मरीजों के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करने की सुविधा है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भेजा जाता है।-डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल एवं टीबी अस्पताल।

जिले में 6124 टीबी मरीज
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। इसमें जिले में 6124 टीबी मरीज मिले हैं। जिला क्षय रोग केंद्र इस अभियान में मंडल में प्रथम व प्रदेश में तीसरे नंबर पर है। सात दिसंबर 2024 से चल रहे इस अभियान में 4,21,408 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 1,61,718 की एक्स-रे व 69,603 की बलगम की जांच की गई। इस स्क्रीनिंग में विभाग को 6,124 टीबी मरीज मिले। टीबी हेल्थ विजिटर्स के जरिये इन मरीजों का उपचार शुरू किया गया।

न चेस्ट फिजिशियन, न ही नर्स
अस्पताल की ओपीडी का हाल बुरा है। रोजाना करीब 150 मरीज अपना उपचार कराने यहां पहुंचते हैं। उन्हें परामर्श देने के लिए सिर्फ एक चिकित्सक तैनात हैं। अस्पताल में सबसे महत्वपूर्ण चेस्ट फिजिशियन का पद पिछले सात वर्षों से खाली पड़ा है। रही-सही कसर स्टाफ की कमी ने पूरी कर दी है। पूरे अस्पताल में चार में से एक भी नर्स तैनात नहीं है।

रोजाना होती हैं 40 से 50 जांचें
यहां रोजाना 40 से 50 जांचें की जा रही हैं, लेकिन जब बात गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार करने की आती है, तो अस्पताल प्रबंधन हाथ खड़े कर देता है। विशेषज्ञ चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ के अभाव में मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है।

अस्पताल एक नजर में

  • क्षमता : 30 बेड
  • मरीज : साल भर में 6124 नए मरीज मिले।
  • स्टाफ : चेस्ट फिजिशियन और नर्सों का अभाव।
  • कार्य : रोजाना 150 की ओपीडी और 50 टेस्ट हो रहे।
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