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Groundwater level: यूपी के 12 जिलों में गहराया संकट, हाथरस में भूजल का स्तर 28 मीटर पर पहुंचा

अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 09 Feb 2026 01:59 PM IST
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सार

मानसून से पूर्व और बाद के भूजल स्तर की तुलना करने पर हाथरस जिले के कुछ ब्लॉकों में स्थिति चिंताजनक है। सादाबाद ब्लॉक में भूजल स्तर जिले में सबसे ज्यादा गहराई 28 मीटर पर पहुंच गया है। प्रदेश के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में हाथरस, आगरा, गाजियाबाद, अमरोहा, फिरोजाबाद, नोएडा, हापुड़, संभल, शामली, सहारनपुर, बुलंदशहर और लखनऊ शामिल हैं।

Groundwater level in Hathras
घर के बाहर नल से बहता पानी - फोटो : संवाद
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विस्तार

हाथरस जिले में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। यह गंभीर संकट भविष्य के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। जिले के सात ब्लॉकों में से तीन को अतिदोहित यानी डार्क जोन की श्रेणी में रखा गया है। प्रदेश में भूजल संचयन एवं रिचार्ज के लिए 12 जनपदों का चयन किया गया है, जहां भूजल स्तर काफी नीचे हो गया है। इनमें हाथरस भी शामिल है।

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जिले में बीते पांच वर्षों (2020-2024) के दौरान भूजल स्तर में लगातार गिरावट हुई है। आंकड़ों के अनुसार मानसून से पूर्व और बाद के भूजल स्तर की तुलना करने पर हाथरस जिले के कुछ ब्लॉकों में स्थिति चिंताजनक है। सादाबाद ब्लॉक में भूजल स्तर जिले में सबसे ज्यादा गहराई 28 मीटर पर पहुंच गया है। प्रदेश के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में हाथरस, आगरा, गाजियाबाद, अमरोहा, फिरोजाबाद, नोएडा, हापुड़, संभल, शामली, सहारनपुर, बुलंदशहर और लखनऊ शामिल हैं।

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अतिदोहन के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। इसको सुधारने के लिए शासन ने जल संचयन जन-भागीदारी 2.0 अभियान शुरू किया है, जिसमें 13 विभाग एक साथ काम कर रहे हैं। जिले में जल संचयन के 5,153 के सापेक्ष 395 कार्य पूर्ण हुए हैं। सभी विभागों को काम जल्द पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने सहित अन्य काम शामिल हैं।-पीएन दीक्षित, सीडीओ।

ब्लॉकवार भूजल स्तर की स्थिति

  • सादाबाद में संकट गहराया : आंकड़ों के मुताबिक सादाबाद ब्लॉक में जल स्तर सबसे नीचे चला गया है। साल 2024 के मानसून से पूर्व यहां जल स्तर 28.16 मीटर तक गिर गया था। यह पूरे जिले में किसी भी ब्लॉक का सबसे निचला स्तर है।
  • हसायन में सबसे बेहतर स्थिति : हसायन ब्लॉक में जलस्तर अन्य ब्लॉकों की तुलना में काफी बेहतर है। यहां साल 2021 में मानसून के बाद जलस्तर 4.84 मीटर तक हो गया था। अब यह चार मीटर गिर कर वर्ष 2024 में 8.18 मीटर पर पहुंच गया है।
  • मुरसान और सासनी की स्थिति : मुरसान में पिछले पांच साल से भूजल स्तर 18 से 22 मीटर के बीच है। वहीं सासनी में वर्ष 2022 के दौरान भूजल स्तर गिरकर 22.19 मीटर तक पहुंच गया था। इसमें वर्ष 2024 में थोड़ा सुधार हुआ, यह 20.75 मीटर तक पहुंचा गया है।
  • सिकंदराराऊ और हाथरस ब्लॉक : सिकंदराराऊ में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, जहां भूजल स्तर औसतन 8 से 12 मीटर के बीच रहता है। हाथरस ब्लॉक में वर्ष 2020 में भूजल स्तर 10.81 मीटर से गिरकर 2024 में 14.49 मीटर पर आ गया है।


डार्क जोन में शामिल ब्लॉक (अतिदोहित श्रेणी)

  • तीन ब्लॉकों में 100 प्रतिशत से अधिक पानी निकाला जा रहा है
  • मुरसान : इसे वर्ष 2012 में अतिदोहित घोषित किया गया था।
  • सासनी : यह ब्लॉक वर्ष 2004 से ही डार्क जोन की श्रेणी में है।
  • सहपऊ : इसे वर्ष 2018 में गंभीर श्रेणी में शामिल किया गया।


ब्लॉकों की स्थिति

  • हाथरस : इसे क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है, यहां 90 से 100 फीसदी तक भूजल का दोहन हो रहा है।
  • सादाबाद और सिकंदराराऊ : ये दोनों ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में हैं। यहां 70 से 90 फीसदी तक दोहन हो रहा है।
  • हसायन : यह जिले का एकमात्र सुरक्षित ब्लॉक है, यहां 60 फीसदी से कम दोहन है।

मानसून का प्रभाव
आंकड़ों से स्पष्ट है कि मानसून के बाद भूजल स्तर में सुधार तो होता है, लेकिन कई ब्लॉकों में यह सुधार उम्मीद के मुताबिक नहीं है। सहपऊ जैसे ब्लॉकों में मानसून के बाद भूजल स्तर में एक से दो मीटर का सुधार देखा गया है।

इन 13 विभागों की है जिम्मेदारी
लघु सिंचाई, भूमि संरक्षण, पंचायती राज विभाग, ग्राम्य विकास, मत्स्य विभाग, वन विभाग, जल निगम शहरी व ग्रामीण, फोर्स ट्रस्ट, स्वास्थ्य विभाग, जिला क्रीड़ा विभाग, जिला कार्यक्रम विभाग, नगर पालिका व संबंधित नगर पंचायत।

5153 में से केवल 395 काम हुए पूरे
भूजल संकट से निपटने के लिए जनपद में जल संचयन जन-भागीदारी-2.0 अभियान चलाया जा रहा है। पोर्टल पर फीड किए गए इसके आंकड़ों में सुस्ती साफ दिखाई दे रही है। जिले में विभिन्न विभागों को 5153 कामों का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष अब तक 395 काम ही पूर्ण हो सके हैं।

मानसून से पहले -- बाद -- पहले -- बाद -- पहले -- बाद -- पहले -- बाद -- पहले -- बाद
2020 -- 2020-- 2021--2021-- 2022 -- 2022-- 2023-- 2023-- 2024-- 2024
मुरसान-- 19.88--19.35-- 20.00-- 18.95-- 20.08--19.05-- 18.48--17.82-- 22.22--19.38
सासनी--19.83-- 20.46-- 20.67-- 21.06-- 21.27-- 22.19-- 20.52-- 20.21--20.95--20.75
सहपऊ-- 20.61-- 20.62-- 21.09-- 20.50--21.59-- 19.93 --18.30 --17.23-- 18.36 --17.46
हाथरस--10.81--12.45 -- 12.57--12.37-- 14.23-- 13.85--16.35-- 13.51--14.88-- 14.49
सादाबाद -- 25.93 -- 25.65--26.88-- 26.76--27.39--27.02-- 25.85--27.58--28.16-- 27.49
सिकंदराराऊ-- 10.21--9.91--9.87-- 9.64-- 12.61--12.36-- 8.86--9.47--8.89--8.29
हसायन -- 5.68-- 5.49-- 5.26 --4.84 --9.32-- 8.64 --8.75 --4.70-- 8.62 --8.18
नोट : भूजल का स्तर मीटर में।
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