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Hathras News: सिलिंडर की किल्लत, चूल्हे की आग पर पक रहा मध्याह्न भोजन
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 22 Apr 2026 02:25 AM IST
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प्राथमिक विद्यालय गिजरौली में चूल्हे पर खाना बनाती रसोइया। संवाद
- फोटो : Samvad
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राघवेंद्र प्रताप सिंह
हाथरस। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे-मील) वर्तमान में गंभीर संकट से गुजर रही है। सरकारी दावों के विपरीत सिलिंडरों की कमी के कारण स्कूलों की रसोई ठंडी पड़ने के कगार पर है। रसोइयों के साथ-साथ शिक्षकों को भी लकड़ियों का जुगाड़ करके चूल्हे पर खाना पकाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
स्कूलों में तैनात प्रधानाध्यापकों का दर्द है कि वे रोज अपनी जिम्मेदारियां छोड़कर गैस एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार स्टॉक नहीं है का हवाला देकर उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। शिक्षक ने बताया एक तरफ हम पर पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों का दबाव है तो दूसरी तरफ बच्चों को भूखा न रखने के लिए चूल्हा सुलगाना पड़ रहा है, जिसके धुएं शिक्षकों के साथ स्कूल परिसर में पढ़ने वाले बच्चों की हालत खराब हो जाती है।
उज्ज्वला योजना के दौर में स्कूल फिर से पुराने दौर में लौट आए हैं। लकड़ियों के इंतजाम के लिए रसोइयों को न केवल कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है, बल्कि उनके समय की भी बर्बादी हो रही है। समय पर भोजन तैयार करने में भी दिक्कत हो रही है।
केस 1: प्राथमिक विद्यालय, गिजरौली
यहां 165 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 110 का भोजन प्रतिदिन तैयार होता है। विद्यालय के दोनों सिलिंडर पिछले एक महीने से खाली पड़े हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि कई बार गैस एजेंसी के चक्कर काटने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिला। विवश होकर रसोइया चूल्हे पर खाना बना रही है, जिसका धुआं सीधे कक्षाओं में जा रहा है और बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान हो रहा है।
केस 2: प्राथमिक विद्यालय, कलवारी
यहां इंदिरा गैस एजेंसी के सील होने के बाद कनेक्शन नमन गैस एजेंसी (बागला कॉलेज रोड) पर ट्रांसफर किया गया है। स्कूल में 70 में से औसतन 50 बच्चे उपस्थित रहते हैं। एक सिलिंडर खाली है और दूसरा खत्म होने के कगार पर है। एजेंसी पर कई चक्कर लगाने के बाद भी भरा सिलिंडर नहीं मिल सका है, जिससे आने वाले दिनों में खाना पकाने का संकट खड़ा होगा।
केस 3: पूर्व माध्यमिक विद्यालय, नयाबांस
यहां 125 बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था है। पिछले तीन-चार दिनों से शिक्षक गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। दोनों सिलिंडर खत्म होने के कारण पिछले दो दिनों से यहां लकड़ी के चूल्हे पर खाना पक रहा है। चूल्हे के धुएं से न तो शिक्षक ही बच्चों को पढ़ा पाते हैं और न हीं बच्चे पढ़ पा रहे हैं।
केस 4: संविलियन विद्यालय, गंगचौली
यहां पंजीकृत 256 में से लगभग 160 बच्चों के लिए खाना बनता है। शांति देवी गैस एजेंसी (लाड़पुर) पर भारी भीड़ और लंबी कतारों के कारण सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। एक सिलिंडर पहले ही खाली हो चुका है और दूसरा भी जल्द खत्म होने वाला है, जिससे भविष्य में मध्याह्न भोजन बंद होने या फिर चूल्हे खाना पकाने की नौबत आ सकती है।
शांति देवी गैस एजेंसी पर लंबी लाइन के कारण काफी परेशानी हो रही है। एक सिलिंडर खाली है और दूसरा भी खत्म होने वाला है, लेकिन बार-बार चक्कर लगाने पर भी भरा सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है।
-अश्विनी कुमार, प्रधानाध्यापक, संविलियन विद्यालय गंगचौली।
स्कूल में 125 बच्चों का खाना बनता है और महीने में दो सिलिंडरों की खपत है। अब दोनों ही खाली हैं। समझ नहीं आता कि स्कूल का काम देखें या सिलिंडर भरवाने के लिए धक्के खाएं।
-अमित पचौरी, इंचार्ज, पूर्व माध्यमिक विद्यालय नयाबांस।
बीएसए की तरफ से स्कूलों में गैस सिलिंडर मुहैया कराने के संबंध में पत्र संबंधित गैस कंपनियों के सेल्स ऑफिसर को दिलवा दिया गया है। फिलहाल गैस सिलिंडर की आपूर्ति ऊपर से ही कम हो रही है।
-ध्रुवराज यादव, जिला पूर्ति अधिकारी।
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स्कूलों में तैनात प्रधानाध्यापकों का दर्द है कि वे रोज अपनी जिम्मेदारियां छोड़कर गैस एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार स्टॉक नहीं है का हवाला देकर उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। शिक्षक ने बताया एक तरफ हम पर पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों का दबाव है तो दूसरी तरफ बच्चों को भूखा न रखने के लिए चूल्हा सुलगाना पड़ रहा है, जिसके धुएं शिक्षकों के साथ स्कूल परिसर में पढ़ने वाले बच्चों की हालत खराब हो जाती है।
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उज्ज्वला योजना के दौर में स्कूल फिर से पुराने दौर में लौट आए हैं। लकड़ियों के इंतजाम के लिए रसोइयों को न केवल कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है, बल्कि उनके समय की भी बर्बादी हो रही है। समय पर भोजन तैयार करने में भी दिक्कत हो रही है।
केस 1: प्राथमिक विद्यालय, गिजरौली
यहां 165 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 110 का भोजन प्रतिदिन तैयार होता है। विद्यालय के दोनों सिलिंडर पिछले एक महीने से खाली पड़े हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि कई बार गैस एजेंसी के चक्कर काटने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिला। विवश होकर रसोइया चूल्हे पर खाना बना रही है, जिसका धुआं सीधे कक्षाओं में जा रहा है और बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान हो रहा है।
केस 2: प्राथमिक विद्यालय, कलवारी
यहां इंदिरा गैस एजेंसी के सील होने के बाद कनेक्शन नमन गैस एजेंसी (बागला कॉलेज रोड) पर ट्रांसफर किया गया है। स्कूल में 70 में से औसतन 50 बच्चे उपस्थित रहते हैं। एक सिलिंडर खाली है और दूसरा खत्म होने के कगार पर है। एजेंसी पर कई चक्कर लगाने के बाद भी भरा सिलिंडर नहीं मिल सका है, जिससे आने वाले दिनों में खाना पकाने का संकट खड़ा होगा।
केस 3: पूर्व माध्यमिक विद्यालय, नयाबांस
यहां 125 बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था है। पिछले तीन-चार दिनों से शिक्षक गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। दोनों सिलिंडर खत्म होने के कारण पिछले दो दिनों से यहां लकड़ी के चूल्हे पर खाना पक रहा है। चूल्हे के धुएं से न तो शिक्षक ही बच्चों को पढ़ा पाते हैं और न हीं बच्चे पढ़ पा रहे हैं।
केस 4: संविलियन विद्यालय, गंगचौली
यहां पंजीकृत 256 में से लगभग 160 बच्चों के लिए खाना बनता है। शांति देवी गैस एजेंसी (लाड़पुर) पर भारी भीड़ और लंबी कतारों के कारण सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। एक सिलिंडर पहले ही खाली हो चुका है और दूसरा भी जल्द खत्म होने वाला है, जिससे भविष्य में मध्याह्न भोजन बंद होने या फिर चूल्हे खाना पकाने की नौबत आ सकती है।
शांति देवी गैस एजेंसी पर लंबी लाइन के कारण काफी परेशानी हो रही है। एक सिलिंडर खाली है और दूसरा भी खत्म होने वाला है, लेकिन बार-बार चक्कर लगाने पर भी भरा सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है।
-अश्विनी कुमार, प्रधानाध्यापक, संविलियन विद्यालय गंगचौली।
स्कूल में 125 बच्चों का खाना बनता है और महीने में दो सिलिंडरों की खपत है। अब दोनों ही खाली हैं। समझ नहीं आता कि स्कूल का काम देखें या सिलिंडर भरवाने के लिए धक्के खाएं।
-अमित पचौरी, इंचार्ज, पूर्व माध्यमिक विद्यालय नयाबांस।
बीएसए की तरफ से स्कूलों में गैस सिलिंडर मुहैया कराने के संबंध में पत्र संबंधित गैस कंपनियों के सेल्स ऑफिसर को दिलवा दिया गया है। फिलहाल गैस सिलिंडर की आपूर्ति ऊपर से ही कम हो रही है।
-ध्रुवराज यादव, जिला पूर्ति अधिकारी।

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