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Hathras News: कुल्फी बनाकर ससुराल के कारोबार को बढ़ाया
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गांव नदौना नगला लच्छी निवासी सावित्री।
- फोटो : Self
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जनपद के गांव नदौना नगला लच्छी की सावित्री ने संघर्ष और मेहनत के दम पर न सिर्फ अपनी ससुराल के पैतृक कारोबार को जीवित रखा, बल्कि उसे आगे बढ़ा कर विस्तार भी दिया है। आत्मनिर्भर बनी सावित्री दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
वह स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वास्थ्य सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। परिवार पर आए संकट के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय जिम्मेदारी उठाई और अपने ससुर के देहांत के बाद पारंपरिक कुल्फी बनाने के व्यवसाय को फिर से शुरू किया। आर्थिक तंगी के बीच स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सीआईएफ यानी कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड से मदद मिली।
इस सहयोग के बल पर उन्होंने छोटे स्तर पर कुल्फी बनाने की इकाई शुरू की। शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू कर धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। बीते तीन वर्षों में उन्होंने शून्य से सफर तय करते हुए आज अपनी पहचान बना ली है। वर्तमान में वह चार अलग-अलग इकाइयों को कुल्फी की आपूर्ति कर रही हैं। जिससे करीब 12 अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
स्वत: रोजगार के उपायुक्त प्रेमनाथ यादव ने बताया कि सावित्री की यह सफलता महिलाओं के सशक्तीकरण का बड़ा उदाहरण है। यदि सही दिशा और थोड़ी आर्थिक सहायता मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
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वह स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वास्थ्य सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। परिवार पर आए संकट के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय जिम्मेदारी उठाई और अपने ससुर के देहांत के बाद पारंपरिक कुल्फी बनाने के व्यवसाय को फिर से शुरू किया। आर्थिक तंगी के बीच स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सीआईएफ यानी कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड से मदद मिली।
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इस सहयोग के बल पर उन्होंने छोटे स्तर पर कुल्फी बनाने की इकाई शुरू की। शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू कर धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। बीते तीन वर्षों में उन्होंने शून्य से सफर तय करते हुए आज अपनी पहचान बना ली है। वर्तमान में वह चार अलग-अलग इकाइयों को कुल्फी की आपूर्ति कर रही हैं। जिससे करीब 12 अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
स्वत: रोजगार के उपायुक्त प्रेमनाथ यादव ने बताया कि सावित्री की यह सफलता महिलाओं के सशक्तीकरण का बड़ा उदाहरण है। यदि सही दिशा और थोड़ी आर्थिक सहायता मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

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