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Hathras News: हाथरस बनेगा नया महानगर, विकास प्राधिकरण गठन का रास्ता साफ
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 19 Jun 2026 02:40 AM IST
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लाल घेरे में बना प्रस्तावित विकास प्राधिकरण का नक्शा। स्रोत : प्रशासन
- फोटो : Samvad
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हाथरस को अब एक नए और सुनियोजित महानगर का रूप देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। शासन के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (संभागीय नियोजन खंड आगरा) ने हाथरस विकास प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। हाथरस के अलावा सादाबाद, सासनी और सिकंदराराऊ के नगरीय व 370 गांवों को मिलाकर नया प्राधिकरण आकार लेगा।
राज्य सरकार के मानकों की परीक्षा में हाथरस नगरीय क्षेत्र ने 100 में से रिकॉर्ड 75 अंक हासिल किए हैं, जबकि प्राधिकरण गठन के लिए न्यूनतम आवश्यकता महज 60 अंकों की होती है। मानक पूरा होने के बाद हाथरस, सादाबाद और सासनी समेत पूरे जिले के कायाकल्प का रास्ता साफ हो गया है। इस पूरे क्षेत्र को मिलाकर वर्ष 2021 की अनुमानित आबादी करीब 4,42,024 तक पहुंच चुकी है, जिसे ध्यान में रखकर भविष्य के लिए बुनियादी सुविधाओं का खाका तैयार होगा।
वर्तमान में हाथरस के विकास को नियंत्रित करने का जिम्मा हाथरस विनियमित क्षेत्र के तहत उपजिलाधिकारी (नियत प्राधिकारी) और मात्र एक अवर अभियंता पर है। राजस्व और कानून व्यवस्था की व्यस्तता के कारण एसडीएम इस ओर पूरा समय नहीं दे पाते हैं।
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वर्तमान में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ और वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण शहर में अनियोजित कॉलोनियों की बसावट की न तो पर्याप्त निगरानी हो पा रही है और न हीं इन पर लगाम लग पा रही है। इसी तरह सादाबाद और सासनी जैसे तेजी से बढ़ रहे रणनीतिक नगरों में भी तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है। इस बेलगाम और अनियोजित विकास को रोककर हाथरस महायोजना-2031 को कड़ाई से लागू करने के लिए ही प्राधिकरण का गठन किया जा रहा है।
प्राधिकरण का विशाल भौगोलिक दायरा
02 नगर पालिका परिषद : हाथरस एवं सिकंदराराऊ।
07 नगर पंचायत : सादाबाद, सासनी, मुरसान, मेंडू, हसायन, सहपऊ और पुरदिलनगर।
370 राजस्व ग्राम : इन सभी शहरी निकायों के आसपास के करीब 370 गांवों की जमीनों को भी इस विकास क्षेत्र के दायरे में शामिल किया गया है।
रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं सादाबाद और सासनी
आगरा-अलीगढ़ का नया ग्रोथ सेंटर (सासनी) : राष्ट्रीय राजमार्ग 34 पर स्थित सासनी की स्थिति बेहद रणनीतिक है। आगरा महायोजना और अलीगढ़-आगरा विकास कॉरिडोर के नजदीक होने के कारण यहां शहरीकरण की रफ्तार सबसे तेज है। वर्ष 2026 में इसकी आबादी 16,500 के पार होने का अनुमान है ।
आलू बेल्ट और कोल्ड स्टोरेज का हब (सादाबाद) : आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर स्थित सादाबाद एक्सप्रेस गति से बढ़ रहा है। इसके बाईपास और पुराने मार्गों पर व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से फैली हैं। यह क्षेत्र आलू उत्पादन के लिए मशहूर है, जिसके चलते यहां कई बड़े शीतगृह मौजूद हैं। सादाबाद और सिकंदराराऊ को केंद्र की अमृत 2.0 योजना के तहत भी महायोजना संरचना के लिए चुना गया है।
ये होंगे फायदे
सुनियोजित कॉलोनियां : अवैध और संकरी गलियों वाली कॉलोनियों पर रोक लगेगी। चौड़ी सड़कें, पार्क और व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम मिलेगा। बेहतर नागरिक सुविधाएं : स्टेडियम, क्रीड़ा स्थल, आधुनिक पुस्तकालय और मल्टीप्लेक्स जैसे मनोरंजन साधनों के विकास को रफ्तार मिलेगी ।
उद्योग और रोजगार को बढ़ावा :
हींग और रेडीमेड वस्त्र जैसे स्थानीय कुटीर उद्योगों को व्यवस्थित औद्योगिक क्षेत्र और बेहतर बुनियादी ढांचा मिलेगा।
विकास प्राधिकरण के लिए शासन की मंशानुरूप डेटा मांगा गया था। सादाबाद, सासनी, हाथरस और सिकंदराराऊ के क्षेत्रों को शामिल कर विकास प्राधिकरण का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेज दिया गया है।
-अतुल वत्स, जिलाधिकारी, हाथरस
राज्य सरकार के मानकों की परीक्षा में हाथरस नगरीय क्षेत्र ने 100 में से रिकॉर्ड 75 अंक हासिल किए हैं, जबकि प्राधिकरण गठन के लिए न्यूनतम आवश्यकता महज 60 अंकों की होती है। मानक पूरा होने के बाद हाथरस, सादाबाद और सासनी समेत पूरे जिले के कायाकल्प का रास्ता साफ हो गया है। इस पूरे क्षेत्र को मिलाकर वर्ष 2021 की अनुमानित आबादी करीब 4,42,024 तक पहुंच चुकी है, जिसे ध्यान में रखकर भविष्य के लिए बुनियादी सुविधाओं का खाका तैयार होगा।
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वर्तमान में हाथरस के विकास को नियंत्रित करने का जिम्मा हाथरस विनियमित क्षेत्र के तहत उपजिलाधिकारी (नियत प्राधिकारी) और मात्र एक अवर अभियंता पर है। राजस्व और कानून व्यवस्था की व्यस्तता के कारण एसडीएम इस ओर पूरा समय नहीं दे पाते हैं।
वर्तमान में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ और वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण शहर में अनियोजित कॉलोनियों की बसावट की न तो पर्याप्त निगरानी हो पा रही है और न हीं इन पर लगाम लग पा रही है। इसी तरह सादाबाद और सासनी जैसे तेजी से बढ़ रहे रणनीतिक नगरों में भी तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है। इस बेलगाम और अनियोजित विकास को रोककर हाथरस महायोजना-2031 को कड़ाई से लागू करने के लिए ही प्राधिकरण का गठन किया जा रहा है।
प्राधिकरण का विशाल भौगोलिक दायरा
02 नगर पालिका परिषद : हाथरस एवं सिकंदराराऊ।
07 नगर पंचायत : सादाबाद, सासनी, मुरसान, मेंडू, हसायन, सहपऊ और पुरदिलनगर।
370 राजस्व ग्राम : इन सभी शहरी निकायों के आसपास के करीब 370 गांवों की जमीनों को भी इस विकास क्षेत्र के दायरे में शामिल किया गया है।
रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं सादाबाद और सासनी
आगरा-अलीगढ़ का नया ग्रोथ सेंटर (सासनी) : राष्ट्रीय राजमार्ग 34 पर स्थित सासनी की स्थिति बेहद रणनीतिक है। आगरा महायोजना और अलीगढ़-आगरा विकास कॉरिडोर के नजदीक होने के कारण यहां शहरीकरण की रफ्तार सबसे तेज है। वर्ष 2026 में इसकी आबादी 16,500 के पार होने का अनुमान है ।
आलू बेल्ट और कोल्ड स्टोरेज का हब (सादाबाद) : आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर स्थित सादाबाद एक्सप्रेस गति से बढ़ रहा है। इसके बाईपास और पुराने मार्गों पर व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से फैली हैं। यह क्षेत्र आलू उत्पादन के लिए मशहूर है, जिसके चलते यहां कई बड़े शीतगृह मौजूद हैं। सादाबाद और सिकंदराराऊ को केंद्र की अमृत 2.0 योजना के तहत भी महायोजना संरचना के लिए चुना गया है।
ये होंगे फायदे
सुनियोजित कॉलोनियां : अवैध और संकरी गलियों वाली कॉलोनियों पर रोक लगेगी। चौड़ी सड़कें, पार्क और व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम मिलेगा। बेहतर नागरिक सुविधाएं : स्टेडियम, क्रीड़ा स्थल, आधुनिक पुस्तकालय और मल्टीप्लेक्स जैसे मनोरंजन साधनों के विकास को रफ्तार मिलेगी ।
उद्योग और रोजगार को बढ़ावा :
हींग और रेडीमेड वस्त्र जैसे स्थानीय कुटीर उद्योगों को व्यवस्थित औद्योगिक क्षेत्र और बेहतर बुनियादी ढांचा मिलेगा।
विकास प्राधिकरण के लिए शासन की मंशानुरूप डेटा मांगा गया था। सादाबाद, सासनी, हाथरस और सिकंदराराऊ के क्षेत्रों को शामिल कर विकास प्राधिकरण का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेज दिया गया है।
-अतुल वत्स, जिलाधिकारी, हाथरस