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Hathras News: न खांसी आई, न बलगम.. फिर भी 31 फीसदी लोग टीबी के मरीज
Tue, 04 Aug 2026 02:07 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 04 Aug 2026 02:07 AM IST
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जिला क्षय रोग केंद्र। संवाद
- फोटो : Samvad
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न सांस लेने में दिक्कत, न खांसी और न ही बलगम की समस्या, फिर भी जांच में टीबी निकली। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चले अभियान में जब मरीजों की जांच की गई तो इनके अंग टीबी से प्रभावित पाए गए। 100 दिवसीय अभियान में 213 शिविर लगे, जिनमें एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के 555 मरीज मिले।
इनमें कोई लगातार हलके बुखार व वजन गिरने से परेशान था तो किसी के गर्दन व बगल में गांठ थी। किसी की आंतों में दिक्कत तो किसी को पीठ दर्द व जोड़ों में दर्द था। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 24 मार्च से चले अभियान में संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाली आबादी में 22,907 लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
संशय वाले 16,358 मरीजों के चेस्ट एक्स-रे परीक्षण किया। 7,158 संदिग्ध लोगों की सीबी नॉट व अन्य तकनीक से विस्तृत जांच की गई, जिसमें कुल 1,810 टीबी मरीज मिले। इनमें 555 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के रहे। पिछले एक वर्ष में 62 सौ टीबी के मरीज सामने आए हैं, जिनमें 1689 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी के रहे।
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ये हैं जांच के तरीके
फ्लूयड संबंधी टीबी के लिए सीबी नॉट, फेफड़े के लिए एक्स-रे, गांठ के लिए बायोप्सी और एफएनएसी, एएफबी कल्चर, पेट व जननांग के लिए अल्ट्रासाउंड, पेट के अंदरूनी हिस्से, मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी के लिए सीटी स्कैन व एमआरआई व त्वचा के लिए मंटौक्स टेस्ट और खून के जरिये शरीर में टीबी के बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए आईजीआरए ब्लड टेस्ट किया जाता है।
क्या है एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी
आम तौर पर टीबी फेफड़ों में होती है जिसे पल्मोनरी टीबी कहा जाता है, लेकिन जब माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया खून या लसीका प्रणाली के जरिये फेफड़ों के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंच जाते हैं, तो उसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं।
अंगों के अनुसार टीबी के प्रकार
-लिम्फ नोड टीबी : यह सबसे आम प्रकार की एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी है। इसमें मुख्य रूप से गर्दन, बगल या ग्रोइन की लसीका ग्रंथियां (गांठें) सूज जाती हैं।
-प्लुरल इफ्यूजन टीबी : यह फेफड़ों के चारों ओर के आवरण (प्ल्यूरा) को प्रभावित करती है, जिसमें फेफड़ों के आसपास तरल पदार्थ जमा हो जाता है।
-मस्कुलोस्केलेटल टीबी : इसमें हड्डियां और जोड़ प्रभावित होते हैं। रीढ़ की हड्डी में होने वाली टीबी को पॉट्स डिजीज कहा जाता है, जिससे पीठ में तेज दर्द और गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
-गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल टीबी : यह पेट के अंगों, आंतों या पेरिटोनियम को प्रभावित करती है। इससे पेट में दर्द, लगातार सूजन और पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं।
-यूरोजेनिटल टीबी : यह मूत्र मार्ग और जननांगों को प्रभावित करती है। इससे पेशाब में समस्या या महिलाओं और पुरुषों में प्रजनन संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं।
-सेंट्रल नर्वस सिस्टम टीबी : यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आवरण को प्रभावित करती है। इसे टीबी मेनिनजाइटिस कहते हैं, जो काफी गंभीर और खतरनाक प्रकार माना जाता है।
-मिलिअरी टीबी : जब टीबी के बैक्टीरिया रक्त के माध्यम से फैलकर शरीर के कई अंगों (जैसे लिवर, प्लीहा, फेफड़े आदि) को एक साथ छोटे-छोटे दानों के रूप में प्रभावित करते हैं।
555 टीबी मरीजों के प्रकार
आंतों की टीबी - 40 %
गांठ वाली टीबी - 20% (बच्चे अधिक प्रभावित)
हड्डी वाली टीबी - 10%
जननांग टीबी - 10% (महिलाएं अधिक प्रभावित)
अन्य अंग - 20%
बताए गए कोई भी लक्षण दिखने तक तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर जांच कराएं। हर ब्लॉक में टीबी केंद्र मौजूद है। विशेष अभियानों के अलावा आम दिनों में भी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच की जाती है। नियमित दवा लेकर टीबी से छुटकारा पाया जा सकता है।
-डाॅ. प्रवीण भारती, डीटीओ
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इनमें कोई लगातार हलके बुखार व वजन गिरने से परेशान था तो किसी के गर्दन व बगल में गांठ थी। किसी की आंतों में दिक्कत तो किसी को पीठ दर्द व जोड़ों में दर्द था। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 24 मार्च से चले अभियान में संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाली आबादी में 22,907 लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
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संशय वाले 16,358 मरीजों के चेस्ट एक्स-रे परीक्षण किया। 7,158 संदिग्ध लोगों की सीबी नॉट व अन्य तकनीक से विस्तृत जांच की गई, जिसमें कुल 1,810 टीबी मरीज मिले। इनमें 555 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के रहे। पिछले एक वर्ष में 62 सौ टीबी के मरीज सामने आए हैं, जिनमें 1689 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी के रहे।
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ये हैं जांच के तरीके
फ्लूयड संबंधी टीबी के लिए सीबी नॉट, फेफड़े के लिए एक्स-रे, गांठ के लिए बायोप्सी और एफएनएसी, एएफबी कल्चर, पेट व जननांग के लिए अल्ट्रासाउंड, पेट के अंदरूनी हिस्से, मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी के लिए सीटी स्कैन व एमआरआई व त्वचा के लिए मंटौक्स टेस्ट और खून के जरिये शरीर में टीबी के बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए आईजीआरए ब्लड टेस्ट किया जाता है।
क्या है एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी
आम तौर पर टीबी फेफड़ों में होती है जिसे पल्मोनरी टीबी कहा जाता है, लेकिन जब माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया खून या लसीका प्रणाली के जरिये फेफड़ों के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंच जाते हैं, तो उसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं।
अंगों के अनुसार टीबी के प्रकार
-लिम्फ नोड टीबी : यह सबसे आम प्रकार की एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी है। इसमें मुख्य रूप से गर्दन, बगल या ग्रोइन की लसीका ग्रंथियां (गांठें) सूज जाती हैं।
-प्लुरल इफ्यूजन टीबी : यह फेफड़ों के चारों ओर के आवरण (प्ल्यूरा) को प्रभावित करती है, जिसमें फेफड़ों के आसपास तरल पदार्थ जमा हो जाता है।
-मस्कुलोस्केलेटल टीबी : इसमें हड्डियां और जोड़ प्रभावित होते हैं। रीढ़ की हड्डी में होने वाली टीबी को पॉट्स डिजीज कहा जाता है, जिससे पीठ में तेज दर्द और गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
-गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल टीबी : यह पेट के अंगों, आंतों या पेरिटोनियम को प्रभावित करती है। इससे पेट में दर्द, लगातार सूजन और पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं।
-यूरोजेनिटल टीबी : यह मूत्र मार्ग और जननांगों को प्रभावित करती है। इससे पेशाब में समस्या या महिलाओं और पुरुषों में प्रजनन संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं।
-सेंट्रल नर्वस सिस्टम टीबी : यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आवरण को प्रभावित करती है। इसे टीबी मेनिनजाइटिस कहते हैं, जो काफी गंभीर और खतरनाक प्रकार माना जाता है।
-मिलिअरी टीबी : जब टीबी के बैक्टीरिया रक्त के माध्यम से फैलकर शरीर के कई अंगों (जैसे लिवर, प्लीहा, फेफड़े आदि) को एक साथ छोटे-छोटे दानों के रूप में प्रभावित करते हैं।
555 टीबी मरीजों के प्रकार
आंतों की टीबी - 40 %
गांठ वाली टीबी - 20% (बच्चे अधिक प्रभावित)
हड्डी वाली टीबी - 10%
जननांग टीबी - 10% (महिलाएं अधिक प्रभावित)
अन्य अंग - 20%
बताए गए कोई भी लक्षण दिखने तक तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर जांच कराएं। हर ब्लॉक में टीबी केंद्र मौजूद है। विशेष अभियानों के अलावा आम दिनों में भी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच की जाती है। नियमित दवा लेकर टीबी से छुटकारा पाया जा सकता है।
-डाॅ. प्रवीण भारती, डीटीओ