Rahul Gandhi: मानहानि मामले में राहुल गांधी ने दाखिल की आपत्ति, केस खारिज करने की मांग, ये दिए तर्क
मामले में पिछले माह सात फरवरी को राहुल गांधी की ओर से परिवाद की प्रति मांगी गई थी। सोमवार को हुई सुनवाई में लखनऊ से आए अधिवक्ता ने राहुल गांधी की ओर से सात पेज की आपत्ति दाखिल करते हुए 15 बिंदुओं में अपना पक्ष रखा और केस खारिज करने की मांग की।
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हाथरस में चंदपा क्षेत्र के बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म कांड में अदालत से बरी अभियुक्तों को आरोपी बताए जाने के मामले में नेता प्रतिपक्ष व सांसद राहुल गांधी की ओर से 16 मार्च को एसीजेएम एमपी/एमएलए कोर्ट में आपत्ति दाखिल की गई। आपत्ति में राहुल गांधी ने आरोपों को गलत बताते हुए परिवाद खारिज करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई अब 13 अप्रैल को होगी।
दरअसल थाना चंदपा क्षेत्र के एक गांव में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की युवती के साथ दरिंदगी का मामला पूरे देश में चर्चा में रहा था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी और चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। दो मार्च 2023 को आए न्यायालय के फैसले में एक आरोपी को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया था।
12 दिसंबर 2024 को राहुल गांधी पीड़िता के गांव पहुंचे थे और परिवार से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पीड़ित परिवार स्वतंत्र रूप से आ-जा नहीं पा रहा है, जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। यह बयान बाद में उनके एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से भी पोस्ट किया गया था। इन्हीं बयानों को लेकर बरी हुए तीन आरोपियों में से एक रामवीर ने 24 दिसंबर 2025 को राहुल गांधी को नोटिस भेजा था और 50 लाख रुपये के मानहानि प्रतिकर की मांग की थी। जवाब न मिलने पर 24 जनवरी 2025 को एमपी/एमएलए कोर्ट में मानहानि का परिवाद दाखिल किया गया था।
मामले में पिछले माह सात फरवरी को राहुल गांधी की ओर से परिवाद की प्रति मांगी गई थी। सोमवार को हुई सुनवाई में लखनऊ से आए अधिवक्ता ने राहुल गांधी की ओर से सात पेज की आपत्ति दाखिल करते हुए 15 बिंदुओं में अपना पक्ष रखा और केस खारिज करने की मांग की। हालांकि सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी और अदालत ने अगली तारीख 13 अप्रैल तय की है।
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता का कहना है कि जिस पोस्ट का जिक्र परिवाद में किया गया है, वह 12 दिसंबर 2024 की है। उसी दिन राहुल गांधी हाथरस के गांव में पहुंचे थे और वहीं यह बयान दिया गया था।
राहुल गांधी की आपत्ति के मुख्य तर्क
- मुआवजे की मांग को बताया अवैध: आपत्ति में कहा गया है कि मानहानि की धारा 356(2) में केवल सजा (जेल या जुर्माना) का प्रावधान है। शिकायतकर्ता द्वारा 50 लाख रुपये प्रतिकर की मांग करना कानूनन गलत है।
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर सवाल: राहुल गांधी के पक्ष ने कहा कि एक्स पोस्ट का केवल स्क्रीनशॉट लगाया गया है, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4) के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है, इसलिए इसे साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
- सांविधानिक संरक्षण का दिया हवाला: आपत्ति में कहा गया कि लोकसभा में दिया गया बयान नेता प्रतिपक्ष के कर्तव्यों के निर्वहन के तहत था। संविधान के अनुच्छेद 105(2) के अनुसार संसद में कही गई बात पर न्यायालय में कार्रवाई नहीं की जा सकती।
- लोकसेवक होने का तर्क: राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष होने के कारण लोकसेवक की श्रेणी में आते हैं। उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति जरूरी होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई।
- क्षेत्राधिकार पर भी उठाए सवाल: आपत्ति में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि कथित पोस्ट कब और कहां देखी गई, जिससे न्यायालय के क्षेत्राधिकार को लेकर भी सवाल उठता है।