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Hathras News: बोले बुजुर्ग किसान-जीवन में पहले कभी नहीं देखा कुदरत का ऐसा कहर

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 02:30 AM IST
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Said the elderly farmer: "Never before in my life have I witnessed such fury of nature."
बारिश में भीगी गेहूं की फसल दिखाते गांव कोटा निवासी किसान अमर सिंह। संवाद - फोटो : Samvad
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जनपद में मार्च और अप्रैल के महीने में कुदरत का ऐसा कहर नहीं देखा, बारिश में भीगी फसल ठीक से सूख भी नहीं पाती है, इसी बीच फिर से बारिश आ जाती है। 15 दिन में पांच बार बारिश और तीन बार ओलावृष्टि हुई है। पहले खेत में कटी फसल सुखानी पड़ रही है, निकासी के बाद नमी दूर करने के लिए गेहूं को सुखाना पड़ रहा है। अब तो किसान भी थक गया है, दिन ब दिन नुकसान ऊपर से हो रहा है।
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जिले के बुजुर्ग किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में वैशाख के महीने में ऐसी बारिश नहीं देखी।लगातार हो रही बारिश के कारण गेहूं की चमक खो गई है और दाना काला पड़ने लगा है। थ्रेसर से निकालने के लिए इकट्ठा किया गया अनाज भी पूरी तरह भीग चुका है। किसानों का कहना है कि बार-बार फसल को पलटने और सुखाने में अतिरिक्त मजदूरी भी खर्च हो रही है। गेहूं की गुणवत्ता खराब होने से उसके बाजार में उचित दाम मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है।
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गांव शहजादपुर निवासी 81 वर्षीय किसान सुरेंद्र पाल सिंह का कहना है कि जीवन में पहली बार देखा है कि पकी-पकाई फसल पर इस कदर कुदरत कहर बरपा रही है। बारिश और ओलों ने फसल को बर्बाद कर दिया है। किसान भीगा हुआ गेहूं सुखाते-सुखाते थक गया है, हर रोज हो रही बारिश लागत बढ़ा रही है।




किसान धर्मवीर वर्मा निवासी सहपऊ ने बताया कि उनकी उम्र 100 साल की हो चुकी है। 400 बीघा में खेती करने का अनुभव है। पककर तैयार हुई फसल पर बारिश का इतना कहर कभी नहीं देखा। किसान बर्बाद हो चुका है, अब तो बस भगवान की मालिक है।





मंडी में आवक, खेत में गिरी पैदावार बर्बाद फसल को समेट रहा किसान

प्वाइंटर
3200 क्विंटल गेहूं पहुंचा था पिछले साल पांच अप्रैल तक मंडी में

200 क्विंटल गेहूं ही इस बार पहुंचा है हाथरस मंडी में अप्रैल में अब तक

1979 क्विंटल की खरीद हुई थी क्रय केंद्रों पर पिछले साल पांच अप्रैल तक

448.5 क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया है इस बार सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर



हाथरस। लगातार हो रही बारिश से बर्बाद गेहूं की फसल को किसान समेटने में जुटा है। निकासी हो नहीं पा रही है, जो थोड़ी बहुत हुई भी है तो उसमें पैदावार कम निकल रही है। हालात यह हो गए है कि मंडी और क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं पहुंच रहा है।




जनपद में इस बार कुल 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुवाई की गई थी। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि मौसम ने इस बार फसल का गणित बिगाड़ दिया है। पिछले साल जहां प्रति बीघा 10 से 12 मन ( एक मन 40 किलोग्राम) गेहूं की पैदावार हो रही थी, वहीं इस बार यह घटकर मात्र छह मन रह गई है।


आवक कम होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि खराब मौसम के कारण बार-बार फसल भीगने से कटाई और निकासी का कार्य पिछड़ रहा है, पैदावार कम होने के कारण किसानों के पास बेचने के लिए सरप्लस (अतिरिक्त) अनाज नहीं बच रहा है।



मौसम साफ होने के साथ ही आवक में तेजी आने की उम्मीद है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले काफी पीछे हैं। क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी हैं।

कमला प्रसाद यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।
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