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खतरे में जान: खटारा वाहनों में घर से स्कूल का सफर जोखिम भरा, मानक पूरे नहीं, भूसे की तरह भरे जा रहे मासूम

कमल वार्ष्णेय, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 17 Mar 2026 01:32 PM IST
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सार

घर से स्कूल और वापस स्कूल से घर तक का स्कूली बस या वैन में सफर जोखिम भरा है। कई स्कूली वाहनों के मानक भी पूरे नहीं हैं। बच्चों को वाहनों में भुस की तरह भर कर ले जाया जाता है। कई वाहनों में फर्जी बीमा का भी खेल चल रहा है।

Traveling from home to school in dilapidated vehicles
स्कूली वैन में क्षमता से अधिक बैठाए जा रहे बच्चे - फोटो : संवाद
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विस्तार

कासगंज में अलीगढ़ की छात्रा अनन्या और आगरा में नैना की स्कूल बसों के टूटे फर्श के गिरकर मौत हो चुकी है, लेकिन इन हादसों से स्कूल प्रबंधन या प्रसासन ने कोई सबक नहीं लिया। जर्जर और गैस किट लगे खटारा वाहनों से बच्चों का घर से शिक्षा के मंदिरों तक पहुंचने का सफर पूरा हो रहा है। उसमें भी भूसे की तरह बच्चों को भरकर ले जाया जा रहा है।

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हाथरस शहर की सड़कों पर ऐसी दर्जनों बसें दौड़ रही हैं जिनकी फिटनेस खत्म हो चुकी है। धुंआ छोड़ते इंजन और जर्जर बॉडी वाली इन बसों में बच्चों को बैठाना सीधे तौर पर उनकी जान जोखिम में डालना है। सोमवार की सुबह आगरा रोड से अलीगढ़ रोड तक के स्कूलों की स्थिति का जायजा लिया गया तो लगभग सभी जगह बच्चे जर्जर वाहनों में भुसे की तरह भरे नजर आए।
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बसों से भी बदतर स्थिति अवैध रूप से चल रही स्कूल वैन की है। घरेलू गैस सिलेंडरों से चलने वाले इन वाहनों में क्षमता से दोगुने बच्चे बैठाए जाते हैं। अलीगढ़ रोड पर दो स्कूल वैन में यही स्थिति नजर आई। एक वैन में पिछली सीट की जगह तीन बेंच नजर आईं, जिससे अधिक बच्चे बैठाए जा सकें। एक स्कूल के बाहर खड़ी मिली वैन में सीटें हटाकर तीन बैंच डाल दी गई थीं। स्कूलों के बाहर टूरिस्ट बस दिखाई दीं, जो कहीं से भी स्कूल वाहन के मानक पूरे नहीं कर रही थीं। तालाब चौराहा पर रेलवे पुल के नीचे वैन व डग्गेमार वाहनों में बच्चे भरे देखे गए।

स्कूल वाहनों को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। सोमवार को भी अभियान चलाया गया है, जिसमें 10 वाहनों में मानक अनुरूप कमी पाए जाने पर चालान किए गए हैं। संज्ञान में आया है कि यूपी परमिट लेकर कुछ बसें स्कूली छात्र-छात्राओं को लाते-ले जाते हैं। इन पर कार्रवाई की जाएगी। स्कूल यान के मानक पूर्ण करने वाली वैन ही स्कूली विद्यार्थियों को ला-लेजा सकती हैं। एक से 30 अप्रैल तक वृहद स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।-लक्ष्मण प्रसाद, एआरटीओ

Traveling from home to school in dilapidated vehicles
स्कूली वैन में बैठे बच्चे - फोटो : संवाद

स्कूलों ने झाड़ा पल्ला, विभाग की भी नजर नहीं
हैरानी की बात यह है कि कई निजी स्कूलों ने ट्रांसपोर्ट व्यवस्था से पूरी तरह पल्ला झाड़ रखा है। स्कूल प्रबंधन का तर्क होता है कि वाहन निजी हैं और अभिभावकों ने स्वयं अनुबंधित किए हैं। परिवहन विभाग की कार्रवाई भी केवल 'पीले रंग' वाले पंजीकृत स्कूली वाहनों तक ही सीमित नजर आती है। विभाग अक्सर केवल आधिकारिक स्कूली बसों की जांच कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है, जबकि बिना परमिट और बिना सुरक्षा मानकों के चल रही डग्गामार वैन पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है।

फर्जी बीमा का चल रहा खेल
स्कूली वाहनों की छानबीन में सामने आया कि जिले में फर्जी बीमा का भी खेल चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार ये वाहन स्वामी फिटनेस व परमिट के समय सेटिंग के आधार पर एक दो-दो दिन या माह का बीमा करा लेते हैं। इंश्योरेंस एजेंट की सांठ-गांठ से ऐसा होता है। इसके बाद पोर्टल पर गाड़ी का बीमा दिखने लगता है। पूरे बीमे की कीमत से 10 फीसद कीमत में ही काम हो जाता है।

स्कूल वाहनों के लिए नियम

  • वाहन की पहचान और बाहरी बनावट से नजर आना चाहिए कि यह स्कूल बस है, जैसे सुनहरा पीला रंग, स्कूल वाहन लिखना, संपर्क विवरण, खिड़कियों पर ग्रिल आदि।
  • बस में स्पीड गवर्नर, जीपीएस व कैमरे व पैनिक बटन होने चाहिए।
  • कैमरे की 60 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना आवश्यक है।
  • बस के पीछे या दाईं ओर एक आपातकालीन द्वारा होना चाहिए।
  • बस में अग्निशमक यंत्र और सुसज्जित फर्स्ट-एड बॉक्स आवश्यक है।
  • चालक और परिचालक को निर्धारित वर्दी पहनना अनिवार्य है।
  • चालक का पिछले एक साल में ओवर स्पीडिंग या खतरनाक ड्राइविंग के लिए चालान हुआ है, तो उसे नियुक्त नहीं किया जा सकता।
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