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Hathras News: रोज 30 किमी साइकिल चलाकर तय किया सफलता का सफर
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:51 AM IST
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सादाबाद के गांव झगरार में अपने परिवार के साथ छात्रा बीना। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Self
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सफलता की चमक के लिए कुछ लोग संसाधनों का रोना रोते हैं, लेकिन सादाबाद के एक छोटे से गांव झगरार की बीना ने इस धारणा को पीछे छोड़ दिया है। इंटरमीडिएट की परीक्षा में 87.8 फीसदी अंक हासिल करने वाली इस बिटिया ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो गरीबी भी रास्ता नहीं रोक सकती। बीना की यह सफलता जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही भावुक कर देने वाली भी।
जेके इंटर कॉलेज तामसी की छात्रा बीना के लिए स्कूल पहुंचना ही अपने आप में एक परीक्षा थी। घर की माली हालत ऐसी नहीं थी कि टेंपो का खर्च उठाया जा सके। बीना ने हार मानने के बजाय साइकिल उठाई और रोज 30 किलोमीटर (15 किमी जाना और 15 किमी आना) का सफर तय किया। तपती धूप हो या कड़ाके की ठंड, उसके पैर पैडल पर कभी नहीं थमे। स्कूल से लौटती तो घर के काम में मां हीरा देवी का हाथ बंटातीं।
बीना के पिता मजदूर हैं, जो राज मिस्त्री का काम ढूंढने रोज सादाबाद जाते हैं। कभी काम मिलता है, तो कभी खाली हाथ लौटना पड़ता है। ऐसे में महंगी कोचिंग के बारे में सोचना भी बीना के लिए मुमकिन नहीं था। उसने बिना किसी बाहरी मदद के, खुद की मेहनत के दम पर किताबों से दोस्ती की और यह मुकाम हासिल किया।
बीना ने कहा कि पढ़ाई के जरिये उन्हें घर के हालात बदलने हैं। आगे चलकर एनडीए की तैयारी करनी है, जिससे देश की भी सेवा कर सकें। परिवार में एक भाई और चार बहनों के बीच बीना सबसे छोटी हैं, लेकिन पढ़ाई में सबसे आगे रही हैं। उनके पिता ने बताया कि बीना शुरू से ही मेधावी रही हैं और हर कक्षा में प्रथम स्थान हासिल करती आई हैं।
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जेके इंटर कॉलेज तामसी की छात्रा बीना के लिए स्कूल पहुंचना ही अपने आप में एक परीक्षा थी। घर की माली हालत ऐसी नहीं थी कि टेंपो का खर्च उठाया जा सके। बीना ने हार मानने के बजाय साइकिल उठाई और रोज 30 किलोमीटर (15 किमी जाना और 15 किमी आना) का सफर तय किया। तपती धूप हो या कड़ाके की ठंड, उसके पैर पैडल पर कभी नहीं थमे। स्कूल से लौटती तो घर के काम में मां हीरा देवी का हाथ बंटातीं।
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बीना के पिता मजदूर हैं, जो राज मिस्त्री का काम ढूंढने रोज सादाबाद जाते हैं। कभी काम मिलता है, तो कभी खाली हाथ लौटना पड़ता है। ऐसे में महंगी कोचिंग के बारे में सोचना भी बीना के लिए मुमकिन नहीं था। उसने बिना किसी बाहरी मदद के, खुद की मेहनत के दम पर किताबों से दोस्ती की और यह मुकाम हासिल किया।
बीना ने कहा कि पढ़ाई के जरिये उन्हें घर के हालात बदलने हैं। आगे चलकर एनडीए की तैयारी करनी है, जिससे देश की भी सेवा कर सकें। परिवार में एक भाई और चार बहनों के बीच बीना सबसे छोटी हैं, लेकिन पढ़ाई में सबसे आगे रही हैं। उनके पिता ने बताया कि बीना शुरू से ही मेधावी रही हैं और हर कक्षा में प्रथम स्थान हासिल करती आई हैं।

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