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Hathras News: उतरने लगा ईशन का पानी, कम हुई किसानों की चिंता
Sun, 12 Jul 2026 02:35 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 12 Jul 2026 02:35 AM IST
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पुरदिलनगर में खेतों में भरा पानी। संवाद
- फोटो : Samvad
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बारिश थमने के बाद अब ईशन नदी का पानी खेतों से धीरे-धीरे उतरने लगा है, जिससे किसानों को जलमग्न हुई फसलों के बचने की उम्मीद नजर आने लगी है। हालांकि, बीते चार दिनों से पानी भरा रहने के कारण फसल को कितना नुकसान हुआ है, इसका सही आकलन पानी पूरी तरह हटने के बाद ही हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि ईशन नदी के अचानक ओवरफ्लो होने से आसपास के निचले इलाकों और खेतों में पानी भर गया था। देखते ही देखते आसपास के 250 किसानों की करीब एक हजार बीघा धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गईं। पिछले चार दिनों से खेतों में लबालब भरे पानी ने किसानों की मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया था।
शनिवार को प्रशासनिक टीम हरकत में आई। अधिकारियों और राजस्व विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित किसानों से बातचीत की और आश्वस्त किया कि जलभराव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वहीं, पीड़ित किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
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भगवान से प्रार्थना-अब और बारिश न हो
किसान अब बस यही दुआ कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में दोबारा बारिश न हो। किसान सत्यवीर सिंह व गिरीश ने कहा कि अगर फिर से बारिश होती है या नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ता है, तो बची-कुची फसल भी पूरी तरह सड़कर बर्बाद हो जाएगी।
अलीगढ़ से आया पानी पुरदिलनगर में रुका
अलीगढ़ व बॉर्डर से सटे गांवों में हुई बारिश का पानी बहकर सिकंदराराऊ-हाथरस रोड के नीचे से पार होकर पुरदिलनगर की तरफ आगे बढ़ा, लेकिन पुरदिलनगर में सफाई न होने तथा पुल के नीचे जलकुंभी फंसने के कारण पानी यहीं रुक गया। बारिश व पीछे से बहकर आया पानी यहीं जमा हो गया और खेतों तक पहुंच गया।
ईशन नदी : यह बरसाती नदी सिकंदराराऊ के पूर्व से निकलकर दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है। बारिश के समय इसमें बाढ़ आ जाती है। जिले में इसका मार्ग 12.61 किमी लंबा है। यह नदी अलीगढ़ के हरदुआगंज से निकलकर हाथरस, मैनपुरी, कन्नौज और कानपुर नगर से होकर बहती है और कानपुर के बिल्हौर के पास गंगा में मिल जाती है। इसे गंगा की सहायक नदी कहा जाता है। केवल बारिश में ही इसमें पानी आता है, इसलिए सिंचाई की दृष्टि से इसका महत्व कम है।
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उल्लेखनीय है कि ईशन नदी के अचानक ओवरफ्लो होने से आसपास के निचले इलाकों और खेतों में पानी भर गया था। देखते ही देखते आसपास के 250 किसानों की करीब एक हजार बीघा धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गईं। पिछले चार दिनों से खेतों में लबालब भरे पानी ने किसानों की मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया था।
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शनिवार को प्रशासनिक टीम हरकत में आई। अधिकारियों और राजस्व विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित किसानों से बातचीत की और आश्वस्त किया कि जलभराव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वहीं, पीड़ित किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
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भगवान से प्रार्थना-अब और बारिश न हो
किसान अब बस यही दुआ कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में दोबारा बारिश न हो। किसान सत्यवीर सिंह व गिरीश ने कहा कि अगर फिर से बारिश होती है या नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ता है, तो बची-कुची फसल भी पूरी तरह सड़कर बर्बाद हो जाएगी।
अलीगढ़ से आया पानी पुरदिलनगर में रुका
अलीगढ़ व बॉर्डर से सटे गांवों में हुई बारिश का पानी बहकर सिकंदराराऊ-हाथरस रोड के नीचे से पार होकर पुरदिलनगर की तरफ आगे बढ़ा, लेकिन पुरदिलनगर में सफाई न होने तथा पुल के नीचे जलकुंभी फंसने के कारण पानी यहीं रुक गया। बारिश व पीछे से बहकर आया पानी यहीं जमा हो गया और खेतों तक पहुंच गया।
ईशन नदी : यह बरसाती नदी सिकंदराराऊ के पूर्व से निकलकर दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है। बारिश के समय इसमें बाढ़ आ जाती है। जिले में इसका मार्ग 12.61 किमी लंबा है। यह नदी अलीगढ़ के हरदुआगंज से निकलकर हाथरस, मैनपुरी, कन्नौज और कानपुर नगर से होकर बहती है और कानपुर के बिल्हौर के पास गंगा में मिल जाती है। इसे गंगा की सहायक नदी कहा जाता है। केवल बारिश में ही इसमें पानी आता है, इसलिए सिंचाई की दृष्टि से इसका महत्व कम है।