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Jalaun News: पीएम मोदी के साथ फ्रांस पहुंचा रामपुरा का लाल डॉ. राहुल
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उरई। रामपुरा बीहड़ क्षेत्र से निकलकर विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. राहुल पुरवार एक बार फिर जनपद जालौन का गौरव बढ़ा रहे हैं। ब्लड कैंसर के उपचार के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने वाले डॉ. राहुल देश के चुनिंदा 120 नवाचारियों में शामिल हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फ्रांस दौरे पर जाने का अवसर मिला है। यह दौरा भारत और फ्रांस के बीच नवाचार एवं वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
डॉ. राहुल पुरवार के नेतृत्व में विकसित स्वदेशी काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (सीएआर-टी) थैरेपी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्र को समर्पित कर चुकी हैं। यह तकनीक ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। अब तक इस अत्याधुनिक उपचार के लिए मरीजों को विदेशों का रुख करना पड़ता था, जहां इलाज पर करीब पांच करोड़ रुपये तक खर्च हो जाते थे। वहीं भारत में विकसित इस स्वदेशी तकनीक के माध्यम से यही उपचार लगभग 40 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकेगा, जिससे हजारों मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान में आईआईटी मुंबई में प्रोफेसर एवं शोधकर्ता के रूप में कार्यरत डॉ. राहुल पुरवार ने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग और बाईरैक के सहयोग से वर्ष 2021 में इस तकनीक का विकास किया गया था। इसके बाद टाटा मेमोरियल अस्पताल और आईआईटी मुंबई में सफल क्लीनिकल ट्रायल किए गए। 18 मरीजों पर किए गए परीक्षणों में बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए, जिनमें छह बच्चे भी शामिल थे।
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रामपुरा में जन्मे और पले-बढ़े डॉ. राहुल पुरवार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा समर सिंह इंटर कॉलेज, रामपुरा से प्राप्त की। जर्मनी से पीएचडी और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज, बोस्टन से फेलोशिप प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने भारत लौटकर वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देने का संकल्प निभाया।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष भोज में भी आमंत्रित किया जा चुका है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फ्रांस दौरे में शामिल होना उनके वैज्ञानिक योगदान की एक और बड़ी पहचान माना जा रहा है। डॉ. राहुल की उपलब्धि से पूरे क्षेत्र गर्व व उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोग और शुभचिंतक उनके पिता डॉ. कैलाश पुरवार व माता ममता पुरवार को बधाई देकर अपनी खुशी व्यक्त कर रहे हैं।
डॉ. राहुल पुरवार के नेतृत्व में विकसित स्वदेशी काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (सीएआर-टी) थैरेपी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्र को समर्पित कर चुकी हैं। यह तकनीक ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। अब तक इस अत्याधुनिक उपचार के लिए मरीजों को विदेशों का रुख करना पड़ता था, जहां इलाज पर करीब पांच करोड़ रुपये तक खर्च हो जाते थे। वहीं भारत में विकसित इस स्वदेशी तकनीक के माध्यम से यही उपचार लगभग 40 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकेगा, जिससे हजारों मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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वर्तमान में आईआईटी मुंबई में प्रोफेसर एवं शोधकर्ता के रूप में कार्यरत डॉ. राहुल पुरवार ने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग और बाईरैक के सहयोग से वर्ष 2021 में इस तकनीक का विकास किया गया था। इसके बाद टाटा मेमोरियल अस्पताल और आईआईटी मुंबई में सफल क्लीनिकल ट्रायल किए गए। 18 मरीजों पर किए गए परीक्षणों में बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए, जिनमें छह बच्चे भी शामिल थे।
रामपुरा में जन्मे और पले-बढ़े डॉ. राहुल पुरवार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा समर सिंह इंटर कॉलेज, रामपुरा से प्राप्त की। जर्मनी से पीएचडी और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज, बोस्टन से फेलोशिप प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने भारत लौटकर वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देने का संकल्प निभाया।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष भोज में भी आमंत्रित किया जा चुका है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फ्रांस दौरे में शामिल होना उनके वैज्ञानिक योगदान की एक और बड़ी पहचान माना जा रहा है। डॉ. राहुल की उपलब्धि से पूरे क्षेत्र गर्व व उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोग और शुभचिंतक उनके पिता डॉ. कैलाश पुरवार व माता ममता पुरवार को बधाई देकर अपनी खुशी व्यक्त कर रहे हैं।