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Jalaun News: ग्रामीण बस सेवा से जुड़ेगा हर गांव, रोजगार भी मिलेगा
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उरई। जिले के ग्रामीण इलाकों में बस सेवा पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री ग्राम बस सेवा योजना के तहत ब्लॉक, तहसील व जिला मुख्यालय तक मिनी बसों का संचालन होगा। परिवहन विभाग ने निजी बस संचालकों से जिला स्तर पर अनुबंध की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 28 सीटों वाली मिनी बसें चलाई जाएंगी। इससे छात्रों, मरीजों और मजदूरों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी। अभी ग्रामीण लोग शहर पहुंचने के लिए निजी वाहनों, ई-रिक्शा और ऑटो का सहारा लेते हैं। बीहड़ क्षेत्र के कई इलाकों में बस सेवा न होने से लोगों को मुख्यालय आने-जाने में परेशानी होती है। साथ ही उनसे मनमाना किराया भी वसूला जाता है।
रोडवेज के एआरएम कमल किशोर आर्य ने बताया कि निजी ऑपरेटरों को बस संचालन के लिए परमिट मिलेगा। परमिट में शत प्रतिशत की छूट दी जाएगी। संचालक को निर्धारित सीमा तक किराया वसूलने और पूरी कमाई रखने का अधिकार होगा। वे मार्ग, फेरे और समय का निर्धारण खुद कर सकेंगे। हालांकि, प्रति ग्राम पंचायत न्यूनतम दो फेरे लगाना अनिवार्य होगा।
आवेदन प्रक्रिया और शुल्क
एआरएम कार्यालय में 28 मार्च तक आवेदन दिए जा सकेंगे। आवेदन शुल्क दो हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, पांच हजार रुपये प्रतिभूति राशि देनी होगी। प्रतिमाह 1500 रुपये संरक्षण शुल्क परिवहन विभाग को देना होगा। अनुबंध की अवधि दस साल होगी।
योजना के लाभ
यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी। इससे लोगों को सुरक्षित और किफायती परिवहन विकल्प मिलेगा। मनमाने किराए की समस्या से भी निजात मिलेगी। एआरएम ने बताया कि इस योजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
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इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 28 सीटों वाली मिनी बसें चलाई जाएंगी। इससे छात्रों, मरीजों और मजदूरों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी। अभी ग्रामीण लोग शहर पहुंचने के लिए निजी वाहनों, ई-रिक्शा और ऑटो का सहारा लेते हैं। बीहड़ क्षेत्र के कई इलाकों में बस सेवा न होने से लोगों को मुख्यालय आने-जाने में परेशानी होती है। साथ ही उनसे मनमाना किराया भी वसूला जाता है।
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रोडवेज के एआरएम कमल किशोर आर्य ने बताया कि निजी ऑपरेटरों को बस संचालन के लिए परमिट मिलेगा। परमिट में शत प्रतिशत की छूट दी जाएगी। संचालक को निर्धारित सीमा तक किराया वसूलने और पूरी कमाई रखने का अधिकार होगा। वे मार्ग, फेरे और समय का निर्धारण खुद कर सकेंगे। हालांकि, प्रति ग्राम पंचायत न्यूनतम दो फेरे लगाना अनिवार्य होगा।
आवेदन प्रक्रिया और शुल्क
एआरएम कार्यालय में 28 मार्च तक आवेदन दिए जा सकेंगे। आवेदन शुल्क दो हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, पांच हजार रुपये प्रतिभूति राशि देनी होगी। प्रतिमाह 1500 रुपये संरक्षण शुल्क परिवहन विभाग को देना होगा। अनुबंध की अवधि दस साल होगी।
योजना के लाभ
यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी। इससे लोगों को सुरक्षित और किफायती परिवहन विकल्प मिलेगा। मनमाने किराए की समस्या से भी निजात मिलेगी। एआरएम ने बताया कि इस योजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।