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Jalaun News: कोटे की रंजिश में पिता-पुत्र को जिंदा जलाने में प्रधान समेत चार दोषियों को उम्रकैद
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उरई। कोंच कोतवाली क्षेत्र के चंदुर्रा गांव में वर्ष 2018 में कोटे की दुकान की रंजिश में पिता-पुत्र को जिंदा जलाने वाले प्रधान रवींद्र अहिरवार और उसके साथी गौरीशंकर, धर्मेंद्र और गरीबदास को कोर्ट ने उम्रकैद सुनाई है। दोषियों पर 4 लाख 48 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सजा होने के बाद दोषियों का मेडिकल कराकर जेल भेज दिया गया।
कोंच कोतवाली क्षेत्र के चंर्दुरा गांव निवासी रिंकू ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि 25 मार्च 2018 की रात करीब साढ़े आठ बजे उसके पिता गिरवर (65) और उसका भाई सुशील कुमार (38) परचून की दुकान पर बैठे थे। कोटे की दुकान को लेकर पनपी रंजिश के चलते गांव का रवींद्र, उसके पिता महेश साथियों के साथ पहुंचे। महेश ने बंदूक तान दी, जबकि अन्य ने पिता-पुत्र और दुकान पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।
लपटों में घिरकर दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने किसी तरह आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। घटना में दुकान का लगभग पांच लाख रुपये का सामान भी जलकर राख हो गया। झुलसे पिता-पुत्र को इलाज के लिए पहले कोंच और फिर ग्वालियर रेफर किया गया। गिरवर की 26 मार्च 2018 को इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि सुशील कुमार ने 1 अप्रैल 2018 को दिल्ली में दम तोड़ दिया।
पीड़ित परिवार की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही गौरीशंकर, रविंद, धर्मेंद्र, गरीबदास, एक नाबालिग, मानवेंद्र व महेश के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्जकर जांच शुरू की थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की थी। विवेचना के बाद आरोप पत्र 19 दिसंबर 2021 को दाखिल किया गया। ट्रायल के दौरान महेश की मौत हो गई। जबकि एक अन्य नाबालिग का मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है। वहीं, मानवेंद्र का नाम पुलिस ने विवेचना के दौरान निकाल दिया था। क्योंकि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले थे।
करीब आठ साल तक चले सुनवाई के बाद सोमवार को एससी/एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने चार आरोपियों गौरीशंकर, रविंद्र, धर्मेंद्र और गरीबदास को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड लगाया।
रंजिश की वजह
इसी दौरान राशन कोटे को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। पहले गिरेंद्र कोटेदार थे, लेकिन बाद में कोटा रविंद्र अहिरवार के नाम हो गया। इसके बाद दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ गया। आरोप है कि इसी विवाद के चलते रविंद्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर गिरेंद्र की दुकान पर हमला बोल कर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी।
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कोंच कोतवाली क्षेत्र के चंर्दुरा गांव निवासी रिंकू ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। बताया था कि 25 मार्च 2018 की रात करीब साढ़े आठ बजे उसके पिता गिरवर (65) और उसका भाई सुशील कुमार (38) परचून की दुकान पर बैठे थे। कोटे की दुकान को लेकर पनपी रंजिश के चलते गांव का रवींद्र, उसके पिता महेश साथियों के साथ पहुंचे। महेश ने बंदूक तान दी, जबकि अन्य ने पिता-पुत्र और दुकान पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।
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लपटों में घिरकर दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने किसी तरह आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। घटना में दुकान का लगभग पांच लाख रुपये का सामान भी जलकर राख हो गया। झुलसे पिता-पुत्र को इलाज के लिए पहले कोंच और फिर ग्वालियर रेफर किया गया। गिरवर की 26 मार्च 2018 को इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि सुशील कुमार ने 1 अप्रैल 2018 को दिल्ली में दम तोड़ दिया।
पीड़ित परिवार की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही गौरीशंकर, रविंद, धर्मेंद्र, गरीबदास, एक नाबालिग, मानवेंद्र व महेश के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्जकर जांच शुरू की थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की थी। विवेचना के बाद आरोप पत्र 19 दिसंबर 2021 को दाखिल किया गया। ट्रायल के दौरान महेश की मौत हो गई। जबकि एक अन्य नाबालिग का मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है। वहीं, मानवेंद्र का नाम पुलिस ने विवेचना के दौरान निकाल दिया था। क्योंकि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले थे।
करीब आठ साल तक चले सुनवाई के बाद सोमवार को एससी/एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने चार आरोपियों गौरीशंकर, रविंद्र, धर्मेंद्र और गरीबदास को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड लगाया।
रंजिश की वजह
इसी दौरान राशन कोटे को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। पहले गिरेंद्र कोटेदार थे, लेकिन बाद में कोटा रविंद्र अहिरवार के नाम हो गया। इसके बाद दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ गया। आरोप है कि इसी विवाद के चलते रविंद्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर गिरेंद्र की दुकान पर हमला बोल कर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी।