सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   The issue of the Barar community was raised in Parliament, and an inquiry was demanded into the 'zero' report.

Jalaun News: संसद में उठा बरार समाज का मुद्दा, ‘शून्य’ रिपोर्ट पर जांच की मांग

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:30 AM IST
विज्ञापन
The issue of the Barar community was raised in Parliament, and an inquiry was demanded into the 'zero' report.
फोटो - 39 संसद में बोलते नारायण दास अहिरवार। स्वयं
विज्ञापन
उरई। जिले में बरार (बसोर) समाज की संख्या को शून्य दर्शाए जाने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। जालौन-गरौठा-भोगनीपुर क्षेत्र के सांसद नारायणदास अहिरवार ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए इसे भ्रामक बताते हुए जांच की मांग की है। परियोजना निदेशक ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिले में इस समाज के लोग नहीं हैं। सांसद का आरोप है कि इसी वजह से इस तबके को आवास योजना से वंचित किया गया है।
Trending Videos



सोमवार को सांसद नारायण दास अहिरवार ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट में जिले में बसोर समाज की संख्या शून्य बताई गई है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने इसे संबंधित समाज के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि जिले में बरार समाज के हजारों लोग रहते हैं। करीब 60 लोगों ने अपने शपथ पत्र और जाति प्रमाण पत्र संबंधित मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे थे। इसके बावजूद उनके आवेदनों को नजरअंदाज कर दिया गया।

सांसद ने आरोप लगाया कि इस त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट के कारण बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। खासतौर पर रामपुरा विकास खंड में इस समाज की मौजूदगी को पूरी तरह नकार दिया गया, जबकि वहां सैकड़ों परिवार रह रहे हैं।

वहीं, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी का कहना है कि यह रिपोर्ट उन्हें जिले के नौ विकास खंडों में तैनात बीडीओ से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसमें संबंधित समाज की उपस्थिति नहीं बताई गई थी।

सांसद ने सरकार से मांग की है कि मामले का भौतिक सत्यापन कराया जाए और पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जाए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।



जिले में बसोर समाज की संख्या करीब अस्सी हजार


जनपद में बरार बसोर समाज की कुल संख्या करीब 80 हजार के आसपास है। वहीं, उरई विधानसभा क्षेत्र में ही लगभग 25 हजार लोग इस समाज से जुड़े बताए जाते हैं। खास बात यह है कि इस समाज के लोग कई स्थानों पर धानुक और कठेरिया नाम से भी जाने जाते हैं। इससे आंकड़ों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सही सर्वे और पहचान न होने के कारण इस समाज के कई लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में वास्तविक आंकड़ों का सत्यापन कराना आवश्यक है, ताकि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed