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Jhansi: अफसरों की लापरवाही, हाथ से निकली 50 हेक्टेयर सरकारी जमीन, कई जगह पहाड़ी काटकर कर दी गई प्लॉटिंग

अमर उजाला नेटवर्क Published by: दीपक महाजन Updated Thu, 09 Apr 2026 10:13 AM IST
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सार

झांसी महानगर में करीब 350 एकड़ सरकारी जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा है। हैरानी की बात यह कि ये अवैध कब्जे निगम की ओर से चिह्नित किए जा चुके हैं, इसके बावजूद निगम इसे खाली नहीं करा सका।

Jhansi: 50 hectares of government land was lost due to negligence of officials
नगर निगम, झांसी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

झांसी विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने साझा कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माण को भले जमींदोज करा दिया लेकिन, झांसी महानगर में करीब 350 एकड़ सरकारी जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा है। हैरानी की बात यह कि ये अवैध कब्जे निगम की ओर से चिह्नित किए जा चुके हैं, इसके बावजूद निगम इसे खाली नहीं करा सका। पहाड़ी से लेकर तालाब की जमीन पर कब्जा है। कई जगह पहाड़ी काटकर प्लॉटिंग कर दी गई। सरकारी जमीन पर निजी बाजार तक बना हुआ है। अब इस जमीन का मालिकाना हक भी धीरे-धीरे नगर निगम के हाथ से फिसलता जा रहा है।
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करीब 350 एकड़ भूमि पर कब्जे एवं अतिक्रमण चिह्नित
नगर निगम का मौजूदा क्षेत्र करीब 152 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। 7 फरवरी 2002 को नगर निगम बनने के साथ इसमें 15 गांव नए जुड़े। उनकी जमीन भी निगम के खाते में आ गई। ग्राम समाज के साथ सीलिंग की सरप्लस जमीन भी निगम को मिल गई। उसकी पैमाइश नहीं कराई गई थी। कई साल तक निगम प्रशासन इसे भुलाए बैठा रहा। इसका फायदा उठाते हुए जमीन कारोबारियों ने सरकारी भूमि पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया। सबसे अधिक बिजौली, गरिया गांव, बूढ़ा भोजला, करारी, मैरी, कोछाभांवर, लहरगिर्द, भगवंतपुरा इलाकों में सरकारी जमीन पर कब्जे जमाए गए। इन इलाकों में करीब 350 एकड़ भूमि पर कब्जे एवं अतिक्रमण चिह्नित हैं। कई जगह सरकारी जमीन पर खेती तक कराई जा रही है। अपर नगर आयुक्त एवं प्रभारी राहुल यादव का कहना है कि नियमित अभियान चलाकर सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाता है। आगे भी अभियान चलेगा। अतिक्रमण के जो भी स्थान चिह्नित हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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पहाड़ी काटकर बना लीं दुकानें
नगर निगम की जमीन पर कई जगह कब्जा कर बाजार के साथ दुकानें तक बना ली गई हैं। बाकायदा हर महीने इसका किराया वसूला जाता है। लक्ष्मी ताल के पास स्थित पहाड़िया को काटकर दुकानें बना ली गईं। लहरगिर्द में गाटा संख्या 170, 568, 668 नगर निगम का पाया गया है, लेकिन मौके पर दूसरे लोगों का कब्जा है। यहां करीब 10 एकड़ जमीन पर कब्जा है। खालसा स्कूल के पास सिद्धबाबा पहाड़िया के आसपास करीब 15 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है। पंचवटी कॉलोनी के पास गाटा संख्या 816 में भी नगर निगम की काफी जमीन है, जिस पर लोगों ने कब्जा कर रखा है।

पार्षदों ने भी किया कब्जा
नगर निगम की जमीन पर कुछ पार्षदों ने भी कब्जे जमा रखे हैं। इनके नाम देखकर निगम प्रशासन खामोशी की चादर ओढ़ लेता है। गोविंद चौराहा के पास बेशकीमती करोड़ों रुपये की जमीन पर लोगों ने कब्जा जमा रखा है। हालांकि, पंचवटी एवं गोविंद चौराहा की जमीन पर कब्जा जमाने वालों के खिलाफ नगर निगम प्राथमिकी दर्ज करा चुका है।

लगवाए जाने थे तार के बाड़
निगम संपत्तियों पर अवैध कब्जा रोकने के लिए उनको तार से घेरवाने एवं नामपट्टी लगवाने का प्रस्ताव निगम सदन ने कई बार पारित किया। लेकिन, अब तक सभी संपत्तियों को तार के बाड़े से नहीं घेरा जा सका है। कुछ जगहों पर नामपट्टी लगाकर छोड़ दिया गया है। इस नाम पट्टी को भी कब्जा करने वालों ने तोड़ दिया है।

हजारों की संख्या में शिकायतें
नगर निगम में गंदगी के बाद दूसरी सबसे अधिक शिकायतें अवैध कब्जे एवं अतिक्रमण की हैं। हेल्प डेस्क पर हर महीने 50 से अधिक शिकायतें पहुंचती हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर भी इससे संबंधित शिकायतें आती हैं, लेकिन समय पर निस्तारित नहीं होतीं। पार्षदों की ओर से सैकड़ों शिकायतें दर्ज कराई गई हैं लेकिन, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पार्षद हरिओम मिश्रा समेत अन्य का कहना है कि उनकी ओर से अवैध कब्जों की शिकायतें की गई हैं। अब तक इन पर कार्रवाई नहीं हुई।
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