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Jhansi: 15 घंटे बाद डैम से निकाला जा सका एक छात्र का शव, दूसरे का नहीं चल सका पता, एसडीआरएफ तलाश में जुटी
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 07 Apr 2026 06:03 AM IST
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सार
रील बनाते समय, भाई..मुझे तैरना आता है कहने वाला वेदांश हादसे के चौबीस घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लापता है। एसडीआरएफ टीम उसकी तलाश में जुटी हुई है।
आतिफ की फाइल फोटो।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
रेलवे डैम में पिकनिक मनाने के दौरान डूबे दो छात्रों में आतिफ मंसूरी (19) पुत्र शहजाद का शव सोमवार सुबह करीब आठ बजे पुलिस ने बरामद कर लिया, जबकि दूसरे छात्र का अब तक पता नहीं चल सका है। जालौन से आई एसडीआरएफ टीम भी सोमवार देर शाम तक उसकी तलाश करती रही लेकिन, उनको भी कामयाबी नहीं मिली। पुलिस ने शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।
माउंट लिटरा जी स्कूल में 11वीं में पढ़ने वाले श्रवण तिवारी, शौर्य, वेदांश एवं आतिफ मंसूरी रविवार शाम करीब पांच बजे पिकनिक मनाने के लिए सुनसान इलाके में स्थित पहाड़ी डैम में पहुंचे थे। चारों दोस्त वहां पड़ी एक नाव लेकर डैम के बीचों-बीच पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रील बनाने के दौरान नाव असंतुलित होकर पलट गई। श्रवण और शौर्य थोड़ा-बहुत तैर लेते थे। इस वजह से उनको बचा लिया गया लेकिन, वेदांश एवं आतिफ डैम के गहरे पानी में समा गए। रविवार देर-शाम तक उनका कुछ पता नहीं चल सका था।
एसडीआरएफ दूसरे की तलाश में जुटी
सोमवार सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान फिर शुरू हुआ। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जुटे थे। परिवार के लोग भी थे। स्थानीय गोताखोरों ने डैम के भीतर कांटे डाले। सीओ रामवीर सिंह ने बताया कि जिस जगह हादसा हुआ था, वहां कांटा डालने पर आतिफ का शव बरामद हो गया। वेदांश का पता नहीं चल सका है। रक्सा थानाध्यक्ष रूपेश कुमार का कहना है कि एसडीआरएफ की मदद से तलाश करने के बावजूद कामयाबी नहीं मिल सकी। मंगलवार सुबह फिर से अभियान शुरू होगा।
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माउंट लिटरा जी स्कूल में 11वीं में पढ़ने वाले श्रवण तिवारी, शौर्य, वेदांश एवं आतिफ मंसूरी रविवार शाम करीब पांच बजे पिकनिक मनाने के लिए सुनसान इलाके में स्थित पहाड़ी डैम में पहुंचे थे। चारों दोस्त वहां पड़ी एक नाव लेकर डैम के बीचों-बीच पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रील बनाने के दौरान नाव असंतुलित होकर पलट गई। श्रवण और शौर्य थोड़ा-बहुत तैर लेते थे। इस वजह से उनको बचा लिया गया लेकिन, वेदांश एवं आतिफ डैम के गहरे पानी में समा गए। रविवार देर-शाम तक उनका कुछ पता नहीं चल सका था।
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एसडीआरएफ दूसरे की तलाश में जुटी
सोमवार सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान फिर शुरू हुआ। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जुटे थे। परिवार के लोग भी थे। स्थानीय गोताखोरों ने डैम के भीतर कांटे डाले। सीओ रामवीर सिंह ने बताया कि जिस जगह हादसा हुआ था, वहां कांटा डालने पर आतिफ का शव बरामद हो गया। वेदांश का पता नहीं चल सका है। रक्सा थानाध्यक्ष रूपेश कुमार का कहना है कि एसडीआरएफ की मदद से तलाश करने के बावजूद कामयाबी नहीं मिल सकी। मंगलवार सुबह फिर से अभियान शुरू होगा।
लापता छात्र वेदांश की रील बनाने के दौरान की फोटो।
- फोटो : संवाद
भाई...मैं तो तैरना जानता हूं...मैं यहां से निकल जाऊंगा, कहने वाला वेदांश ही लापता
चारों दोस्त पिकनिक मनाने के लिए बेहद गहरे डैम के बीचों-बीच जा पहुंचे थे। छोटी सी नाव लेकर गहरे पानी में पहुंचे चारों दोस्त वहां रील बनाने लगे। हादसे से कुछ देर पहले सोशल मीडिया पर अपलोड उनकी रील भी सामने आई है। इस रील में चारों दोस्त दो नाव में दिखाई दे रहे हैं। कुछ देर बाद चारों एक नाव में आ गए। वेदांश रील बना रहा है। वेदांश इसमें डैम के बारे में बता रहा है। वह कह रहा है डैम बहुत गहरा है। वे लोग बोट हाइजैक करके यहां तक पहुंचे हैं। वेदांश अपने दोस्तों से यह कहते भी सुनाई दे रहा है कि भाई..मुझे तैरना आता है। कुछ हुआ तो वह तैरकर निकल जाएगा लेकिन, हादसे के चौबीस घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वेदांश का पता नहीं चल रहा है।
काले रंग का चश्मा बना हादसे का सबब
हादसे में बाल-बाल बचे श्रवण एवं शौर्य अब भी बुरी तरह सहमे हैं। वह बात करने की स्थिति में नहीं हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि श्रवण और शौर्य ने बाहर आने के बाद हादसे की वजह बताई थी। उनका कहना था कि एक युवक के पास काले रंग का चश्मा था। चारों ही काला चश्मा पहनकर रील बनाना चाहते थे। इस वजह से नाव में अचानक खड़े हो गए। जिससे वह असंतुलित होकर पलट गई। श्रवण और शौर्य को बाहर निकालने वाले कल्लू एवं गांव के लोगों ने बताया कि रील बनाने के दौरान ही हादसा हुआ।
डैम से आतिफ का शव निकलते ही मां-बाप हुए अचेत
रेलवे डैम से आतिफ के शव के बाहर आते ही उसके मां-बाप अचेत हो गए। हादसे की खबर मिलने के बाद से पिता डैम के पास पहुंच गए। रात में वह परिवार के साथ वहां मौजूद रहे। सुबह गोताखोरों के आने के बाद तलाश शुरू हुई। थोड़ी देर में आतिफ का शव बाहर निकाला गया। उसके शव के बाहर आते ही पिता शहजाद गश खाकर बेहोश हो गए। होश में आते ही कहने लगे मेरा तो सब कुछ बर्बाद हो गया। आसपास के लोग किसी तरह उनको ढाढंस बंधा रहे थे लेकिन, कुछ देर में ही वह फिर अचेत हो गए। आतिफ परिवार का इकलौता बेटा था। पिता शहजाद रेलवे में ठेके पर काम करते हैं। आतिफ को पढ़ा-लिखाकर अच्छे मुकाम पर पहुंचाने के लिए उन्होंने कोई कसर भी नहीं छोड़ी थी। इस वजह से बड़े स्कूल में दाखिला दिलाया था। उधर, वेदांश के परिजन उसका इंतजार कर रहे हैं। वेदांश भी परिवार का इकलौता बेटा है।
चारों दोस्त पिकनिक मनाने के लिए बेहद गहरे डैम के बीचों-बीच जा पहुंचे थे। छोटी सी नाव लेकर गहरे पानी में पहुंचे चारों दोस्त वहां रील बनाने लगे। हादसे से कुछ देर पहले सोशल मीडिया पर अपलोड उनकी रील भी सामने आई है। इस रील में चारों दोस्त दो नाव में दिखाई दे रहे हैं। कुछ देर बाद चारों एक नाव में आ गए। वेदांश रील बना रहा है। वेदांश इसमें डैम के बारे में बता रहा है। वह कह रहा है डैम बहुत गहरा है। वे लोग बोट हाइजैक करके यहां तक पहुंचे हैं। वेदांश अपने दोस्तों से यह कहते भी सुनाई दे रहा है कि भाई..मुझे तैरना आता है। कुछ हुआ तो वह तैरकर निकल जाएगा लेकिन, हादसे के चौबीस घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वेदांश का पता नहीं चल रहा है।
काले रंग का चश्मा बना हादसे का सबब
हादसे में बाल-बाल बचे श्रवण एवं शौर्य अब भी बुरी तरह सहमे हैं। वह बात करने की स्थिति में नहीं हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि श्रवण और शौर्य ने बाहर आने के बाद हादसे की वजह बताई थी। उनका कहना था कि एक युवक के पास काले रंग का चश्मा था। चारों ही काला चश्मा पहनकर रील बनाना चाहते थे। इस वजह से नाव में अचानक खड़े हो गए। जिससे वह असंतुलित होकर पलट गई। श्रवण और शौर्य को बाहर निकालने वाले कल्लू एवं गांव के लोगों ने बताया कि रील बनाने के दौरान ही हादसा हुआ।
डैम से आतिफ का शव निकलते ही मां-बाप हुए अचेत
रेलवे डैम से आतिफ के शव के बाहर आते ही उसके मां-बाप अचेत हो गए। हादसे की खबर मिलने के बाद से पिता डैम के पास पहुंच गए। रात में वह परिवार के साथ वहां मौजूद रहे। सुबह गोताखोरों के आने के बाद तलाश शुरू हुई। थोड़ी देर में आतिफ का शव बाहर निकाला गया। उसके शव के बाहर आते ही पिता शहजाद गश खाकर बेहोश हो गए। होश में आते ही कहने लगे मेरा तो सब कुछ बर्बाद हो गया। आसपास के लोग किसी तरह उनको ढाढंस बंधा रहे थे लेकिन, कुछ देर में ही वह फिर अचेत हो गए। आतिफ परिवार का इकलौता बेटा था। पिता शहजाद रेलवे में ठेके पर काम करते हैं। आतिफ को पढ़ा-लिखाकर अच्छे मुकाम पर पहुंचाने के लिए उन्होंने कोई कसर भी नहीं छोड़ी थी। इस वजह से बड़े स्कूल में दाखिला दिलाया था। उधर, वेदांश के परिजन उसका इंतजार कर रहे हैं। वेदांश भी परिवार का इकलौता बेटा है।