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Jhansi: दतिया से मिला संदेश, प्रत्याशी चयन में भाजपा को बरतनी होगी सावधानी, 2027 में होने हैं विधानसभा चुनाव

Tue, 04 Aug 2026 02:45 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Updated Tue, 04 Aug 2026 02:45 AM IST
सार

जानकारों का कहना है कि आगामी चुनाव में प्रत्याशी की घोषणा के पहले भाजपा को देखना होगा कि टिकट के दावेदार की स्थानीय स्तर पर कितनी पकड़ मजबूत है। कार्यकर्ताओं या फिर जनता में उसको लेकर नाराजगी या फिर असंतोष तो नहीं है।

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Jhansi: Message from Datia—BJP must exercise caution in candidate selection
भाजपा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

झांसी से सटी मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा के उपचुनाव में मिली हार से भाजपा को आगामी चुनावी रणनीति तय करने को लेकर सियासी संदेश मिला है। चूंकि, 2027 में यूपी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में खासकर प्रत्याशी चयन में भाजपा को खासी सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि जानकारों का कहना है कि दतिया में सत्ताधारी पार्टी को मिली हार में यह भी एक अहम कारण माना जा रहा है।
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दतिया में मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का बीजेपी ने टिकट काटकर मूलरूप से भांडेर के रहने वाले आशुतोष तिवारी को उप चुनाव में प्रत्याशी बनाया था। टिकट की घोषणा होते ही भाजपा में असंतोष खुलकर सामने आ गया था। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने झांसी-ग्वालियर हाईवे जाम कर दिया था। उसके अगले दिन भी विरोध प्रदर्शन चला था। पुलिस से समर्थकों की भिड़ंत भी हुई थी। इसके बाद कई समर्थकों पर केस दर्ज हुए। हालांकि, फिर खुद पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मोर्चा संभाला और समर्थकों को समझाया। नरोत्तम ने भाजपा प्रत्याशी का प्रचार-प्रसार शुरू कर घर-घर जाकर वोट भी मांगे।
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इन सबके बीच सावन के पहले सोमवार को दतिया उप चुनाव का जो परिणाम आया, उससे कांग्रेसियों के चेहरे खिल उठे। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को शिकस्त दी। इससे भाजपा खेमे को बड़ा झटका लगा। चूंकि, अब यूपी के विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में दतिया उप चुनाव ने यूपी के लिए भी रणनीति बनाने को लेकर सियासी संदेश दे दिया है। जानकारों का कहना है कि आगामी चुनाव में प्रत्याशी की घोषणा के पहले भाजपा को देखना होगा कि टिकट के दावेदार की स्थानीय स्तर पर कितनी पकड़ मजबूत है। कार्यकर्ताओं या फिर जनता में उसको लेकर नाराजगी या फिर असंतोष तो नहीं है। जनहित के कामों में वह कितना आगे रहा है। साथ ही आमजन के बीच छवि कैसी है।
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एक चुनाव से यूपी को लेकर राय नहीं बनाई जा सकती: डॉ. मौर्य
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरबी मौर्य का कहना है कि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में बहुत विकास कार्य कराया है। उनकी स्थानीय पकड़ भी काफी मजबूत है। दतिया के उपचुनाव में भाजपा को मिली हार से यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कोई राय नहीं बनाई जा सकती। यूपी और एमपी के समीकरण में अंतर है। हालांकि, इस हार ने भाजपा को यह संदेश जरूर दिया है कि आगामी चुनावों में प्रत्याशी चयन में खासा फोकस करना होगा। इसके अलावा स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ बनाने के साथ ही असंतोष पैदा न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा। चूंकि, भाजपा एक बड़ा राजनीतिक दल है और हर चुनाव परिणाम का बारीकी से पार्टी मूल्यांकन भी करती है। ऐसे में आगामी चुनावों में पार्टी इन सब बिंदुओं पर निश्चित रूप से ध्यान देगी।

झांसी के भी कई नेताओं ने किया था प्रचार
दतिया उप चुनाव के दौरान झांसी के भी कई भाजपा नेताओं ने चुनाव प्रचार किया था। इसमें सांसद अनुराग शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम, मेयर बिहारी लाल आर्य, विधायक राजीव सिंह पारीछा, विधायक रवि शर्मा, विधायक जवाहर राजपूत समेत कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हैं। इन्होंने भी भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए ताकत झोंकी थी। इसके बावजूद चुनावी परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं आ सके। 

भाजपा की हार के ये मुख्य कारण
दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद उनके समर्थकों में उदासीनता आई, गुटबाजी बढ़ी
उपचुनाव में 2023 की तुलना में वोटिंग प्रतिशत कम रहा, माना जा रहा है कि भाजपा के वोटर कम निकले
प्रत्याशी की स्थानीय पकड़ मजबूत न होने के साथ ही भितरघात के चलते भी भाजपा को नुकसान हुआ


कांग्रेसी की जीत के ये मुख्य कारण
कांग्रेस उम्मीदवार की विधानसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़, साफ-सुथरी छवि और आम स्वीकार्यता
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर तक संपर्क अभियान चलाया, अपने वोटरों को केंद्र तक लाने में हुए सफल
भाजपा की गुटबाजी का भी लाभ मिला, सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी कांग्रेस ने बेहतर ढंग से साधा


ये बोले पदाधिकारी
दतिया के उपचुनाव में जो जनादेश मिला है, उसका पूरा सम्मान है। विपक्ष जब भी हारता है तो ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने लगता है। अब जीतने के बाद ईवीएम पर चुप्पी साध ली है। इससे स्पष्ट है कि विपक्ष जनादेश का सम्मान नहीं करता है। - प्रदीप पटेल, जिलाध्यक्ष, भाजपा।


यह चुनाव भाजपा सरकार बनाम कांग्रेस प्रत्याशी था। सरकार ने जीत के लिए हर हथकंडे अपनाए। इसके बावजूद लोकतंत्र की जीत हुई है। यह कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। झांसी के कार्यकर्ता दतिया में दिन-रात जनसंपर्क करते रहे। - मनोज गुप्ता, महानगर अध्यक्ष, कांग्रेस।
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