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Jhansi: शहरी ढांचे पर बढ़ा दबाव, 125 साल में 6 गुना बढ़ी आबादी, जेडीए तैयार कर रहा नया मास्टर प्लान
Sat, 11 Jul 2026 02:35 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:35 AM IST
सार
बढ़ती आबादी को देखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है। इसके तहत करीब 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नियोजित विकास का लक्ष्य रखा गया है।
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झांसी महानगर।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) पर यदि झांसी के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर चौंकाने वाली है। पिछले 125 वर्षों में जिले की आबादी करीब छह गुना बढ़ चुकी है लेकिन शहर का बुनियादी ढांचा उसी गति से विकसित नहीं हो सका। नतीजा यह है कि पानी, सीवर, सड़क, बिजली, आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ती आबादी को देखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है। इसके तहत करीब 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नियोजित विकास का लक्ष्य रखा गया है।
अर्थ एवं संख्यायिकी विभाग के अनुसार वर्ष 1901 में झांसी जिले की आबादी 4.27 लाख थी। वर्ष 2026 में इसके करीब 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यानी 125 वर्षों में जिले में 20.73 लाख नए नागरिक जुड़े हैं। इस अवधि में आबादी में 485.65 प्रतिशत (5.86 गुना) वृद्धि दर्ज हुई है। औसतन हर साल 16,585 लोग जिले की आबादी में जुड़े। विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि केवल प्राकृतिक जनसंख्या बढ़ने से नहीं हुई, बल्कि गांवों से शहरों की ओर लगातार बढ़ते पलायन ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में लोग शहर की ओर आ रहे हैं।
वर्तमान अनुमान के अनुसार जिले की 58.3 प्रतिशत आबादी (करीब 14.58 लाख) ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 41.7 प्रतिशत (करीब 10.42 लाख) आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। हालांकि शहरी आबादी का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन उसी अनुपात में सड़क, सीवर, पेयजल, सार्वजनिक परिवहन और आवासीय सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया।
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सबसे बड़ी चिंता : सीवर नेटवर्क
झांसी के शहरी विकास की सबसे कमजोर कड़ी आज भी सीवर व्यवस्था है। तेजी से बढ़ती आबादी के बावजूद शहर का बड़ा हिस्सा अभी भी सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ा है। यदि भविष्य की आबादी को ध्यान में रखकर समय रहते निवेश नहीं हुआ, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
1901 की तुलना में आबादी में काफी वृद्धि हुई है। हालांकि 2001-2011 के दौरान जनसंख्या वृद्धि दर पहले की तुलना में कम रही। इसका प्रमुख कारण परिवार नियोजन के प्रति बढ़ती जागरूकता है। - अर्चना सिंह, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी (डीएसटीओ)
बढ़ती आबादी के लिए 500 वर्ग किमी में विकसित होगा झांसी
तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है। इस योजना के तहत अगले दशक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहर का नियोजित विस्तार किया जाएगा, ताकि लोगों को बेहतर आवासीय, यातायात और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। जेडीए के टाउन प्लानर विजय कुमार सिंह ने बताया कि मास्टर प्लान करीब 13 लाख की प्रस्तावित शहरी आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके तहत शहरी क्षेत्र के साथ आसपास के कुछ ग्रामीण इलाकों को मिलाकर लगभग 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नियोजित विकास होगा। इनमें से करीब 19 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शहरीकरण के लिए चिह्नित किया गया है। योजना के तहत निजी क्षेत्र में 250-250 एकड़ की दो टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इसके अलावा जेडीए स्वयं 1000 एकड़ में एक बड़ी एकीकृत टाउनशिप विकसित करेगा। यह परियोजना ग्वालियर-कानपुर हाईवे और ग्वालियर रोड के अंबावाय क्षेत्र में प्रस्तावित है।
मास्टर प्लान के साथ जोनल प्लान भी तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से नई कॉलोनियों और विकसित होने वाले क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, सीवर, बिजली, अस्पताल, स्कूल, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित किया जाएगा। ब्यूरो
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अर्थ एवं संख्यायिकी विभाग के अनुसार वर्ष 1901 में झांसी जिले की आबादी 4.27 लाख थी। वर्ष 2026 में इसके करीब 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यानी 125 वर्षों में जिले में 20.73 लाख नए नागरिक जुड़े हैं। इस अवधि में आबादी में 485.65 प्रतिशत (5.86 गुना) वृद्धि दर्ज हुई है। औसतन हर साल 16,585 लोग जिले की आबादी में जुड़े। विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि केवल प्राकृतिक जनसंख्या बढ़ने से नहीं हुई, बल्कि गांवों से शहरों की ओर लगातार बढ़ते पलायन ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में लोग शहर की ओर आ रहे हैं।
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वर्तमान अनुमान के अनुसार जिले की 58.3 प्रतिशत आबादी (करीब 14.58 लाख) ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 41.7 प्रतिशत (करीब 10.42 लाख) आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। हालांकि शहरी आबादी का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन उसी अनुपात में सड़क, सीवर, पेयजल, सार्वजनिक परिवहन और आवासीय सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया।
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सबसे बड़ी चिंता : सीवर नेटवर्क
झांसी के शहरी विकास की सबसे कमजोर कड़ी आज भी सीवर व्यवस्था है। तेजी से बढ़ती आबादी के बावजूद शहर का बड़ा हिस्सा अभी भी सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ा है। यदि भविष्य की आबादी को ध्यान में रखकर समय रहते निवेश नहीं हुआ, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
1901 की तुलना में आबादी में काफी वृद्धि हुई है। हालांकि 2001-2011 के दौरान जनसंख्या वृद्धि दर पहले की तुलना में कम रही। इसका प्रमुख कारण परिवार नियोजन के प्रति बढ़ती जागरूकता है। - अर्चना सिंह, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी (डीएसटीओ)
बढ़ती आबादी के लिए 500 वर्ग किमी में विकसित होगा झांसी
तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है। इस योजना के तहत अगले दशक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहर का नियोजित विस्तार किया जाएगा, ताकि लोगों को बेहतर आवासीय, यातायात और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। जेडीए के टाउन प्लानर विजय कुमार सिंह ने बताया कि मास्टर प्लान करीब 13 लाख की प्रस्तावित शहरी आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके तहत शहरी क्षेत्र के साथ आसपास के कुछ ग्रामीण इलाकों को मिलाकर लगभग 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नियोजित विकास होगा। इनमें से करीब 19 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शहरीकरण के लिए चिह्नित किया गया है। योजना के तहत निजी क्षेत्र में 250-250 एकड़ की दो टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इसके अलावा जेडीए स्वयं 1000 एकड़ में एक बड़ी एकीकृत टाउनशिप विकसित करेगा। यह परियोजना ग्वालियर-कानपुर हाईवे और ग्वालियर रोड के अंबावाय क्षेत्र में प्रस्तावित है।
मास्टर प्लान के साथ जोनल प्लान भी तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से नई कॉलोनियों और विकसित होने वाले क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, सीवर, बिजली, अस्पताल, स्कूल, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित किया जाएगा। ब्यूरो