फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Tolerance is decreasing in children due to every stubbornness being fulfilled.

Jhansi News: हर जिद पूरी होने से बच्चों में घट रही सहनशीलता

Sun, 12 Jul 2026 02:53 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Sun, 12 Jul 2026 02:53 AM IST
विज्ञापन
Tolerance is decreasing in children due to every stubbornness being fulfilled.
झांसी। बच्चों की हर मांग तुरंत पूरी करना भविष्य में उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर इच्छा पूरी होने से किशारों और युवाओं में निराशा सहने की क्षमता कम होती जा रही है। जब उनकी कोई इच्छा पूरी नहीं होती, तो कुछ मामलों में वे आत्मघाती कदम उठाने या आक्रामक व्यवहार करने तक पहुंच जाते हैं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में ऐसे पांच से अधिक बच्चों के परिजन उपचार के लिए लेकर आए। उनके अनुसार, जरूरत और उपयोगिता का आकलन किए बिना बच्चों की हर मांग पूरी करना उचित नहीं है। इसके साथ ही घंटों सोशल मीडिया, विशेषकर रील्स देखने की आदत भी उनकी भावनात्मक सहनशीलता को प्रभावित कर रही है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि सीमित सामाजिक अनुभव और अपरिपक्व सोच के कारण कई बच्चे किसी बात पर ''न'' सुनने के लिए तैयार नहीं होते। जब उनकी इच्छा पूरी नहीं होती, तो वे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठते हैं। ऐसे में कुछ युवा आत्मघाती कदम उठाने या हिंसक व्यवहार करने तक पहुंच जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


केस-1
बीटेक का एक छात्र अपनी पसंद की लड़की से शादी कराना चाहता था। जब माता-पिता ने उसके कहने पर लड़की के घर रिश्ता लेकर जाने से इन्कार किया, तो उसने उनके साथ मारपीट करने का प्रयास किया। बाद में परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।

केस-2
शिवाजी नगर की एक युवती ने एक युवक के बातचीत बंद करने पर आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया। काउंसलिंग के दौरान युवक ने बताया कि उसका युवती से किसी प्रकार का संबंध नहीं था और उसने संबंध रखने से इन्कार कर दिया था।


केस-3
शहर की एक किशोरी ने परिजनों के सामने एक युवक से शादी की इच्छा जताई। परिवार ने मना किया तो वह कथित तौर पर परिजनों को नींद की गोलियां देकर रात में घर छोड़कर चली गई। बाद में उसे सुरक्षित बरामद कर काउंसलिंग कराई गई।

विशेषज्ञों की सलाह---
- बच्चों की हर मांग तुरंत पूरी करने के बजाय जरूरत और उपयोगिता के आधार पर निर्णय लें।
- समय-समय पर ''न'' कहना भी सीखाएं, ताकि वे निराशा को स्वीकार करना सीख सकें।
- मोबाइल और सोशल मीडिया के उपयोग के लिए समय सीमा तय करें।
- बच्चों से रोज खुलकर बातचीत करें और उनकी भावनाओं को सुनें।
- असफलता और निराशा को जीवन का सामान्य हिस्सा समझाएं।
- खेल, पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित करें।
- व्यवहार में अचानक बदलाव या निराशा की बातें करना जैसे संकेत दिखें तो मनोचिकित्सक से सलाह लें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed